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SEBI ने निवेशकों को डिजिटल गोल्ड के बारे में क्यों दी चेतावनी, क्या हैं अन्य विकल्प?

SEBI ने निवेशकों को डिजिटल गोल्ड के बारे में चेतावनी दी है कि इनके डिफॉल्टर होने पर उनका पैसा डूब सकता है क्योंकि ये उसके द्वारा विनियमित नहीं होते हैं।

SEBI warning to investors about digital gold what are alternatives of it
SEBI ने डिजिटल गोल्ड निवेशकों को दी ये सलाह, फोटोः एक्स/ ग्रोक

आज के समय में निवेशकों के बीच डिजिटल गोल्ड काफी लोकप्रिय हो गया है और लोग इसमें निवेश कर रहे हैं। आज के समय में कोई भी एक ऐप के जरिए मात्र 100 रुपये में गोल्ड खरीद सकता है, इसके मूल्य पर नजर रख सकता है और बाद में इसे सिक्कों या बार में बदल सकता है। हालांकि बाजार नियामक संस्था सेबी ने इसको लेकर निवेशकों को चेतावनी दी है।

पिछले हफ्ते सेबी ने इस संबंध में एक सार्वजनिक चेतावनी जारी कर निवेशकों को आनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा पेश किए जाने वाले डिजिटल गोल्ड या ई गोल्ड उत्पादों की खरीद को लेकर आगाह किया था। सेबी ने कहा था कि ये उत्पाद विनियमित नहीं हैं और इन्हें प्रतिभूतियों या कमोडिटी डेरिवेटिव्स के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है। सेबी ने यह भी कहा था कि इनका संचालन पूरी तरह से उसके अधिकार क्षेत्र के बाहर है।

डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म के नष्ट होने पर डूब जाएगा पैसा

ऐसे में यदि कोई डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म आने वाले समय में ध्वस्त हो जाता है तो आपका पैसा चला जाएगा। निवेशकों के पास सेबी के निवेशक सुरक्षा ढांचे के अंतर्गत कोई कानूनी सुरक्षा नहीं होगी।

अपनी नोटिस में सेबी ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म निवेशकों को डिजिटल गोल्ड/ई-गोल्ड उत्पादों में निवेश करने की पेशकश कर रहे हैं। इन्हें फिजिकल गोल्ड के आसान विकल्प के रूप में बाजार में बेचा जा रहा है।

नियामक संस्था ने स्पष्ट किया है कि इन उत्पादों का सेबी द्वारा विनियमित गोल्ड उपकरणों जैसे गोल्ड-ईटीएफ, एक्सचेंज-ट्रेडेट कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स या इलेक्ट्रानिक गोल्ड रिसीट्स (ईजीआर) से कोई लेन-देना नहीं है।

सेबी ने कहा कि ऐसे डिजिटल गोल्ड उत्पाद सेबी द्वारा विनियमित गोल्ड उत्पादों से अलग हैं क्योंकि उन्हें न तो प्रतिभूतियों के रूप में अधिसूचित किया जाता है और न ही डेरिवेटिव के रूप में विनियमित किया जाता है।

सीधे शब्दों में देखा जाए तो ऐसे ऐप्स बिना किसी नियामक संस्था के काम कर रहे हैं। अगर ये डिफॉल्ट होते हैं, रिडेम्पशन में देरी करते हैं या फिर डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड में के रूप में डिलीवर करने में विफल रहते हैं तो सेबी आपकी मदद नहीं कर सकता।

सेबी द्वारा पंजीकृत निवेशक सलाहकार और सहजमनी के संस्थापक अभिषेक कुमार ने इस बाबत कहा कि नियामक संस्था द्वारा जारी की गई चेतावनी समय पर और जरूरी दोनों है।

इंडिया टुडे ने अभिषेक कुमार के हवाले से लिखा कि सेबी निवेशकरों को आगाह करने की कोशिश कर रही है कि डिजिटल गोल्ड ऐप्स इसके द्वारा विनियमित नहीं हैं। उन्होंने आगे बताया कि ये प्लेटफॉर्म बिना नियामक संस्था के काम करते हैं।

सेबी ने डिजिटल गोल्ड को जोखिम भरा क्यों बताया?

मूलतः डिजिटल गोल्ड इस तरह से काम करता है, आप एक ऐप के माध्यम से 500 रुपये का छोटा सा गोल्ड खरीदते हैं। कंपनी दावा करती है कि वह इतने ही मूल्य का सोना कस्टोडियन के पास एक तिजोरी में रखती है। कुछ प्लेटफॉर्म इसे भौतिक रूप में बदलने की भी सुविधा देते हैं।

इसमें समस्या यह आती है कि सोना तिजोरी में है या नहीं, इसकी गारंटी, ऑडिट कौन करता है, इस बारे में कोई नियमावली नहीं है। किसी प्लेटफॉर्म के दिवालिया होने पर क्या होगा, इस बारे में भी कोई कानूनी ढांचा नहीं है।

म्यूचुअल फंड या स्टॉकब्रोकर जो सेबी के सख्त नियमों का पालन करते हैं। उन्हें अलग-अलग ग्राहक परिसंपत्तियों को बनाए रखना होता है और नियमित ऑडिट प्रस्तुत करना होता है। इनके विपरीत डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म अनिवार्य रूप से स्व-विनियमित होते हैं।

इसलिए निवेशकों को सेबी द्वारा जारी की गई चेतावनी जरूरी है। सेबी का यह नहीं है कि सोना न खरीदें बल्कि इसका कहना है कि बिना जोखिम जाने अनियनित सोना न खरीदें।

ऐसे में निवेशकों के पास सेबी द्वारा विनियमित गोल्ड उत्पाद खरीदने के विकल्प हैं। इनमें गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेट फंड्स और इलेक्ट्रानिक गोल्ड रिसीप्ट्स (ईजीआर) हैं।

गोल्ड ईटीएफ म्यूचुअल फंड स्कीम हैं जो भौतिक सोने में निवेश करती हैं। प्रत्येक यूनिट सोने की एक निश्चित मात्रा, आमतौर पर एक ग्राम का प्रतिनिधित्व करती है। यह सोना एक अधिकृत संरक्षक के पास होता है और नियमित रूप से ऑडिट किया जाता है। चूंकि ईटीएफ स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार करते हैं, इसलिए निवेशक अपने डीमैट खातों के माध्यम से कभी भी यूनिट खरीद या बेच सकते हैं।

संक्षेप में आप अभी भी सोने की कीमतों के संपर्क में हैं लेकिन आप सेबी की पारदर्शिता और निवेशक-सुरक्षा ढाँचे द्वारा सुरक्षित हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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