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बांग्लादेश से तनावपूर्ण संबंधों के बीच खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होंगे विदेश मंत्री एस जयशंकर

भारतीय विदेश मंत्री S Jaishankar बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री Khaleda Zia के जनाजे में शामिल होने के लिए 31 दिसंबर को बांग्लादेश रवाना होंगे।

s jaishankar to visit bangladesh to attend khaleda zia funeral on dec 31, एस जयशंकर
बांग्लादेश जाएंगे एस जयशंकर, फोटो_ IANS

नई दिल्लीः भारत और बांग्लादेश के बीच जारी तनाव के बीच भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। खालिदा जिया का निधन 30 दिसंबर को हो गया। उनका अंतिम संस्कार 31 दिसंबर, बुधवार को किया जाएगा। एस जयशंकर उनके जनाजे में शामिल होने ढाका पहुंचेंगे।

खालिदा जिया बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री रहीं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की प्रमुख थी। उनकी मौत ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में उनके बेटे तारिक रहमान 17 साल बाद देश वापस लौटे हैं।

खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होंगे विदेश मंत्री

भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बांग्लादेश जाने की जानकारी दी गई। विदेश मंत्री के खालिदा जिया के जनाजे में शामिल होने को दोनों देशों के बीच जारी तनाव को सुधारने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बीते साल जब बांग्लादेश में छात्र आंदोलन हुआ तो देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भारत आना पड़ा। तब से वह भारत में रुकी हैं। इसको लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है। वहीं हाल ही में इंकलाब मंच के नेता शरीफ उस्मान हादी पर नकाबपोश हमलावरों ने गोली चला दी। सिंगापुर में इलाज के दौरान उस्मान हादी की मौत हो गई जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और खराब हो गए।

उस्मान हादी भारत और शेख हसीना सरकार की नीतियों के आलोचक थे। हादी की मौत के बाद देश में तनाव बढ़ गया और अल्पसंख्यकों के साथ दुर्व्यवहार की कई घटनाएं सामने आईं, जिससे संबंध और खराब हुए। इसमें 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास की हत्या भी शामिल है जिन्हें भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को जला दिया।

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जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। उन्होंने दो बार प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली। पहले 1991-96 तक और दूसरी बार 2001-2006 के बीच। उनके कार्यकाल को अवामी लीग की दिल्ली से निकटता के प्रतिकार के रूप में देखा जाता था।

अपने दोनों कार्यकाल के दौरान उन्होंने नई दिल्ली की तुलना में बीजिंग के साथ अधिक निकटता दिखाई। चीन से उनकी करीबी से नई दिल्ली को काफी नाराजगी हुई।

तारिक रहमान ने दिए सकारात्मक संकेत

देश में इन दिनों मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार है और सरकार ने भारत से दूरी बना कर रखी है। इसके साथ ही पाकिस्तान और चीन के साथ निकटता है जिसको लेकर नई दिल्ली चिंतित है। वहीं, खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने बांग्लादेश में वापसी के बाद से सकारात्मक संदेश दिए हैं।

इसी साल मई में रहमान ने चुनावी जनादेश के बिना अंतरिम सरकार द्वारा विदेश नीति पर निर्णय लेने की वैधता पर सवाल उठाए थे। वहीं, हाल ही में ढाका में रैली को संबोधित करने के दौरान रहमान ने स्पष्ट किया था कि बांग्लादेश न ही भारत और न पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ संबंध रखेगा। उन्होंने कहा था “न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सर्वोपरि है।”

इस दौरान रहमान ने भारत विरोध जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरवादी राजनैतिक पार्टियों की कड़ी आलोचना की है। यह पार्टी कभी बीएनपी की सहयोगी रही थी।

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भले ही बांग्लादेश के संबंध जिया के नेतृत्व वाली बीएनपी के शासनकाल में सुधरे हों लेकिन यह निर्णय जमात-ए-इस्लामी से प्रेरित था। यह पार्टी अब बीएनपी के साथ नहीं है। ऐसे में भारत को लचीलेपन की उम्मीद है।

गौरतलब है कि खालिदा जिया और उनके पिता जियाउर रहमान के शासन के दौरान यह दृष्टिकोण रहा कि उसकी विदेश और राजनैतिक नीतियां भारत के साये में संचालित न हों, भले ही 1971 में बांग्लादेश के बनने में नई दिल्ली की अहम भूमिका रही हो।

ऐसे में रहमान के न तो पाकिस्तान, न भारत वाले बयान में उनकी पारिवारिक विरासत को ही झलक दिखती है।

बीते दिनों खालिदा जिया के स्वास्थ्य लाभ के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया था। जिया के निधन के बाद देश-दुनिया के शीर्ष नेताओं ने शोक व्यक्त किया। वहीं, देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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