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‘हर भारतीय नाराज है’, पीएम मोदी ने सीजेआई पर हमले की निंदा की, फोन पर की बात

पीएम मोदी ने सीजेआई पर हुए हमले की निंदा की है और फोन पर बात की है। इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी खेद जताया है। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी भी की है।

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पीएम मोदी ने सीजेआई पर हमले की निंदा की, फोटोः आईएएनएस

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में एक वकील द्वारा जूता फेंके जाने की कोशिश वाली घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए खेद जताया है। उन्होंने कहा कि इस घटना से “हर भारतीय नाराज” हैं। पीएम मोदी ने इस घटना के बाद सीजेआई गवई से फोन पर बात की।

पीएम मोदी ने इस बाबत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट भी किया। इस पोस्ट में उन्होंने सीजेआई पर हमला करने की कोशिश की निंदा की है।

पीएम मोदी ने एक्स पर क्या लिखा?

पीएम मोदी ने एक्स प्लेटफॉर्म पर पोस्ट में लिखा “भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई जी से बात की। आज सुबह सुप्रीम कोर्ट परिसर में उन पर हुए हमले से हर भारतीय क्षुब्ध है। हमारे समाज में ऐसे निंदनीय कृत्यों के लिए कोई जगह नहीं है। यह अत्यंत निंदनीय है।”

उन्होंने आगे लिखा “ऐसी स्थिति में न्यायमूर्ति गवई द्वारा प्रदर्शित धैर्य की मैं सराहना करता हूँ। यह न्याय के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और हमारे संविधान की भावना को मजबूत करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के परिसर में यह घटना उस वक्त घटी जब सीजेआई बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ वकीलों द्वारा मामले के उल्लेख पर चर्चा कर रही थी।

इस दौरान एक वकील (राकेश किशोर) ने मंच के पास आकर जूता उतारा और उछालने की कोशिश की। इस बीच सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और वकील को अदालत परिसर के बाहर ले गए।

सुरक्षाकर्मियों द्वारा जब वकील को बाहर ले जाया जा रहा था तो उसने कथित तौर पर नारे लगाए। वह ‘सनातन का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ नारा लगा रहा था। वकील द्वारा यह कृत्य कथित तौर पर सीजेआई द्वारा खजुराहो में भगवान विष्णु की प्रतिमा के पुनर्निर्माण टिप्पणी के विरोध में था।

राजनैतिक दलों समेत कई हस्तियों ने जताया खेद

कई राजनैतिक दलों द्वारा वकील के इस कृत्य की निंदा की गई। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने सीजेआई पर हमले की कोशिश की निंदा की। उन्होंने देश से सीजेआई के साथ खड़े होकर गहरी पीड़ा और आक्रोश के साथ खड़े होने का आह्वान किया। सोनिया गांधी ने अपने बयान में कहा “भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश पर सर्वोच्च न्यायालय में हुए हमले की निंदा करने के लिए कोई भी शब्द पर्याप्त नहीं है। यह न केवल उन पर बल्कि हमारे संविधान पर भी हमला है। मुख्य न्यायाधीश गवई बहुत दयालु रहे हैं लेकिन पूरे देश को गहरी पीड़ा और आक्रोश के साथ उनके साथ एकजुटता से खड़ा होना चाहिए।”

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस कृत्य की निंदा की है। राहुल गांधी ने एक्स पर टिप्पणी करते हुए लिखा “भारत के मुख्य न्यायाधीश पर हमला हमारी न्यायपालिका की गरिमा और हमारे संविधान की भावना पर हमला है। इस तरह की नफरत का हमारे देश में कोई स्थान नहीं है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।”

इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने भी इस कृत्य की आलोचना की। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए इस घटना की निंदा की। अखिलेश यादव ने एक्स पर की गई पोस्ट में लिखा “कुछ लोगों के हाथ में जाकर तो जूता भी अपमानित महसूस करता है। पीडीए समाज का अपमान करने वाले ऐसे असभ्य लोग दरअसल अपने दंभ और अहंकार के मारे होते हैं। इनकी प्रभुत्ववादी सोच नफरत को जन्म देती है जो देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए जितनी होती है, उतनी ही समाज के सबसे कमजोर अंतिम व्यक्ति के लिए भी। ऐसे लोग वर्चस्ववाद की बीमारी से घोर ग्रसित होते हैं। हम इसलिए कहते हैं, पीडीए का मतलब है ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’।”

सीजेआई बी.आर गवई ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस घटना पर सीजेआई कुछ नहीं बोले और उन्होंने सुनवाई जारी रखने को कहा। न्होंने कहा, ‘इस सब से विचलित न हों। हम विचलित नहीं हैं। इन बातों का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता।’

गौरतलब है कि बीते महीने सीजेआई ने खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के पुनर्निर्माण को लेकर दायर की गई एक याचिका खारिज कर दी थी। इस दौरान उन्होंने इसे एक प्रचार याचिका बताया था। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि अगर आप भगवान विष्णु के भक्त हैं तो प्रार्थना कीजिए और ध्यान कीजिए।

ऐसा कहा जा रहा है कि वकील द्वारा किया गया कृत्य उनकी इसी टिप्पणी के विरोध में था। इस बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने ऐसा करने वाले वकील को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, वकील के खिलाफ एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया जाएगा जिसमें वकील को आदेश प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। इसमें वकील को यह बताना होगा कि उसका निलंबन क्यों नहीं जारी रखना चाहिए या फिर उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए?

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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