नई दिल्ली: भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव के अमेरिका में भारत द्वारा रूस और ईरान से तेल खरीदने के मुद्दे पर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा था कि नई दिल्ली ने अमेरिका की मांगों के बाद ‘रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमति जताई’ है।
वाशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट के सम्मेलन में बोलते हुए माधव ने कहा, ‘भारत ईरान से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया। विपक्ष की इतनी आलोचना के बावजूद हम रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गए। भारत ने बिना ज्यादा कुछ कहे 50% टैरिफ पर सहमति जताई। तो आखिर भारत अमेरिका के साथ सहयोग करने में कहां कमी कर रहा है?’
आरएसएस से जुड़े रह चुके राम माधव दरअस उस पैनल का हिस्सा थे जिसमें पूर्व राजनयिक एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड और अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट कैंपबेल भी शामिल थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के साथ नई दिल्ली के तेल खरीद-फरोख्त के कारोबार की कई बार आलोचना की है। ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दिया था।
बहरहाल, माधव की टिप्पणियों ने भारत में विपक्ष को सरकार की विदेश नीति पर हमला करने का मौका दे दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने ट्रंप के सामने ‘सरेंडर’ कर दिया और राष्ट्रीय हितों को दरकिनार किया गया।
विवाद के बाद राम माधव की सफाई
विपक्ष द्वारा भाजपा नेता की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया के बाद राम माधव ने एक्स पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा, ‘मैंने जो कहा वह गलत था। भारत ने कभी भी रूस से तेल आयात बंद करने पर सहमति नहीं जताई। साथ ही, उसने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने का भी पुरजोर विरोध किया। मैं दूसरे पैनलिस्ट के बयान का सीमित खंडन करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन ये तथ्यात्मक रूप से गलत है। इसके लिए मैं माफी मांगता हूं।’
इससे पहले कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पद पर बने रहने का अधिकार खो दिया है। कांग्रेस ने दावा किया कि आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने ‘स्पष्ट रूप से स्वीकार किया’ कि मोदी ‘वाशिंगटन के इशारों पर चल रहे हैं।’
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने राम माधव का एक वीडियो साझा करते हुए कहा, ‘आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री मोदी वाशिंगटन के इशारों पर नाच रहे हैं। एक समय था जब अमेरिका का सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में तैनात था और भारत टस से मस नहीं हुआ। और आज स्थिति कुछ और है, जहां एक समझौता करने वाले प्रधानमंत्री ने भारत की संप्रभुता अमेरिका के हाथों सौंप दी है।’
क्या ईरान और रूस से तेल खरीद रहा है भारत?
दरअसल, ट्रंप की बार-बार धमकियों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना कभी पूरी तरह बंद नहीं किया। वह रूसी कच्चे तेल पर निर्भर रहना जारी रखे हुए है। ट्रंप की धमकियों के बीच कुछ महीने जरूर रूस से तेल आयात कम रहा लेकिन जनवरी के बाद इसमें फिर इजाफा है। इस बीच पश्चिम एशिया की जंग के बाद भारत ने ईरान से भी तेल खरीदे हैं। भारत कहता रहा है कि उसके घरेलू हित, विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और मूल्य स्थिरता, उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।
पिछले महीने भारतीय रिफाइनरियों ने अप्रैल माह के लिए रूस से लगभग 6 करोड़ बैरल तेल खरीदा। इस बीच, भारत ने सात साल के अंतराल के बाद ईरान से तेल खरीदना भी शुरू किया। इस महीने की शुरुआत में, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घोषणा की कि पश्चिम एशिया में बाधा के बीच नई दिल्ली ने ईरान सहित 40 से अधिक देशों से तेल आपूर्ति सुरक्षित कर ली है।
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