तमिल फिल्म ‘पराशक्ति’ (Parasakthi) अपनी रिलीज के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई है। 1960 के दशक के ‘हिंदी विरोधी आंदोलन’ पर आधारित इस फिल्म को लेकर न केवल राजनीतिक गलियारों में विरोध के स्वर उठे हैं, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर इसकी धीमी रफ्तार ने निर्देशक सुधा कोंगरा और सुपरस्टार थलपति विजय के प्रशंसकों के बीच एक बड़ी सोशल मीडिया जंग छेड़ दी है।
विजय के फैंस पर बरसीं सुधा कोंगरा
‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ को दिए एक साक्षात्कार में निर्देशक सुधा कोंगरा ने आरोप लगाया कि विजय के प्रशंसकों का एक बड़ा समूह उनकी फिल्म को ऑनलाइन निशाना बना रहा है। सुधा का दावा है कि फर्जी आईडी के जरिए फिल्म के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है और अभद्र भाषा का इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रशंसकों द्वारा यह संदेश फैलाया जा रहा है कि फिल्म तभी चल पाएगी जब वे ‘अन्ना’ (विजय) के फैंस से माफी मांगेंगी।
निर्देशक ने संकेत दिया कि यह विरोध संभवतः विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ के साथ होने वाले संभावित टकराव की वजह से शुरू हुआ है। उन्होंने कहा, “आज के समय में सिर्फ फिल्म बनाना काफी नहीं है, बल्कि अज्ञात आईडी के पीछे छिपे लोगों द्वारा किए जा रहे मानहानि के प्रयासों का सामना करना भी मार्केटिंग का हिस्सा बन गया है।”
‘अपनी विफलता के लिए हमें जिम्मेदार न ठहराएं’
सुधा कोंगरा के इन बयानों के बाद थलपति विजय के प्रशंसकों ने भी कड़ा रुख अपनाया है। प्रशंसकों का कहना है कि फिल्म की विफलता का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ना सुधा की ‘रचनात्मक कायरता’ है। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने तर्क दिया कि यदि फिल्म की पटकथा और लेखन में दम होता, तो कोई भी उसे सफल होने से नहीं रोक सकता था। एक प्रशंसक ने लिखा, “5 करोड़ लोगों ने ट्रेलर देखा था, अगर वे थिएटर नहीं आए तो यह फिल्म की अपनी कमजोरी है, विजय के फैंस का इसमें कोई हाथ नहीं है।”
कांग्रेस के नेताओं को गलत तरीके से दिखाया गया है?
फिल्म केवल प्रशंसकों के बीच ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है। तमिलनाडु यूथ कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि फिल्म में उनके नेताओं को गलत तरीके से पेश किया गया है। इन आरोपों पर सफाई देते हुए सुधा कोंगरा ने आईएएनएस से कहा, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को सकारात्मक और लोकतांत्रिक नेताओं के रूप में पेश किया गया है। सुधा कोंगारा ने कहा कि फिल्म यह दिखाती है कि किस तरह नेताओं और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता था और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने की कोशिश की गई।
उन्होंने तमिलनाडु यूथ कांग्रेस के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि फिल्म में नेहरू के उस वादे को रेखांकित किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दक्षिण भारत की सहमति के बिना हिंदी को अकेली आधिकारिक भाषा नहीं बनाया जाएगा। इंदिरा गांधी से जुड़े एक दृश्य का जिक्र करते हुए सुधा कोंगारा ने कहा कि फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि लोकतांत्रिक नेता का काम आदेश देना नहीं, बल्कि सही समय पर हस्तक्षेप करना और लोगों की बात सुनना होता है।
पोंगल के मौके पर 10 जनवरी को रिलीज हुई फिल्म ‘पराशक्ति’ में शिवकार्तिकेयन, श्रीलीला और अथर्वा जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद फिल्म की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट काफी चिंताजनक है। Sacnilk.com के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म अब तक 30 करोड़ रुपये का आंकड़ा भी पार करने में सफल नहीं हो पाई है।
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ ‘पराशक्ति’ सिनेमाघरों तक पहुँच गई है, वहीं थलपति विजय की आखिरी फिल्म ‘जन नायकन’ अब भी सेंसरशिप और कानूनी उलझनों में फंसी हुई है। विजय के प्रशंसकों के बीच नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी है कि उनकी पसंदीदा फिल्म की रिलीज में देरी हो रही है, जबकि सुधा कोंगरा ने ‘पराशक्ति’ के कट्स को लेकर सेंसर बोर्ड का बचाव करते हुए कहा था कि बोर्ड केवल अपना काम कर रहा है। बता दें कि पराशक्ति में 25 कट्स लगे थे। इसी विरोधाभासी रुख ने प्रशंसकों के गुस्से को और भड़का दिया है, जिसे अब ऑनलाइन ट्रोलिंग के रूप में देखा जा रहा है।
बता दें कि पराशक्ति फिल्म की शुरुआत तो अच्छी रही थी और इसने पहले दिन 12.5 करोड़ रुपये की कमाई की थी, लेकिन चौथे दिन तक आते-आते यह आंकड़ा सिमटकर महज 2.40 करोड़ रुपये के शुरुआती अनुमान तक रह गया है। एक ऐतिहासिक आंदोलन पर आधारित होने और बड़े कलाकारों के साथ आने के बावजूद, ‘पराशक्ति’ इस समय विवादों और दर्शकों की कमी की दोहरी मार झेल रही है। उदयनिधि स्टालिन की ‘रेड जाइंट मूवीज’ द्वारा डिस्ट्रीब्यूट की गई इस फिल्म के लिए आने वाले हफ्तों का सफर काफी चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।

