पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सूबे के नए मुख्यमंत्री होंगे। उन्हें मंगलवार को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया। ऐसे में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। चौधरी बिहार में भाजपा के पहले ऐसे नेता भी बनने जा रहे हैं जो मुख्यमंत्री पद संभालेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वे बुधवार (15 अप्रैल) को सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
पटना में भाजपा कार्यालय में राज्य के पर्यवेक्षक और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में सम्राट चौधरी समेत विजय कुमार सिन्हा और पार्टी के दूसरे सभी बड़े नेता मौजूद थे। इस बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिए जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने नेता के तौर पर सम्राट चौधरी के नाम का ऐलान किया।
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद सम्राट चौधरी डिप्टी सीएम बनाए गए थे। साथ ही गृह मंत्रालय भी संभाल रहे हैं। यह भी गौर करने वाली बात है कि इससे पहले नीतीश कुमार करीब दो दशक तक खुद राज्य में गृह मंत्रालय को संभाल रहे थे।
बहरहाल, सम्राट चौधरी ने खुद को विधायक दल का नेता चुने जाने पर कहा कि नई जिम्मेदारी उनके लिए बिहार की जनता की सेवा, उनके विश्वास और सपनों को साकार करने का एक पवित्र अवसर है। सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, ‘भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा मुझ पर विश्वास जताते हुए भाजपा बिहार विधानमंडल दल के नेता का दायित्व सौंपने पर हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
यह मेरे लिए केवल एक पद नहीं, बल्कि बिहार की जनता की सेवा, उनके विश्वास और सपनों को साकार करने का एक पवित्र अवसर है। मैं पूर्ण निष्ठा, समर्पण और ईमानदारी के साथ जन-जन की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प लेता हूँ।’
बिहार में मुंगेर जिले के तारापुर के पास लखनपुर गांव के रहने वाले चौधरी ने 1990 में लालू प्रसाद के नेतृत्व में राजनीति में प्रवेश किया था। सम्राट के पिता शकुनी चौधरी की गिनती बिहार के कद्दावर नेताओं में रही है और उन्होंने तारापुर विधानसभा क्षेत्र का कई बार प्रतिनिधित्व किया है। पहले एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में, बाद में कांग्रेस, समता पार्टी और आखिर में राजद के उम्मीदवार के रूप में वे तारापुर से विधायक चुने गए।
राबड़ी देवी की सरकार में पहली बार बने थे मंत्री
सम्राट चौधरी को पहली बार 1999 में राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली आरजेडी सरकार में कृषि मंत्री बनने का मौका मिला था। जबकि उस समय वे विधायक या एमएलसी नहीं थे। ऐसे में उन्हें मंत्री बनाए जाने का मामला उनकी उम्र को लेकर विवादों में घिर गया था, जिसके चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।
1999 में मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद, चौधरी ने साल 2000 में राजद उम्मीदवार के रूप में परबत्ता विधानसभा सीट जीती। राजद में इसके बाद उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया और 2010 तक वे विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक बन गए।
हालांकि, 2014 में, लालू प्रसाद से मतभेद के बाद चौधरी एक नाटकीय कदम उठाते हुए जदयू में शामिल हो गए। उन्होंने साथ ही राजद के 13 विधायकों को भी जदयू में शामिल कराने में अहम भूमिका निभाई। 2014 में, जीतन राम मांझी के संक्षिप्त मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान चौधरी को शहरी विकास और आवास मंत्री नियुक्त किया गया था। आगे चलकर 2017 में वे भाजपा में शामिल हुए।
नीतीश कुमार का सीएम पद से इस्तीफा
इससे पहले नीतीश कुमार ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा सौंपने की प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की गईं। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात कर अपने पद से त्यागपत्र सौंपा और इसके बाद वह लोक भवन से बाहर निकले। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के लिए एक भावुक पोस्ट भी किया।
नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एनडीए सरकार बनी थी। तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं। सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है, चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो, दलित हो या महादलित हो, सभी के लिए काम किया गया है। हर क्षेत्र में काम हुआ है, चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, बिजली हो या कृषि हो। महिलाओं एवं युवाओं के लिए भी बहुत काम किया गया है।’
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
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