नई दिल्लीः भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भी जारी रहा। मंगलवार को बिकवाली के दबाव के चलते बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक भारी गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,100 अंकों से ज्यादा टूटकर 74,894.39 के निचले स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 23,493.45 के इंट्रा-डे लो तक आ गया।
पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 3,000 अंकों से अधिक यानी करीब 4 प्रतिशत टूट चुका है। वहीं निफ्टी में भी 3 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में आई इस तेज कमजोरी से निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ है और बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 13 लाख करोड़ रुपए घट गया।
पीएम मोदी की अपील का भी दिखा असर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल-डीजल और गैस के सीमित इस्तेमाल तथा एक साल तक सोने की खरीदारी टालने की अपील का असर कुछ सेक्टरों के शेयरों पर साफ दिखाई दिया।
इस बयान के बाद ज्वेलरी, ट्रैवल और होटल सेक्टर में बिकवाली बढ़ गई। निवेशकों को आशंका है कि उपभोग में कमी आने से इन क्षेत्रों की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो इन सेक्टरों में फिर सुधार देखने को मिल सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव भी बाजार पर भारी पड़ रहा है। युद्धविराम और बातचीत की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इससे कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
ब्रेंट क्रूड पिछले दो महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। महंगे कच्चे तेल से महंगाई बढ़ने, सरकार के वित्तीय संतुलन पर दबाव आने और आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की ऊंची कीमतें कंपनियों की लागत बढ़ाती हैं और इससे कॉरपोरेट मुनाफे पर असर पड़ सकता है। साथ ही इससे रुपए पर भी अतिरिक्त दबाव बनता है।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर रुपया
भारतीय रुपया भी लगातार दबाव में बना हुआ है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 35 पैसे टूटकर 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
साल की शुरुआत में रुपया करीब 90 प्रति डॉलर के स्तर पर था, लेकिन अब इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। रुपए की कमजोरी ने विदेशी निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।
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विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। पिछले साल जुलाई से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए निकाले हैं।
सिर्फ मई महीने में ही एफपीआई लगभग 19,500 करोड़ रुपए के शेयर बेच चुके हैं। लगातार जारी इस बिकवाली ने बाजार की कमजोरी को और गहरा कर दिया है।
इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा रही है। अमेरिका के 10 साल के बॉन्ड की यील्ड लगातार ऊंची बनी हुई है, जिसके चलते विदेशी निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। अगर वैश्विक तनाव कम होता है और तेल कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार में दोबारा तेजी लौट सकती है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

