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‘हाईकमान के फैसले तक मैं ही मुख्यमंत्री’, ढाई साल के सत्ता समझौते को सिद्धारमैया ने किया खारिज

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को राज्य सरकार में ढाई-ढाई साल के कथित सत्ता साझेदारी समझौते के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। बेलगावी में चल रहे विधानसभा सत्र के आखिरी दिन विपक्ष की ओर से उनके कार्यकाल को लेकर बार-बार सवाल पूछे जाने पर सिद्धारमैया ने साफ कहा कि ऐसा कोई समझौता मौजूद नहीं है और वह तब तक मुख्यमंत्री बने रहेंगे, जब तक पार्टी हाईकमान कोई और फैसला नहीं करता।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, “सबसे पहले जनता का आशीर्वाद मिलता है। उसके बाद विधायक दल की बैठक में नेता चुना जाता है और फिर हाईकमान निर्णय करता है। मैंने बस यही कहा है। अभी भी मैं मुख्यमंत्री हूं और जब तक हाईकमान फैसला नहीं करता, तब तक मुख्यमंत्री रहूंगा।”

सिद्धारमैया के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा विधायक आर. अशोका ने सवाल उठाया कि आपको विधायक दल ने पांच साल के लिए चुना है। फिर ढाई साल वाली बात कहां से आई? इस पर मुख्यमंत्री ने दो टूक जवाब दिया, मैंने कभी ढाई साल की बात नहीं कही। ढाई साल का कोई समझौता है ही नहीं।

गौरतलब है कि इससे पहले इसी हफ्ते सिद्धारमैया ने कहा था कि वह अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने कहा था, “हम अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे और 2028 में फिर सत्ता में लौटेंगे। मैं तब तक मुख्यमंत्री हूं, जब तक हाईकमान कुछ और नहीं कहता।”

बीते कुछ दिनों से इस बात की अटकलें तेज थीं कि जनवरी में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद संभाल सकते हैं। हालांकि कांग्रेस ने इन चर्चाओं पर विराम लगाने की कोशिश की। सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने एक-दूसरे के आवास पर नाश्ते के दौरान मुलाकात की और बाद में साथ मीडिया से बात कर पार्टी की एकजुटता का संदेश दिया।

उधर, डीके शिवकुमार ने कथित डिनर मीटिंग को लेकर चल रही अटकलों को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह किसने कहा? कोई डिनर मीटिंग नहीं हुई। मैं बेलगावी में अपने पूर्व डीसीसी अध्यक्ष के यहां सम्मान देने के लिए गया था। उन्होंने कर्नाटक के लिए बहुत योगदान दिया है। दोस्तों के साथ वहां गया था, इसमें कोई राजनीति नहीं है।”

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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