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‘सोनम वांगचुक के भाषणों का जरूरत से ज्यादा विश्लेषण कर रही सरकार’, सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत पर उठाए सवाल

सोनम वांगचुक मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। अदालत ने कहा कि सरकार उनके भाषणों का जरूरत से ज्यादा विश्लेषण कर रही है।

supreme court close plea against sonam wangchuk detention released on 14 march
फोटोः आईएएनएस

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (11 फरवरी) को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हिरासत में लेने के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार उनके बयानों का “बहुत अधिक” अर्थ निकाल रही है।

जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की पीठ ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे आंगमो द्वारा उनकी निवारक हिरासत के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी गई?

इस याचिका का विरोध करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि वांगचुक ने चेतावनी दी थी कि लद्दाख में नेपाल में हुई हिंसा जैसी ही हिंसक घटना हो सकती है और युवा शांतिपूर्ण तरीकों की प्रभावशीलता पर संदेह व्यक्त कर रहे हैं।

हालांकि अदालत ने कहा कि वांगचुक ने इसके बजाय इसी बात पर चिंता व्यक्त की थी।

अदालत ने कहा “वह चिंतित हैं… हमें पूरा वाक्य लेना होगा… इसे पढ़ना होगा… ‘कुछ लोग गांधीवादी शांतिपूर्ण तरीकों को त्याग रहे हैं। यह चिंताजनक है’… मुख्य बिंदु अहिंसक मार्ग से विमुख होना है, विमुख होना चिंताजनक है।”

इसके जवाब में एएसजी नटराज ने कहा कि वांगचुक ने अपने भाषण में “हाइब्रिड अभिव्यक्तियों” का प्रयोग किया था। इस पर अदालत ने कहा, बहुत ज्यादा गहराई से सोचना।

बाद में सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा कि अदालत को वांगचुक की तुलना महात्मा गांधी से नहीं करनी चाहिए।

मेहता ने कहा, “मुझे बताया गया है कि आप लोगों ने गांधीजी का अंतिम भाषण पढ़ा है। हमें राष्ट्रपिता के साथ ऐसी किसी बात का महिमामंडन नहीं करना चाहिए जो पूरी तरह से भारत विरोधी हो।”

हालांकि अदालत ने कहा कि इसे कुछ अलग संदर्भ में पढ़ा गया था। मेहता ने चिंता व्यक्त की कि मीडिया इसे अलग तरीके से पेश करेगा।

सॉलिसिटर जनरल ने कहा “ऐसा न हो कि कल की खबर यह बन जाए कि माननीय न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ता की तुलना गांधीजी से की है। हमें संदर्भ देखना होगा। स्वास्थ्य का यह दिखावा भी सोशल मीडिया का दिखावा है।”

अदालत ने कहा कि उसे बाहर क्या हो रहा है उससे कोई लेना-देना नहीं है।

तिल का ताड़ क्यों बना रहें हैं: सुप्रीम कोर्ट

“आप तिल का ताड़ क्यों बना रहे हैं? अगर आप कहते हैं कि हमें सवाल नहीं पूछने चाहिए, तो हम सवाल नहीं पूछेंगे,” बेंच ने एएसजी नटराज को अपनी दलीलें फिर से शुरू करने के लिए कहते हुए कहा।

गौरतलब है कि सितंबर 2025 में लेह में लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा देने की मांगों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है।

बीते हफ्ते अदालत ने केंद्र सरकार से जेल में वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए, उन्हें हिरासत में रखने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।

आज अदालत को बताया गया कि अधिकारियों ने स्वास्थ्य कारणों से हिरासत में लिए गए वांगचुक को रिहा न करने का फैसला किया है।

पिछले महीने वकील ने तर्क दिया था कि वांगचुक को सरकार की आलोचना करने और उसके खिलाफ विरोध करने का लोकतांत्रिक अधिकार है और ऐसी भावनाएं राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें हिरासत में लिया जा सके।

इसके जवाब में, केंद्र सरकार और लेह प्रशासन ने सोमवार को दावा किया कि वांगचुक चाहते थे कि केंद्र शासित प्रदेश में नेपाल और बांग्लादेश में हुई घटनाओं के समान आंदोलन और हिंसा हो।

सरकार ने आगे आरोप लगाया कि वांगचुक ने केंद्र सरकार को “वे” कहकर संबोधित किया, जिससे अलगाववादी प्रवृत्तियों का पता चलता है, और उसने जेनरेशन जेड (जेन-जी) को गृहयुद्ध में शामिल होने के लिए उकसाया।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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