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भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से होने जा रहा लागू; क्या मिलेगा सस्ता और किन सेक्टर को होगा फायदा

करीब तीन साल से अधिक समय तक चली 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए थे। 15 जुलाई से अब यह प्रभावी हो जाएगा।

भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इसके बाद ब्रिटेन से आने वाली कई चीजें भारतीय बाजार में सस्ती हो सकती हैं, जबकि भारत के उत्पादों को भी ब्रिटेन के बाजार में बिना या बेहद कम टैरिफ के पहुंचने का रास्ता मिलेगा। अनुमान है कि भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बदौलत 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़कर 120 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

भारत और ब्रिटेन के बीच पिछले साल व्यापार समझौता फाइनल हुआ था और अब प्रभावी होने जा रहा है। इसके तहत भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटेन में जीरो टैरिफ के साथ निर्यात की सुविधा मिलेगी, जबकि ब्रिटिश उत्पादों पर औसत आयात शुल्क घटकर लगभग 15% से 3% तक तक रह जाएगा। इससे भारतीय उपभोक्ताओं को भी अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण ब्रिटिश उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।

गौरतलब है कि करीब तीन साल से अधिक समय तक चली 14 दौर की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटेन के व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

आंकड़े बताते हैं कि भारत और ब्रिटेन के बीच 2024 में करीब 4.6 लाख करोड़ (46 अरब डॉलर) का व्यापार हुआ था। इसमें भारत का निर्यात 2.75 लाख करोड़ रुपये और ब्रिटेन का निर्यात 1.85 लाख करोड़ रहा था। भारत के कुल व्यापार में अभी हिस्सेदारी करीब 2 प्रतिशत है।

भारत में क्या-क्या सस्ता हो सकता है?

ब्रिटेन से आयात होने वाले सामानों पर भारत का औसत टैरिफ 15% से घटकर करीब 3% हो जाएगा। समझौते के तहत लगभग 85% उत्पाद अगले 10 वर्षों में पूरी तरह टैरिफ मुक्त हो जाएंगे। अगर इस लिस्ट की बात करें कि क्या-क्या ब्रिटिश सामान भारत में सस्ता होगा, तो ये इस प्रकार है-

ब्रिटिश व्हिस्की: ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की और जिन पर अभी 150% तक आयात शुल्क लगता है। यह घटकर 75% हो जाएगा और समझौते के दसवें वर्ष तक इसे 40% तक लाया जाएगा। इसका असर कीमतों पर भी दिख सकता है। उदाहरण के तौर पर 5,000 रुपये की स्कॉच बोतल करीब 3,500 रुपये में मिल सकती है।

खाद्य और पेय पदार्थ: सैल्मन, लैंब, चॉकलेट, बिस्किट और सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे ब्रिटिश उत्पादों पर शुल्क घटने से ये भारतीय उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिल सकते हैं।

सौंदर्य प्रसाधन, उपभोक्ता वस्तुएं: FTA कई अन्य ब्रिटिश उत्पादों को और भी सुलभ और किफायती बनाएगा। कम टैरिफ के कारण, जाने-माने ब्रिटिश ब्रांडों के कॉस्मेटिक्स की कीमतें और भी कम होने की उम्मीद है। इसी तरह, ब्रिटेन में बनी चॉकलेट, बिस्कुट और शीतल पेय जैसी रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं पर भी आयात शुल्क कम किया जाएगा। इससे भारतीय परिवारों के लिए अधिक विकल्प और संभावित रूप से कम कीमतें उपलब्ध होंगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी लाभ: स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में आयात शुल्क में कमी के कारण, उन्नत ब्रिटिश चिकित्सा उपकरण और हेल्थ-टेक उपकरण भारतीय उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए अधिक सुलभ हो जाएँगे। इससे विशेष चिकित्सा उपकरणों और इससे जुड़ी प्रौद्योगिकियों की अधिक किफायती दरों पर व्यापक उपलब्धता हो सकती है।

लग्जरी कारें: जगुआर लैंड रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी ब्रिटिश लग्जरी कारों पर 100% तक लगने वाला शुल्क कोटा आधारित व्यवस्था के तहत 10% तक आ सकता है। इससे इन कारों की कीमतों में 20 से 30 फीसदी तक कमी आने की संभावना है।

इसके अलावा ब्रिटेन से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, फैशन प्रोडक्ट्स भी सस्ते होंगे। ब्रिटेन से आने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स भी कम कीमत पर मिलेंगे।

भारत के किन सेक्टर को ज्यादा फायदा होगा?

टेक्सटाइल सेक्टर: भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल उत्पादों जैसे चादर और परदों पर ब्रिटेन में 8-12% तक शुल्क लगता था, जो अब खत्म हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पाद बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे निर्यात केंद्रों में अगले कुछ वर्षों में तेज वृद्धि की उम्मीद है।

ज्वेलरी और लेदर उद्योग: ब्रिटेन और पश्चिमी देशों में हमेशा से भारतीय ज्वेलरी की मांग रही है। ऐसे में भारत से ब्रिटेन जाने वाले आभूषणों पर कोई टैरिफ नहीं होगा। ऐसे ही भारत के लेदर उद्योग को भी फायदा होने की संभावना है। यहां बने बैग और चमड़े के जूतों पर अब ब्रिटेन में कोई टैरिफ नहीं लगेगा। इस तरह भारत में बने ये उत्पाद ब्रिटेन में अपना बाजार और बेहतर तरीके तैयार कर सकेंगे।

चाय, मसाले और समुद्री उत्पाद: बासमती चावल, झींगा, प्रीमियम चाय और मसालों पर ब्रिटेन का आयात शुल्क खत्म होने से इन उत्पादों का निर्यात बढ़ सकता है। असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।

केमिकल और स्पेशलिटी मटेरियल्स: एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशलिटी केमिकल्स पर शुल्क में राहत मिलने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे औद्योगिक राज्यों से निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।

इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स: भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो कंपोनेंट्स पर ब्रिटेन की ओर से आयात शुल्क खत्म कर दिया गया है। इससे इस क्षेत्र में भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका मजबूत होगी। भारत में मैन्युफैक्चरिंग हब को इसका लाभ मिलने की संभावना है।

फार्मा और मेडिकल डिवाइस: भारतीय दवा कंपनियों को ब्रिटेन में जेनेरिक दवाओं के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का लाभ मिलेगा। इससे ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) तक भारतीय दवाओं की पहुंच आसान होगी और मंजूरी की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है।

भारतीय अर्थव्यवस्था को किस तरह होगा फायदा?

भारत के 99% उत्पाद ब्रिटेन में जीरो टैरिफ पर पहुंच सकेंगे।
टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग और मरीन प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों का निर्यात बढ़ेगा।
श्रम आधारित उद्योगों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
देश के करीब 6 करोड़ MSME को नए बाजार और बेहतर मुनाफे का मौका मिलेगा।
ब्रिटिश कंपनियों का निवेश IT, वित्तीय सेवाओं और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बढ़ सकता है।
2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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