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‘बम-बम भोले’ के जयघोष से गूंजी काशी, सावन के पहले सोमवार बाबा विश्वनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 3 किमी लंबी कतार

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Man in a light blue shirt raises his hands toward a cheering crowd at a street festival, holding pink flower petals; monks in orange robes stand nearby.
श्री काशी विश्वनाथ धाम में शिवभक्तों का लगा तांता।

वाराणसी: सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार पर उत्तर प्रदेश पूरी तरह शिवमय नजर आया। वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम से लेकर प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर और एटा के ऐतिहासिक कैलाश मंदिर तक भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए देर रात से ही श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्तिमय हो उठा।

सबसे अधिक भीड़ श्री काशी विश्वनाथ धाम में देखने को मिली। मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार लग गई। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालु और कांवड़िए धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते रहे।

कांवड़ियों का पुष्पवर्षा कर अभिनंदन

Night street scene: a man in white distributes flower petals from baskets to a line of orange-clad devotees, with police nearby under umbrellas.
kashi vishwanath

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी। मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा, डिप्टी कलेक्टर, नायब तहसीलदार और मंदिर प्रशासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने शिव भक्तों और कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया।

भीड़ को व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित करने के लिए दर्शन के छह प्रवेश द्वार निर्धारित किए गए। कतार में लगे श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पेयजल, स्वास्थ्य शिविर, हेल्प डेस्क और विश्राम की व्यवस्था की गई। प्रयागराज संगम से आने वाले कांवड़ियों के मार्ग पर भी चिकित्सा सहायता, भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर सुरक्षा चाकचौबंद

गंगा के बढ़े जलस्तर को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। जल पुलिस, एनडीआरएफ और गोताखोरों की तैनाती की गई है। घाटों पर बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं को केवल सुरक्षित स्थानों पर स्नान और गंगाजल भरने की अनुमति दी जा रही है। लगातार उद्घोषणा के जरिए लोगों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं।

पूरे काशी क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है, जबकि सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सभी पुलिसकर्मियों को श्रद्धालुओं और कांवड़ियों से सम्मानपूर्वक व्यवहार करने तथा उन्हें “सर” और “मैडम” कहकर संबोधित करते हुए हरसंभव सहायता देने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि कांवड़ियों का वेश धारण कर अराजकता फैलाने या अनुचित गतिविधियों में शामिल पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

Crowd of devotees in orange robes lined up behind metal barricades on a wet street at night, waiting for a religious ceremony roughly photographed.
banaras

प्रयागराज के प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर में भी लगी भक्तों की भीड़

उधर, प्रयागराज के प्राचीन मनकामेश्वर मंदिर में भी तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और फूल लेकर पहुंचे भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजता रहा।

मनकामेश्वर मंदिर के महंत ब्रह्मचारी श्री धरानंद जी महाराज ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर का उल्लेख पुराणों में कामेश्वर तीर्थ के रूप में मिलता है। धार्मिक मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी यहां भगवान शिव की आराधना की थी। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं भगवान शिव अवश्य पूरी करते हैं।

मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी सावन के पहले सोमवार के महत्व को विशेष बताया। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि वे तड़के चार बजे से ही लाइन में लगे थे। घंटों इंतजार के बावजूद बाबा के दर्शन के बाद सारी थकान दूर हो गई और मन को अपार शांति मिली। कुछ भक्तों ने बताया कि रातभर बारिश होने के बावजूद उनकी आस्था में कोई कमी नहीं आई और भगवान शिव के दर्शन की उत्सुकता उन्हें मंदिर तक खींच लाई।

Crowd of people in colorful traditional clothing standing in a long queue beside yellow metal barricades outside a temple or shrine.
prayagraj

एटा में कैलाश मंदिर में लगा तांता

एटा के करीब 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक कैलाश मंदिर में भी सुबह तीन बजे कपाट खोल दिए गए। मंगला आरती के बाद जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ। मंदिर के मुख्य पुजारी धीरेंद्र झा ने बताया कि सावन के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु यहां रुद्राभिषेक, विशेष पूजा और भंडारे का आयोजन करने आते हैं।

कासगंज के लहरा गंगा घाट से 51 लीटर गंगाजल लेकर पैदल पहुंचे कांवड़ियों ने कैलाश मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। कांवड़ियों गौरव, अरुण कुमार और नीरज ने बताया कि सावन के पहले सोमवार पर जल चढ़ाने का विशेष धार्मिक महत्व है और वे हर वर्ष इसी श्रद्धा के साथ यह यात्रा करते हैं। उन्होंने प्रशासन की सुरक्षा और व्यवस्थाओं की भी सराहना की।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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