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संचार साथी ऐप क्या है जिसे सरकार ने स्मार्टफोन में पहले से इंस्टॉल करने का दिया है निर्देश?

भारत सरकार के दूरसंचार मंत्रालय ने स्मार्टफोन में पहले से एक ऐप इंस्टॉल करने का निर्देश दिया है। इसका नाम संचार साथी है।

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संचार साथी ऐप, प्रतीकात्मक फोटोः IANS

भारत के दूरसंचार मंत्रालय ने निजी तौर पर स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों से सभी नए उपकरणों में एक सरकारी सरकारी सुरक्षा ऐप पहले से लोड करने को कहा है जिसे हटाया नहीं जा सकेगा। इस ऐप का नाम संचार साथी है। सरकार ने सोमवार, 1 दिसंबर को यह निर्देश सभी मूल निर्माताओं (ओईएम) को जारी किए।

सरकार के इस कदम से हालांकि निजता के समर्थकों ने कुछ सवाल उठाए हैं। साइबर क्राइम और हैकिंग में हालिया वृद्धि से निपटने के लिए भारत दुनियाभर के अधिकारियों के साथ हाल ही में रूस के साथ धोखाधड़ी या राज्य समर्थित सरकारी सेवा ऐप्स को बढ़ावा देने के लिए चोरी किए गए फोन के इस्तेमाल को रोकने के लिए नियम बनाने में शामिल हो रहा है।

दूरसंचार मंत्रालय द्वारा जारी किए गए निर्देशों में निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि ऐप पहली बार उपयोग या डिवाइस सेटअप के समय यूजर्स को आसानी से दृश्यमान हो और इसकी कार्यक्षमताएं प्रभावित न हों।

संचार साथी ऐप क्या है?

संचार साथी पोर्टल मई 2023 में स्थापित हुआ था। यह पोर्टल खोए हुए मोबाइल फोन और गलत वेब लिंक की सूचना देने और उन्हें ब्लॉक करने की सुविधा देता है। यह यूजर्स के नाम पर मोबाइल कनेक्शनों की संख्या जानने तथा बैंकों व वित्तीय संस्थानों के विश्वसनीय संपर्कों के विवरणों की जांच करने में भी मदद करता है।

हिंदुस्तान टाइम्स ने दूरसंचार विभाग के एक अधिकारी के हवाले से लिखा कि यह ऐप धोखाधड़ी की शिकायत करना आसान बना देगा। अधिकारी ने आगे बताया कि “अभी रिपोर्ट करने का समय अलग-अलग होता है क्योंकि यूजर्स को धोखाधड़ी या चोरी हुए मोबाइल फोन की रिपोर्ट करने के लिए वेबसाइट पर जाना पड़ता है।”

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अधिकारी ने आगे कहा कि ऐसे में यह पोर्टल यूजर्स को धोखाधड़ी की रिपोर्ट करना आसान बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यूजर्स को अपना IMEI नंबर याद करने की आवश्यकता नहीं है।

यह पोर्टल कई अन्य सुविधाएं भी प्रदान करेगा। इसमें यूजर्स के नाम पर जारी किए गए मोबाइल कनेक्शन की जांच करना, हैंडसेट की प्रामाणिकता की पुष्टि करना और संदिग्ध संचार की सूचना देना शामिल है।

दूरसंचार विभाग ने क्या कहा?

संचार साथी ऐप को लेकर दूरसंचार विभाग ने कहा कि यह कदम नागरिकों को नकली हैंडसेट खरीदने से रोकने, दूरसंचार संसाधनों के संदिग्ध दुरुपयोग की आसानी से रिपोर्ट करने और संचार सारथी पहल की प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए किया गया है।

वहीं, जो स्मार्टफोन पहले से बन चुके हैं और अभी बिक्री चैनलों में हैं, उनको लेकर निर्देशों में कहा गया है कि सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से उन्हें ऐप इंस्टाल करने की सुविधा दी जाए।

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सरकार के इन निर्देशों को लागू करने के लिए एप्पल, सैमसंग, ओप्पो, वीवो, शाओमी जैसी कंपनियों के साथ-साथ अन्य ओईएम को 90 दिन का समय दिया गया है। इसके लिए अनुपालन रिपोर्ट 120 दिनों में प्रस्तुत की जाएगी।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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