नई दिल्ली: कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसे पार्टी ने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद अपने डेटा की सुरक्षा की मांग करते हुए दायर की थी। सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट को बताया कि उसने तलाशी के दौरान दोनों जगहों से ‘कुछ भी जब्त नहीं किया है।’
तृणमूल कांग्रेस ने 8 जनवरी को ईडी की छापेमारी के बाद हाई कोर्ट का रुख किया था, और अपने पॉलिटिकल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए न्यायिक निर्देश मांगे थे। पार्टी ने अपनी याचिका में डर जताया था कि छापे के दौरान उससे जुड़े अहम डेटा जब्त किए जा सकते हैं। पार्टी ने कहा कि I-PAC छह साल से उसके चुनाव सलाहकार के तौर पर काम कर रहा था और इसलिए उसका गोपनीय डेटा खतरे में है।
हमने कुछ जब्त नहीं किया,ममता बनर्जी सब ले गईं: ईडी
वहीं, ईडी की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि तलाशी के दौरान कुछ भी जब्त नहीं किया गया। टीएमसी की याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस सुव्रा घोष ने कहा कि ईडी और भारत सरकार द्वारा दी गई दलीलों को देखते हुए, ‘इस याचिका में अब और कुछ करने की जरूरत नहीं है।’
सुनवाई के दौरान तृणमूल ने दलील दी कि उसकी याचिका सिर्फ इस बात तक सीमित है कि उसका पॉलिटिकल डेटा सुरक्षित रखा जाए।
हालांकि, ED ने याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए दोहराया, ‘कुछ भी जब्त नहीं किया गया है। जो कुछ भी लिया गया था, वह ममता बनर्जी अपने साथ लेकर चली गई थीं।’
एजेंसी ने कोर्ट को यह भी बताया कि सर्च ऑपरेशन का तृणमूल कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं था। ईडी ने कहा, ‘छापेमारी का तृणमूल कांग्रेस से कोई लेना-देना नहीं था, और जिस व्यक्ति पर ED ने छापा मारा था, वह आपके सामने नहीं आया है।’
ईडी की याचिका भी टाली, अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
जस्टिस घोष ने ईडी द्वारा दायर एक अलग याचिका को भी टाल दिया, जिसमें 8 जनवरी की घटनाओं की CBI जांच की मांग की गई थी। ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छापेमारी के दौरान I-PAC ऑफिस और जैन के आवास पर जाने को लेकर आपत्ति जताई थीं। कोर्ट ने याचिका स्थगित करने के कारण के रूप में ईडी द्वारा इन्हीं तरह की बातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जाने के फैसले का हवाला दिया।
ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह कथित तौर पर मुख्यमंत्री के साथ मिलकर उसके अधिकारियों को रोक रही है और दावा किया है कि बनर्जी सर्च वाली जगहों पर गईं और दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सहित ‘अहम’ सबूत ले गईं।
एजेंसी ने एक स्वतंत्र CBI जांच की मांग की है। उसका तर्क है कि कथित दखलअंदाजी से उसकी जांच प्रभावित हुई है। अब इस मामले की सुनवाई गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में होनी है, जहां ईडी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर रुकावट डालने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दायर की है। राज्य सरकार ने एक कैविएट दायर की है।

