मुंबई: ग्लोबल टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी एक्सेंचर (Accenture) ने अपने राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती करने और मांग के कमजोर रहने का संकेत दिया। इसके चलते शुक्रवार (19 जून) को आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। एक्सेंचर की चेतावनी के बीच निफ्टी आईटी इंडेक्स 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया और वैश्विक तकनीकी खर्च में सुधार की रफ्तार को लेकर निवेशकों की चिंताएं फिर बढ़ गईं। इस दौरान दिग्गज आईटी कंपनियों Infosys, TCS, HCLTech और अन्य IT शेयरों पर दबाव बना रहा।
आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 6.43 प्रतिशत यानी 1,831 अंक गिरकर दिन के निचले स्तर 26,634.50 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में यह सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा।
Infosys, TCS, HCLTech में भारी गिरावट
समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, खबर लिखे जाने तक निफ्टी आईटी 5 प्रतिशत से ज्यादा यानी 1,500 अंकों की गिरावट के साथ 26,956.90 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
आईटी शेयरों में बिकवाली का सर्वाधिक असर इंफोसिस पर देखा गया। इसके शेयर 7.4 प्रतिशत तक गिर गए। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 5.9 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 4.5 प्रतिशत और एचसीएल टेक (HCLTech) में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा पर्सिस्टेंट सिस्टम्स के शेयर लगभग 5 प्रतिशत टूट गए। वहीं एलटीआईमाइंडट्री में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। इसके साथ ही कोफोर्ज करीब 4 प्रतिशत और विप्रो 3 प्रतिशत से अधिक फिसल गया।
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बिकवाली का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। बीएसई मिडकैप सूचकांक में केपीआईटी टेक्नोलॉजीज, टाटा एल्क्सी, हेक्सावेयर टेक्नोलॉजीज और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसे आईटी शेयर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों की लिस्ट में शामिल रहे और इनमें तेज गिरावट दर्ज की गई।
आईटी कंपनियों के शेयरों में यह गिरावट एक्सेंचर के शेयरों में रातोंरात आई भारी कमजोरी और भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीदों (एडीआर) में आई गिरावट के बाद देखने को मिली।
Accenture ने राजस्व वृद्धि का घटाया अनुमान
वैश्विक परामर्श और टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी एक्सेंचर ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान को घटा दिया। इसके बाद भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर में भी बिकवाली बढ़ गई।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक एक्सेंचर के कमजोर अनुमान ने भारतीय आईटी कंपनियों के एडीआर में बिकवाली को बढ़ावा दिया है। विशेषज्ञों ने कहा कि “आईटी शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी आ सकती है क्योंकि अब इनके मूल्यांकन आकर्षक होते जा रहे हैं।”
हालांकि उनका मानना है कि यदि आने वाले समय में कंपनियों के आय अनुमान लगातार घटते रहे तो आईटी शेयरों पर दबाव बना रह सकता है।
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विशेषज्ञों की मानें तो शेयरों में हालिया तेज गिरावट के बावजूद भारतीय आईटी कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी एक्सेंचर की तुलना में अधिक है। एक्सेंचर फिलहाल अगले एक वर्ष की अनुमानित आय के लगभग नौ गुना मूल्यांकन पर कारोबार कर रहा है।
मौजूदा अनिश्चितताओं को देखते हुए विश्लेषकों ने इस क्षेत्र को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा है। बता दें कि एक्सेंचर के शेयर रातोंरात लगभग 18 प्रतिशत गिर गए। वहीं इन्फोसिस के एडीआर करीब 10 प्रतिशत और विप्रो के एडीआर 3 प्रतिशत से अधिक टूट गए।
कंपनी ने तीसरी तिमाही में 18.7 अरब डॉलर का राजस्व दर्ज किया लेकिन ग्राहक खर्च में जारी अनिश्चितता और पश्चिम एशिया की घटनाओं से जुड़े राजस्व दबाव के कारण पूरे वर्ष के लिए अपने विकास अनुमान को घटा दिया।
इसके अलावा, कंपनी की नई बुकिंग्स भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रहीं। आईटी शेयरों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब इस सप्ताह की शुरुआत में भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद सेक्टर दबाव में था। फेड ने संकेत दिए थे कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक आईटी शेयरों को लेकर निवेशकों की धारणा कमजोर हुई थी।
गौरतलब है कि बीते एक वर्ष में निफ्टी आईटी इंडेक्स 38,600 के स्तर से लगभग 30 प्रतिशत गिर चुका है। सुबह के कारोबार में घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में भी कमजोरी रही। सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक गिर गया जबकि निफ्टी करीब 200 अंक टूटकर 24,000 के स्तर से नीचे फिसल गया।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

