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‘ये महिला आरक्षण बिल नहीं, देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है’; लोक सभा में राहुल गांधी

महिला आरक्षण पर राहुल गांधी ने सदन में राय रखी। इस दौरान उन्होंने भाजपा पर संविधान से ऊपर मनुवाद रखने का आरोप लगाया।

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फोटोः आईएएनएस

नई दिल्लीः लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार (17 अप्रैल) को संसद में सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वह महिला आरक्षण ढांचे और परिसीमन के बीच प्रस्तावित संबंध का इस्तेमाल भारत के चुनावी परिदृश्य को बदलने के लिए कर रही है।

गांधी ने तर्क दिया कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक ही “वास्तविक कानून” है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके कार्यान्वयन को परिसीमन से जोड़ने का वर्तमान कदम राजनीतिक सीमाओं को फिर से निर्धारित करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।

राहुल गांधी ने भाजपा को घेरा

सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को निशाना बनाते हुए उन्होंने दावा किया कि पार्टी देश के राजनीतिक नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही है और इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने असम और जम्मू-कश्मीर में हुए घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि राष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह के बदलावों के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी और इससे प्रतिनिधित्व पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसा कदम दक्षिणी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और छोटे राज्यों की राजनीतिक आवाज को असमान रूप से कम कर देगा। उन्होंने कहा कि “ आप पूर्वोत्तर राज्यों और भारत के छोटे राज्यों से कह रहे हैं कि भाजपा को सत्ता में बने रहने के लिए हम आपसे प्रतिनिधित्व छीन लेंगे। यह एक राष्ट्रविरोधी कृत्य से कम नहीं है। ”

महिला सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं

उन्होंने आगे कहा, “पहली सच्चाई यह है कि यह महिलाओं का विधेयक नहीं है। इसका महिला सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत के चुनावी नक्शे को बदलने का प्रयास है।”

उनके बयानों पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और उनके भाषण के दौरान ही सदस्य विरोध में खड़े हो गए।

उन्होंने (राहुल) यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य जातिगत जनगणना को दरकिनार करना और पिछड़े समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सीमित करना है।

गांधी ने आगे कहा कि “भारतीय समाज ने दलितों, ओबीसी और उनकी महिलाओं के साथ जैसा बर्ताव किया, वह एक ऐतिहासिक तथ्य है। यहां जो कोशिश की जा रही है वह जाति जनगणना को दरकिनार करने की है। वे मेरे ओबीसी भाइयों और बहनों को सत्ता और प्रतिनिधित्व देने से बचने और उनसे सत्ता छीनने की कोशिश कर रहे हैं।”

संविधान से ऊपर मनुवाद रखने की कोशिश

अपनी आलोचना को और बढ़ाते हुए उन्होंने सरकार पर “ संविधान से ऊपर मनुवाद ” को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया और जाति जनगणना के पीछे के इरादे पर सवाल उठाया।

इस दौरान राहुल ने गृह मंत्री अमित शाह का भी जिक्र किया। राहुल ने कहा कि ” वे कहते हैं कि जाति जनगणना शुरू हो गई है और बार-बार दोहराते हैं कि घरों की कोई जाति नहीं होती। असली सवाल यह है कि क्या जाति जनगणना का इस्तेमाल संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के लिए किया जाएगा। आप जो करने की कोशिश कर रहे हैं, उससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का प्रतिनिधित्व से कोई लेना-देना न रहे। “

वहीं, डीलिमिटेशन (परिसीमन) के मुद्दे पर गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक असुरक्षा के कारण ऐसा कर रही है। उन्होंने कहा कि “आप अपनी ताकत के कम होने से डरे हुए हैं और भारत के राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। आपने असम और जम्मू-कश्मीर में ऐसा किया और अब सोचिए कि आप पूरे भारत में ऐसा कर सकते हैं।”

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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