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Women’s Reservation: आरक्षण के बिना भी महिलाओं को संसद में प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिल रहा?: केंद्र से सुप्रीम कोर्ट

कांग्रेस नेत्री डॉ. जया ठाकुर ने महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शीर्ष अदालत ने इसपर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

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Women’s Reservation: सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को केंद्र से पूछा कि आखिर महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण कानून के बिना भी प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जा सकता?

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि संसद में महिलाओं की मौजूदगी लगातार घट रही है। अगर आरक्षण नहीं भी है, तो क्या राजनीतिक दल अपनी ओर से महिलाओं को प्रतिनिधित्व नहीं दे सकते?

यह याचिका कांग्रेस नेत्री डॉ. जया ठाकुर द्वारा दायर की गई थी, जिसमें उन्होंने महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में आरक्षण कानून को जल्द लागू करने की मांग की थी।

महिलाएं देश की सबसे बड़ी ‘अल्पसंख्यक’ आबादी: कोर्ट

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि देश की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक कौन हैं? महिलाएं- जो आबादी का लगभग 48% हैं। यह मुद्दा महिलाओं की राजनीतिक समानता से जुड़ा है।

जया ठाकुर की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के 75 साल बाद भी महिलाओं को अपना राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कराने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।

जया ठाकुर की याचिका में कहा गया कि संवैधानिक संशोधन को अनिश्चित काल तक टाला नहीं जा सकता। बीते 75 वर्षों में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व हमेशा बेहद कम रहा है।

कब लागू होगा महिला आरक्षण कानून?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है कि महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में क्या कदम उठाए जा रहे हैं। अदालत ने यह भी कहा कि संविधान की प्रस्तावना में राजनीतिक और सामाजिक समानता का वादा किया गया है, और यह कानून महिलाओं के लिए उस वादे को पूरा करने का एक अहम माध्यम है।

कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि राजनीतिक दल खुद पर्याप्त संख्या में महिलाओं को टिकट क्यों नहीं दे रहे। पीठ ने कहा, आरक्षण को भूल जाइए, महिलाएं 10 प्रतिशत से भी कम प्रतिनिधित्व में हैं।

महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण का कानून 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद पारित हुआ था, लेकिन इसे तब ही लागू किया जाएगा जब देश में अगली जनगणना और उसके बाद सीमा निर्धारण की प्रक्रिया पूरी होगी।

केंद्र सरकार ने जून 2024 में कहा था कि अगली जनगणना और जाति-आधारित गणना 2027 में कराई जाएगी। यानी कानून के लागू होने में अभी वक्त लग सकता है।

फिलहाल लोकसभा की 543 सीटों में से केवल 75 सांसद महिलाएं हैं, जबकि राज्यसभा के 250 सदस्यों में 42 महिलाएं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख फिलहाल तय नहीं की है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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