पश्चिमी प्रशांत महासागर में सक्रिय सुपर टाइफून बावी (Bavi) ताइवान, जापान और चीन के लिए बड़ा खतरा बन गया है। फिलीपींस में इसके बाहरी प्रभाव से हुई भारी बारिश और भूस्खलन में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि ताइवान में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। करीब 1,000 किलोमीटर चौड़ा यह तूफान अपने सबसे बड़े दायरे में फ्रांस जितना विशाल बताया जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह इस साल के सबसे शक्तिशाली उष्णकटिबंधीय तूफानों में से एक है।
बावी ने सबसे पहले फिलीपींस में दक्षिण-पश्चिम मानसून को बेहद सक्रिय कर दिया। इसके कारण मिंडानाओ क्षेत्र में भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाएं हुईं, जिनमें कम से कम 15 लोगों की जान चली गई। कई सड़कें बंद हो गईं और राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। इसके बाद तूफान उत्तर की ओर बढ़ते हुए ताइवान, जापान और चीन की दिशा में आगे बढ़ गया।
ताइवान में बड़े पैमाने पर तैयारियां
तूफान को देखते हुए ताइवान सरकार ने 14 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सबसे ज्यादा निकासी पूर्वी और उत्तरी पहाड़ी इलाकों में की गई, जहां भूस्खलन का खतरा अधिक है। ताइवान के केंद्रीय आपदा संचालन केंद्र के अनुसार शनिवार सुबह तक 36 लोग घायल हुए थे। अधिकांश हादसे तेज बारिश और फिसलन के कारण मोटरसाइकिल दुर्घटनाओं में हुए।
सरकार ने कई शहरों में स्कूल, कार्यालय और सरकारी संस्थान बंद कर दिए हैं। 917 अंतरराष्ट्रीय और सभी 274 घरेलू उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। ताइपे के ताओयुआन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भी उड़ानें प्रभावित हुईं। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 29 हजार सैनिकों को तैयार रखा गया है। कई शहरों में रेत की बोरियां लगाई गई हैं और लोग आवश्यक वस्तुओं का भंडारण कर रहे हैं।
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि तूफान की तीव्रता कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन इसका आकार अभी भी बहुत बड़ा है और यह भारी बारिश तथा तेज हवाएं ला सकता है। केंद्रीय मौसम प्रशासन का कहना है कि यदि अनुमान सही साबित हुए तो यह 1987 के बाद ताइवान का सबसे बड़ा तूफान हो सकता है।
जापान में 100 से अधिक उड़ानें रद्द, चीन के लिए दोहरी मुसीबत
जापान के साकिशिमा द्वीप समूह में तेज हवाओं और ऊंची लहरों के कारण उड़ानें तथा फेरी सेवाएं रोक दी गई हैं। जापान एयरलाइंस ने 100 से अधिक उड़ानें रद्द की हैं, जबकि ऑल निप्पॉन एयरवेज ने भी 160 से ज्यादा उड़ानें स्थगित कर दी हैं। हजारों यात्री प्रभावित हुए हैं।
उधर चीन ने फुजियान सहित पूर्वी तटीय प्रांतों में हाई अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ की चेतावनी दी है। बीजिंग क्षेत्र में लगातार बारिश के बीच 95 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। दक्षिणी चीन के कई हिस्से पहले से बाढ़ का सामना कर रहे हैं, जिससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है।
बावी ऐसे समय आया है जब चीन हाल ही में आए टाइफून मेसाक की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा है। मेसाक के कारण 39 लोगों की मौत हुई थी और 1.30 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा था। कृषि, पशुधन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था। लगातार दूसरे बड़े तूफान ने पूरे पूर्वी एशिया में आपदा प्रबंधन एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
ये भी पढ़ेंः मुंबई की बारिश सिर्फ मानसून नहीं, बदलती जलवायु का संकेत… क्या समुद्र किनारे बसे भारत के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है?
वैज्ञानिकों का क्या कहना है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र की सतह का बढ़ता तापमान उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को अधिक तीव्र बना सकता है। नासा के अनुसार, 5 जुलाई को सुपर टाइफून बावी की अधिकतम हवा की रफ्तार 290 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। बाद में इसकी तीव्रता कुछ कम हुई, लेकिन चीन के राष्ट्रीय मौसम केंद्र के मुताबिक यह अभी भी लगभग 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
उपग्रह आंकड़ों के अनुसार, जिस समुद्री क्षेत्र में यह तूफान बना वहां सतही समुद्री तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस था, जो इतने शक्तिशाली चक्रवातों के विकास के लिए अनुकूल माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक तूफान को सीधे जलवायु परिवर्तन का परिणाम नहीं कहा जा सकता, लेकिन हाल के वर्षों में पश्चिमी प्रशांत में लगातार अधिक तीव्र तूफानों की बढ़ती संख्या वैश्विक जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंताओं को मजबूत करती है।
भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
सुपर टाइफून बावी का भारत के मौसम पर फिलहाल कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं है और भारतीय मौसम विभाग ने भी इससे जुड़ी कोई चेतावनी जारी नहीं की है। हालांकि इसका असर अप्रत्यक्ष रूप से वैश्विक व्यापार और आपूर्ति शृंखला के माध्यम से महसूस किया जा सकता है।
गौरतलब है कि ताइवान और पूर्वी चीन दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक क्षेत्रों में शामिल हैं। इसी क्षेत्र के बंदरगाहों से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कच्चा माल और औद्योगिक उत्पाद बड़ी मात्रा में दुनिया भर में भेजे जाते हैं। रॉयटर्स के अनुसार, तूफान के खतरे को देखते हुए कई बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और कुछ स्थानों पर परिचालन धीमा पड़ा है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक शिपिंग और माल ढुलाई पर असर पड़ सकता है।
भारत का चीन, ताइवान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ बड़ा समुद्री व्यापार है। ऐसे में इन क्षेत्रों के बंदरगाहों पर लंबे समय तक व्यवधान रहने की स्थिति में आयात-निर्यात और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है। हालांकि अब तक भारत के व्यापार पर किसी प्रत्यक्ष प्रभाव की बात सामने नहीं आई है।
इसके अलावा ताइवान दुनिया के सबसे बड़े सेमीकंडक्टर उत्पादन केंद्रों में से एक है। यहां बनने वाली अत्याधुनिक चिप्स का इस्तेमाल स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा सेंटर और रक्षा उपकरणों तक में होता है। फिलहाल प्रमुख कंपनियों ने उत्पादन प्रभावित होने की कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन अगर प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पादन या लॉजिस्टिक्स लंबे समय तक बाधित होते हैं तो इसका असर वैश्विक चिप सप्लाई चेन पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारत जैसे आयातक देशों तक भी पहुंच सकता है।

