नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 जून) को कर्नाटक हाई कोर्ट के उस मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया जो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को एथेनॉल की सप्लाई का आवंटन बढ़ाने से जुड़ा था। हालांकि भारत सरकार ने इसे एक प्रोग्राम बताया है और कहा कि अगले साल तक इसके असर की रिपोर्ट मिलेगी।
जस्टिस एमएम सुंद्रेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। बता दें कि ऑयल मार्केटिंग कंपनी ने उस पहले आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें 2025-26 के लिए एथेनॉल का आवंटन बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।
समाचार एजेंसी PTI की रिपोर्ट के अनुसार, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने BPCL का पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि हाई कोर्ट का आदेश पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की राष्ट्रीय नीति को अस्थिर कर सकता है।
गौरतलब है कि भारत एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम का पालन करता है। इस प्लान के तहत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। इसे आम तौर पर E20 फ्यूल के नाम से जाना जाता है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?
इस मामले में सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम एक चल रहा प्रयोग है और इस पॉलिसी का असर अगले साल तक और साफ हो जाएगा।
वेंकटरमणी ने कहा कि एथेनॉल सप्लाई के कॉन्ट्रैक्ट अक्टूबर 2025 में पूरे हुए थे। उन्होंने बताया कि एथेनॉल एलोकेशन की प्रक्रिया 17 अक्टूबर, 2025 को पूरी हुई और 378 सप्लायर्स को कुल 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की सप्लाई के लिए एलोकेशन की जानकारी दी गई। इनमें से 680 करोड़ लीटर एथेनॉल की सप्लाई वे 18 जून तक कर चुके थे।
वेंकटरमणी ने हालांकि E-20 को एक्सपेरिमेंटल आधार पर शुरू करने की बात कही लेकिन किसी सरकारी रिकॉर्ड में इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं बताई गई है। इसके साथ ही सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग को नई सीमाओं तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।
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गौरतलब है कि ब्लेंडिंग प्रोग्राम देश में पहले से ही विवाद का विषय बन गया है, क्योंकि लोग पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंचने और फ्यूल एफिशिएंसी कम होने की बात कह रहे हैं।
सरकार ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि ब्लेंडेड पेट्रोल और मैकेनिकल नुकसान के बीच कोई संबंध होने का कोई सबूत नहीं है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने आदेश में क्या कहा था?
यह मामला तब शुरू हुआ जब एथेनॉल बनाने वाली एक कंपनी ने एथेनॉल सप्लाई के कम आवंटन (allocation) को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लाइव लॉ के मुताबिक, डिस्टिलरी ने कहा कि प्लांट की प्रोडक्शन क्षमता 9.9 करोड़ लीटर है लेकिन 2025-2026 में उसे सिर्फ़ 3.92 करोड़ लीटर का आवंटन मिला।
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इस पॉलिसी का विरोध करते हुए कहा कि अगर वे याचिकाकर्ता की अपील पर विचार करती हैं, तो इसके लिए खुद सरकारी पॉलिसी में बदलाव करना होगा।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने डिस्टिलरी का पक्ष लिया और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निर्देश दिया कि वे 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन बढ़ाने पर विचार करें।
सरकार ने 2022 में बायोफ्यूल पर राष्ट्रीय नीति में संशोधन किया और पेट्रोल में एथेनॉल की धीरे-धीरे ब्लेंडिंग करने की घोषणा की। लक्ष्य यह था कि फरवरी 2025 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग को 2022-2023 में 12.06 प्रतिशत, 2023-24 में 14.6 प्रतिशत और 2024-25 में 17.98 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए। गौरतलब है कि सरकार पहले ही 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर चुकी है।
आधिकारिक नीति के मुताबिक, हालांकि एथेनॉल ब्लेंडिंग को 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया गया है लेकिन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और हरदीप सिंह पुरी ने सुझाव दिया है कि एथेनॉल की मात्रा को 85 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।

