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अरुंधति रॉय की किताब कवर पर धूम्रपान वाली तस्वीर के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने अरुंधति रॉय की किताब कवर पर आपत्ति जताते दायर की गई याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने इसे प्रचार याचिका कहा है।

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अरुंधति रॉय

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 5 दिसंबर को अरुंधति रॉय की नई किताब ‘मदर मेरी कम्स टू मी’ के कवर पर उनकी धूम्रपान वाली तस्वीर के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस याचिका को ‘प्रचार याचिका’ करार दिया है।

याचिकाकर्ता ने केरल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इससे पहले केरल हाई कोर्ट ने भी याचिका खारिज की थी।

अरुंधति रॉय की किताब कवर पर याचिकाकर्ता ने क्या तर्क दिए?

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि कवर फोटो सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध तथा व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 की धारा 5 का उल्लंघन है जो तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों को नियंत्रित करता है।

मामले की सुनवाई कर रही सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने हालांकि कहा कि रॉय ने धूम्रपान को बढ़ावा या विज्ञापित नहीं किया है और पुस्तक के दर्शक केवल उन लोगों तक सीमित हैं जो पुस्तक खरीदेंगे और पढ़ेंगे।

पीठ ने कहा कि इसलिए यह किसी नियम का उल्लंघन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनका साहित्यिक कार्य 2003 अधिनियम की धारा 5 का कोई उल्लंघन नहीं करता है। हमें उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता। विशेष अनुमति खारिज की जाती है।

इसने याचिकाकर्ता को प्रचार के लिए ऐसी याचिकाएं दायर करने के प्रति भी आगाह किया है। अदालत ने कहा “वह एक प्रसिद्ध लेखिका हैं। उन्होंने ऐसी किसी चीज का प्रचार नहीं किया है। किताब में एक गर्माहट है और वह एक प्रतिष्ठित भी हैं। प्रचार के लिए ऐसा क्यों किया जाए? शहर में किताब की तस्वीर वाला कोई होर्डिंग नहीं है। यह किसी ऐसे व्यक्ति के लिए है जो किताब लेगा और उसे पढ़ेगा। उनकी तस्वीर में ऐसी कोई बात नहीं है। किताब, प्रकाशक या लेखक का सिगरेट आदि के विज्ञापन से कोई लेना-देना नहीं है। यह कोई विज्ञापन नहीं है। आप लेखक के विचारों से असहमत हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ऐसा मामला झूठा हो सकता है।”

वकील राजसिंहन ने दायर की थी याचिका

वकील राजसिंहन द्वारा यह जनहित याचिका हाई कोर्ट के समक्ष दायर की गई थी। उन्होंने याचिका में कहा था कि लेखिका की सिगरेट पीती तस्वीर को लेकर कहा था कि यह बौद्धिक और रचनात्मक अभिव्यक्ति के प्रतीक के रूप में महिमामंडित करती है। राजसिंहन ने स्पष्ट किया कि वह किताब की विषयवस्तु या साहित्यिक तत्व को चुनौती नहीं दे रही हैं।

याचिका के मुताबिक, यह पुस्तक सभी के लिए सुलभ है और इसमें संवेदनशील युवाओं, विशेषकर किशोर लड़कियों और महिलाओं को यह भ्रामक संदेश देने की क्षमता है कि धूम्रपान करना एक फैशन है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस तरह का चित्रण सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन निषेध और व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण विनियमन) अधिनियम, 2003 (सीओटीपीए) और 2008 के नियमों के प्रावधानों का उल्लंघन है।

इसलिए उन्होंने लेखक और प्रकाशक को कथित आवरण चित्र वाली पुस्तक को आगे प्रसारित या बेचने से रोकने के लिए निर्देश देने की प्रार्थना की।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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