महाराष्ट्र में शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने परिसीमन बिल को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि केंद्र सरकार प्रस्तावित परिसीमन विधेयक में सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान करती है, तो उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करेगी।
सुप्रिया सुले का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ दिनों से शरद पवार गुट के एनसीपी को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मची है। ऐसी अटकलें हैं कि शरद पवार एनसीपी गुट और दिवंगत अजित पवार गुट वापस एक हो सकते हैं। साथ ही शरद पवार भाजपा से गठबंधन के लिए कदम बढ़ा सकते हैं। इन नए समीकरणों की चर्चाओं के बीच सुले ने दावा किया है कि पार्टी के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और वह पहले भी इसी शर्त के साथ विधेयक का समर्थन करने की बात कहती रही है।
‘रुख नहीं बदला, पहले भी यही मांग थी’
सुप्रिया सुले ने पत्रकारों से कहा कि अगर केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक में संशोधन कर सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान करती है, तो हम इसका समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। हमारा यही रुख पहले भी था और आज भी है।
उन्होंने कहा कि जब यह विधेयक पहली बार संसद में पेश किया गया था, तब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), डीएमके सहित कई विपक्षी दलों ने भी यही मांग उठाई थी। इसलिए इसे पार्टी के रुख में बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
भाजपा से नजदीकी की चर्चाओं पर सुले ने क्या कहा?
एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के साथ मंगलवार देर रात हुई बैठक के बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलने की अटकलों पर भी सुले ने अपनी बात रखी। उन्होंने पार्टी के बीजेपी के करीब जाने की अटकलों को बहुत अहमियत नहीं देने की कोशिश की।
उन्होंने कहा, ‘जब मैं संसदीय समिति की बैठक के लिए लखनऊ में थी, तो मैंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से खुलकर मुलाकात की थी। अगर हमारी पार्टी सच में भाजपा के साथ गठबंधन करना चाहती, तो हम खुलकर मुलाकात नहीं करते।’
पाटिल ने शरद पवार से उनके ‘सिल्वर ओक’ आवास पर मुलाकात की थी और उसके कुछ घंटों बाद ही वे फड़नवीस से मिले। इसी रात सत्ता में साझीदार एनसीपी (दिवंगत अजित पवार गुट) के नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री से अलग-अलग मुलाकात की, जिससे संभावित राजनीतिक बदलावों को लेकर नई अटकलें तेज हो गई हैं।
बताया जा रहा है कि शरद पवार गुट के 10 विधायकों में से करीब आधे विधायक एनडीए के साथ जाने के पक्ष में हैं। हालांकि इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जयंत पाटिल ने भी किया इनकार
एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने भी भाजपा के साथ किसी राजनीतिक समझौते या विलय की अटकलों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से उनकी मुलाकात इस्लामपुर नगर परिषद से जुड़े एक प्रशासनिक मुद्दे पर हुई थी और इसका किसी राजनीतिक बदलाव से कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्तारूढ़ एनसीपी के नेताओं सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के साथ उनकी किसी विलय या गठबंधन को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है।
क्यों चल रही हैं ऐसी अटकलें?
हाल ही में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए थे। सांसदों ने सरकार के साथ रहने पर विकास कार्यों के लिए बेहतर सहयोग मिलने का तर्क दिया था। इसके बाद से महाराष्ट्र में विपक्षी दलों के भीतर संभावित राजनीतिक फेरबदल की चर्चाएं लगातार तेज हैं।
फिलहाल एनसीपी (शरद पवार) के पास महाराष्ट्र विधानसभा में 10 विधायक और लोकसभा में आठ सांसद हैं। ऐसे में संसद में उसकी संख्या भले कम हो, लेकिन परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों के दौरान उनका रुख राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। अगर शरद पवार गुट भाजपा के साथ आता है तो संसद में मोदी सरकार के लिए संविधान संशोधन विधेयक को पास कराने की राह और आसान हो सकती है।
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