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पीएम मोदी के राष्ट्र के संबोधन को लेकर कांग्रेस ने दिया विशेषाधिकार हनन नोटिस, क्या होता है ये?

लोकसभा में पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कांग्रेस ने विशेषाधिकार नोटिस दिया है। इससे पहले कांग्रेस 2024 में भी यह नोटिस लाई थी।

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फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्लीः कांग्रेस ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर लोकसभा में विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया है। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार (21 अप्रैल) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पिछले सप्ताह एक टेलीविजन पर प्रसारित राष्ट्रीय संबोधन के दौरान निचले सदन (लोकसभा) के सदस्यों पर “आपत्तिजनक टिप्पणी” करके संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन किया।

ओम बिरला को लिखे पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि “मैं लोकसभा में कार्य संचालन और प्रक्रिया नियमों के नियम 222 के प्रावधानों के तहत भारत के प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार के प्रश्न की सूचना देता हूं क्योंकि उन्होंने 18 अप्रैल, 2026 को प्रसारित अपने संबोधन/भाषण के दौरान लोकसभा सदस्यों पर आक्षेपपूर्ण टिप्पणी की थी।”

केसी वेणुगोपाल ने पीएम मोदी के संबोधन पर क्या कहा?

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने 18 अप्रैल को राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया। पीएम मोदी का यह संबोधन संविधान संशोधन (131वां) विधेयक, 2026 के लोकसभा में अनुच्छेद 368 के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त न कर पाने के कारण पराजित होने के एक दिन बाद हुआ था।

वेणुगोपाल ने आगे कहा कि 29 मिनट के इस भाषण को राष्ट्र के नाम संबोधन बताया गया है। इसमें प्रधानमंत्री ने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की और विपक्षी सदस्यों के मतदान पैटर्न का सीधा जिक्र करते हुए उन पर इरादे थोपे।

केसी वेणुगोपाल ने कहा, “इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि अपने कर्तव्य का पालन कर रहे निर्वाचित प्रतिनिधि पर सवाल उठाना न केवल व्यक्तिगत हमला है बल्कि संसद के अधिकार और भारत की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा अपमान है।”

उन्होंने आगे कहा, “माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे आग्रह करता हूं कि संसद की गरिमा और उसके सदस्यों को प्राप्त संवैधानिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तत्काल और निर्णायक कदम उठाएं ताकि ऐसे उल्लंघन न तो अनदेखे किए जाएं और न ही दोहराए जाएं।”

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वेणुगोपाल के पत्र पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी टिप्पणी की और कहा, “लोकसभा में मेरे वरिष्ठ सहयोगी केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री के तथाकथित राष्ट्र संबोधन के खिलाफ विशेषाधिकार प्रश्न का नोटिस जारी किया है। यह नोटिस लोकसभा में उनकी नापाक योजनाओं की विफलता के बाद दिया गया है, जिसका कारण विपक्ष की पूर्ण एकता और एकजुटता है, जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी।”

क्या होता है विशेषाधिकार हनन नोटिस?

विशेषाधिकार हनन नोटिस तब लाया जाता है जब संसद या विधानसभाओं का कोई सदस्य दूसरे सदस्यों या मंत्रियों के संसदीय अधिकार, विशेषाधिकार या फिर उन्मुक्तियों (इम्यूनिटीस) का उल्लंघन किया है। उदाहरण के लिए गलत जानकारी देना या सदन की अवमानना करना।

संसद या विधानसभा के पास प्रत्येक सदस्य के पास किसी विषय पर बोलने या वोट देने का अधिकार होता है। ऐसे में यह विशेषाधिकार नोटिस संसदीय नियमों के तहत सदन की गरिमा को नुकसान पहुंचाने वाले विशिष्ट कार्यों के विरुद्ध अनुचित आचरण के लिए सदस्यों को जवाबदेह ठहराने का एक तंत्र है।

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इसका उद्देश्य सदन के प्रत्येक सदस्य की स्वतंत्रता, गरिमा और कार्यक्षमता की रक्षा करना है। आमतौर पर यह अन्य सदस्यों के लिए अपमानजनक टिप्पणी, सदन को गुमराह करने या फिर संवेदनशील जानकारी का खुलासा करने के लिए जारी किए जाते हैं।

अक्सर यह नोटिस सदन के एक सदस्य द्वारा लाया जाता है जिसे लगता है कि उनके विशेषाधिकार का हनन हुआ है। स्पीकर या चेयरपर्सन यह तय करते हैं कि इसे स्वीकार किया जाए या नहीं।

इसी साल फरवरी में राहुल गांधी के खिलाफ सदन में विशेषाधिकार हनन नोटिस लाया गया था। वहीं, जुलाई 2024 में कांग्रेस ने पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा अध्यक्ष के खिलाफ “अपमानजनक” टिप्पणी करने के लिए प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दाखिल किया था।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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