Home भारत राम सेतु को ‘राष्ट्रीय स्मारक’ घोषित करने की मांग वाली याचिका पर...

राम सेतु को ‘राष्ट्रीय स्मारक’ घोषित करने की मांग वाली याचिका पर SC ने केंद्र को नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने डॉ. स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की और केंद्र को नोटिस जारी किया।

0
Ram Setu, supreme court,

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु (Ram Setu) को ‘राष्ट्रीय स्मारक’ घोषित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह याचिका पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की है। याचिका में स्वामी ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय को राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के उनके अनुरोध पर शीघ्र निर्णय लेने को लेकर निर्देश देने का अनुरोध किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई की। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने डॉ. स्वामी की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति व्यक्त की और केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने इस मामले में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से जल्द से जल्द फैसला लेने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

सुब्रमण्यम स्वामी की साल 2023 में इसी संबंध में दी गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया था। सॉलिसिटर जनरल तुषार महता ने तब शीर्ष अदालत को बताया था कि रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की मांग पर संस्कृति मंत्रालय में प्रोसेस जारी है। अब स्वामी ने नई याचिका में इस बात की मांग की है कि उक्त मामले में मंत्रालय को जल्द फैसला लेने का निर्देश दिया जाए।

हिंदू पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष अशोक पांडे ने भी 2023 में राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक बनाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर किया था। शीर्ष अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। याचिका में केंद्र को राम सेतु के आसपास दीवार बनाने और इसे राष्ट्रीय विरासत स्मारक के रूप में घोषणा करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। याचिका में दावा किया गया कि केंद्र सरकार राम सेतु के प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाने में विफल रही है।

तत्कालीन न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा था कि ये सरकार के लिए प्रशासनिक मामले हैं और अदालतों को इनमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

पीठ ने आदेश में कहा था, ”हम संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए याचिकाकर्ता द्वारा चाहा गया कोई भी निर्देश देने के इच्छुक नहीं हैं।” शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा था कि आप इसे व्यक्तिगत रूप से सरकार को दें, हम आपको रोक नहीं रहे हैं।

क्या है राम सेतु और क्यों है यह मुद्दा?

राम सेतु को एडम्स ब्रिज भी कहा जाता है। यह तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर पम्बन द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के बीच चूना पत्थर की एक शृंखला है।

डॉ. स्वामी ने यूपीए-1 सरकार द्वारा शुरू की गई सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। उसी समय उन्होंने राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का मुद्दा उठाया था।

यह मामला 2007 में सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा था। तब कोर्ट ने राम सेतु पर परियोजना के काम पर रोक लगा दी थी। बाद में, केंद्र सरकार ने कहा था कि वह राम सेतु को नुकसान पहुँचाए बिना परियोजना के लिए एक वैकल्पिक रास्ता खोजेगी।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version