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कर्पूरी ठाकुर के गांव से PM मोदी के चुनावी प्रचार का आगाज क्या विपक्ष के ‘मुकेश सहनी’ वाले दांव पर पड़ेगा भारी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार में अपने चुनावी प्रचार की शुरुआत समस्तीपुर से शुक्रवार को कर दी। कर्पूरी ठाकुर की धरती से पीएम मोदी के इस आगाज के कई मायने भी निकाले जा रहे हैं। पीएम मोदी ‘कर्पूरी ग्राम’ भी गए और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किया।

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Samastipur: Prime Minister Narendra Modi arrives to pay tribute to the former Chief Minister of Bihar, late Karpoori Thakur, in Samastipur, Bihar, on Friday, October 24, 2025. (Photo: IANS/PMO)

समस्तीपुर: बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी पर जोर पकड़ चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने चुनाव प्रचार का आगाज शुक्रवार को बिहार के समस्तीपुर से कर दिया। जननायक और बिहार में सामाजिक न्याय के पुरोध भी माने जाने वाले कर्पूरी ठाकुर की धरती से पीएम मोदी ने अपनी रैली में कांग्रेस और राजद पर जमकर निशाना साधा। दिलचस्प है कि विपक्ष ने एक दिन पहले ही अति पिछड़ा वर्ग से आने वाले मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का चेहरा घोषित करते हुए बड़ा सियासी दांव खेला है।

बहरहाल, रैली से पहले पीएम मोदी ‘कर्पूरी ग्राम’ भी गए और उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने अपने भाषण में भी कर्पूरी ठाकुर का खूब जिक्र किया और बिहार में अति पिछड़े वर्ग के महागठबंधन के वोट खींचने की कोशिश के बीच एक बड़ी सियासी लकीर खींचते नजर आए।

बिहार में पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग का वोट काफी अहम माना जाता रहा है। इस लिहाज से पीएम मोदी का समस्तीपुर से चुनावी प्रचार का आगाज कई मायनों में और सांकेतिक रूप से भी अहम है। पिछले ही साल 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कर्पूरी ठाकुर को मोदी सरकार ने भारत रत्न से भी नवाजा था।

कर्पूरी ठाकुर का जिक्र कर पीएम मोदी क्या बोले?

पीएम मोदी ने रैली में राजद और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘राजद और कांग्रेस वाले क्या कह रहे हैं और क्या कर रहे हैं ये आपको मुझसे ज्यादा पता है। आपको याद दिलाने की जरूरत नहीं है। ये लोग हजारों करोड़ रुपए के घोटालों में जमानत पर चल रहे हैं। कोई चोरी के मामले में जमानत पर है, अब चोरी की आदत इनकी ऐसी है कि ये ‘जननायक’ की उपाधि की चोरी में जुटे हैं। बिहार के लोग जननायक कर्पूरी ठाकुर का ये अपमान कभी नहीं सहेंगे।’

पीएम मोदी ने कहा, ‘आज का दिवस मेरे जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण दिवस है। यहां आने से पहले मैं कर्पूरी ग्राम गया था, वहां मुझे भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को श्रद्धापूर्वक उन्हें नमन करने का अवसर मिला।’

पीएम ने कहा, ‘ये उनका ही आशीर्वाद है कि आज हम जैसे पिछड़े और गरीब परिवारों से निकले लोग इस मंच पर खड़े हैं। आजाद भारत के सामाजिक न्याय लाने में, गरीब और वंचितों को नए अवसरों से जोड़ने में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की भूमिका बहुत बड़ी रही है। वे मां भारती के अनमोल रत्न थे। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने का सौभाग्य हमारी सरकार को मिला। ये हमारे लिए सम्मान की बात है। हमारी सरकार भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को प्रेरणापुंज मानती है। वंचितों को वरीयता, पिछड़ों को प्राथमिकता, गरीब की सेवा हम इस संकल्प के साथ आगे बढ़े हैं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कर्पूरी ठाकुर के दिखाए सामाजिक न्याय के रास्ते को एनडीए ने सुशासन का आधार बनाया है। हमने गरीबों, दलितों, महादलितों, पिछड़ों, अतिपिछड़ों के हितों को प्राथमिकता दी है। हमारी सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। भाजपा एनडीए ने ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को भी 10 साल के लिए और आगे बढ़ाया।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘डॉक्टर की पढ़ाई के लिए अखिल भारतीय कोटे में पहले पिछड़ों को, गरीबों को आरक्षण नहीं था। ये संविधान लेकर जो गुमराह करते हैं तब ये हक नहीं मिलता था। एनडीए सरकार ने ही ये प्रावधान किया। हमारे देश में ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने की मांग कई दशकों से हो रही थी। ये मांग भी एनडीए सरकार ने ही पूरी की। अब गरीब का बेटा अपनी भाषा में पढ़ाई कर सकता है।’

बिहार में अति पिछड़ा वर्ग और विपक्ष का दांव

बिहार में अति पिछड़े वर्ग की आबादी 35 फीसदी से ज्यादा है और इसमें 100 से ज्यादा जातिंया शामिल हैं। एक तरह से ये कहा जा सकता है कि सत्ता की चाबी इन्हीं अति पिछड़े वर्ग के पास है। इनका वोट हर पार्टी के लिए जरूरी है। सत्ता में बनी हुई एनडीए और विपक्ष यानी महागठबंधन भी इस सच्चाई से वाकिफ है। गुरुवार को विपक्ष ने तेजस्वी यादव को अपना सीएम चेहरा घोषित किया तो साथ ही मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम का चेहरा बनाया।

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी अति पिछड़ी मल्लाह जाति से आते हैं। माना जा रहा है कि सहनी के जरिए अति पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश है। बिहार की बात करें तो करीब तीन फीसदी वोट सहनी है जो मल्लाह, बिंद, सहनी, निषाद आदि उपनामों से प्रचलित हैं। सहने के नाम के साथ और पिछड़ी जातियों के वोट में भी सेंधमारी की कोशिश है, जिनमे कई आमतौर पर नीतीश कुमार सहित एनडीए के वोटर माने जाते हैं।

समस्तीपुर में पीएम मोदी ने किया मछुआरों का भी जिक्र

महागठबंधन की ओर से मुकेश सहनी का नाम बढ़ाने के चुनावी बिसात पर पीएम मोदी का भी जवाब समस्तीपुर की रैली में नजर आया। पीएम मोदी कर्पूरी ठाकुर और अति पिछड़ी जातियों के लिए किए गए अपने काम का जिक्र तो किया ही, साथ ही ये भी कहा कि एनडीए सरकार मछुआरों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। मल्लाह वोटों को साधने के लिहाज से पीएम मोदी ये भी कहा कि 2014 में उनकी सरकार आते ही ‘पीएम मत्स्य योजना’ शुरू की गई।

पीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने मछली पालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड दिया है और बीते एक दशक में बिहार में मछली का उत्पादन दोगुना हो गया है। उन्होंने कहा कि आज बिहार भी बड़ी मात्रा में मछली दूसरे राज्यों को बेच रहा है।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में एक और दिलचस्प बात कही। भगवान राम की पत्नी सीता के मिथिला क्षेत्र से होने की मान्यता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आपके दामाद स्वयं भगवान राम हैं। इसलिए, जब अयोध्या में राम मंदिर बना, तो मिथिला के लोग बहुत खुश हुए।’

उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के पास महर्षि वाल्मीकि और निषाद राज के नए मंदिर भी बनाए गए हैं। पीएम मोदी की इस बात को सीधे तौर पर दलितों और अति पिछड़े वर्गों तक पहुँचने के एक अलग प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है। वाल्मीकि दलित स्वयं को वाल्मीकि का वंशज मानते हैं, जिन्हें रामायण का रचयिता भी कहा जाता है। वहीं, निषाद राज का संदर्भ मल्लाहों को लेकर था, जो एक अति पिछड़ी जाति है और जिसका प्रतिनिधित्व करने का दावा मुकेश सहनी करते हैं। सहनी अब विपक्ष के उपमुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी हैं।

कर्पूरी ठाकुर के बारे में

कर्पूरी ठाकुर बिहार के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। कर्पूरी ठाकुर ने कई ऐसे फैसले लिए जो न केवल बिहार में बल्कि देश में मिसाल बने। 1967 में पहली बार उपमुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म किया। मंडल आयोग के लागू होने से भी काफी पहले देश में सबसे पहले उन्होंने पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिया।

बिहार के समस्तीपुर जिले में पितौंझिया गांव में एक नाई परिवार में 24 जनवरी 1924 को कर्पूरी ठाकुर का जन्म हुआ था। आज इसी गांव की पहचान ही कर्पूरी ग्राम के रूप में की जाती है। वे बिहार में एक बार उपमुख्यमंत्री, दो बार मुख्यमंत्री और लंबे समय तक विधायक और विरोधी दल के नेता रहे। 1952 की पहली विधानसभा में चुनाव जीतने के बाद वे बिहार विधानसभा का चुनाव कभी नहीं हारे।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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