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धरती से टकराया 23 साल का सबसे शक्तिशाली सौर तूफान, दुनिया भर में दिखा दुर्लभ ऑरोरा

इस शक्तिशाली तूफान के कारण धरती के चुंबकीय क्षेत्र में भारी हलचल हुई, जिसकी वजह से दुनिया के उन हिस्सों में भी ऑरोरा (नार्दन लाइट्स) यानी रंगीन रोशनी का नजारा देखा गया, जहां यह आमतौर पर नहीं दिखता।

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तस्वीरें एक्स से ली गई हैं।

मंगलवार रात सूरज से निकली एक बेहद शक्तिशाली ऊर्जा की लहर (X1.9-क्लास सोलर फ्लेयर निकला) धरती से टकराई। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पिछले 23 वर्षों में दर्ज किया गया सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली सौर तूफान है। अमेरिकी एजेंसी नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार, इस तूफान ने ‘S4’ (गंभीर) श्रेणी का स्तर छू लिया है, जो साल 2003 के बाद अब तक की सबसे बड़ी सौर घटना है।

नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के स्पेस वेदर प्रिडिक्शन सेंटर के मुताबिक, मंगलवार दोपहर 2:38 बजे ईएसटी पर यह तूफान ‘सीवियर’ श्रेणी में पहुंच गया। बाद में इसकी तीव्रता कुछ कम हुई, लेकिन यह फिर से G4 स्तर पर सक्रिय रहा। स्पेस वेदर प्रिडिक्शन सेंटर ने पुष्टि की है कि पृथ्वी इस समय एक गंभीर सौर विकिरण तूफान से गुजर रही है, जिसे S4 श्रेणी में रखा गया है। पांच स्तरों वाली इस प्रणाली में S4 को ‘सीवियर’ माना जाता है और ऐसी घटनाएं बेहद दुर्लभ होती हैं।

सौर तूफान ने बदला आसमान का नजारा

इस शक्तिशाली तूफान के कारण धरती के चुंबकीय क्षेत्र में भारी हलचल हुई, जिसकी वजह से दुनिया के उन हिस्सों में भी ऑरोरा (नार्दन लाइट्स) यानी रंगीन रोशनी का नजारा देखा गया, जहां यह आमतौर पर नहीं दिखता। अमेरिका के 24 राज्यों समेत सैन फ्रांसिस्को, शिकागो और अलास्का में आसमान गुलाबी, हरे और बैंगनी रंगों से भर गया। यूरोप के फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड और क्रोएशिया जैसे देशों में भी लोगों ने इस अद्भुत नजारे को कैमरे में कैद किया।

क्यों आता है ऐसा तूफान?

सूरज की सतह पर समय-समय पर बड़े विस्फोट होते रहते हैं, जिन्हें सौर तूफान कहा जाता है। इन विस्फोटों के दौरान बिजली से चार्ज कणों की विशाल लहरें निकलती हैं। इस प्लाज्मा का एक हिस्सा अंतरिक्ष में सफर करते हुए पृथ्वी की ओर बढ़ता है और हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव में ध्रुवों की दिशा में खिंच जाता है।

स्पेस डॉट कॉम के अनुसार, यह तूफान सोमवार को तब शुरू हुआ जब सौर विकिरण (सोलर रेडिएशन) का एक तेज बादल धरती के स्ट्रेटोस्फीयर से टकराया। इससे धरती की अदृश्य चुंबकीय रेखाएं अस्थायी रूप से बाधित हो गईं, जिससे आवेशित कण (चार्ज्ड पार्टिकल्स) वायुमंडल में गहराई तक प्रवेश कर गए। जब सूरज से आए ये कण धरती की गैसों से टकराते हैं, तो ऊर्जा पैदा होती है जो रंगीन रोशनी के रूप में दिखाई देती है।

वैज्ञानिकों ने इस तूफान को लेकर चेतावनी भी जारी की है। S4 श्रेणी का सौर विकिरण तूफान उपग्रहों, संचार प्रणालियों और पावर ग्रिड को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से ध्रुवीय क्षेत्रों के पास उड़ान भरने वाले विमानों और रेडियो संचार प्रणालियों में पूरी तरह से रुकावट आने की संभावना है। अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स और वहां काम कर रहे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भी यह विकिरण जोखिम भरा हो सकता है।

कब तक रहेगा असर?

स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर (एसडबल्यूपीसी) के अनुसार, सौर विकिरण का स्तर अगले कुछ दिनों तक बढ़ा रह सकता है। हालांकि इसकी तीव्रता कम या ज्यादा हो सकती है, लेकिन एजेंसियां लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि सूरज अपने 11 साल के चक्र (सोलर साइकल) के चरम पर है, इसलिए आने वाले समय में ऐसी और घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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