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PM, CM को जेल में रहने पर छोड़ना होगा पद, JPC रिपोर्ट तैयार! मानसून सत्र में आ सकता है बिल

बिल को सबसे पहले 2025 के मानसून सत्र में लाया गया था। हालांकि, तब कई पार्टियों द्वारा कड़ा ऐतराज जताने के बाद इसे जेपीसी को भेज दिया गया था।

Lok Sabha

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री (PM, CM) या किसी मंत्री के पद पर रहते हुए जेल जाने और कम से कम 30 दिन तक गिरफ्तार रहने की अवस्था में पद से हटाने संबंधी बिल को केंद्र सरकार आने वाले मानसून सत्र में संसद में पेश कर सकती है। यह 130वां संविधान संशोधन बिल होगा। सूत्रों के अनुसार इस विधेयक से जुड़ा प्रस्ताव अभी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास है। इसी महीने जेपीसी अपनी रिपोर्ट को मंंजूरी दे सकती है। इसके बाद सरकार बिल लाने की दिशा में कदम बढ़ाएगी।

भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता में बनी जेपीसी की 17 जुलाई की बैठक में रिपोर्ट को मंजूरी दी जा सकती है। बिल को सबसे पहले 2025 के मानसून सत्र में लाया गया था। हालांकि, तब कई पार्टियों द्वारा कड़ा ऐतराज जताने के बाद इसकी विस्तृत समीक्षा के लिए बिल को जेपीसी को भेज दिया गया था। माना जा रहा है कि जेपीसी मानसून सत्र की शुरुआत में ही अपनी रिपोर्ट रख सकती है। इसके बाद सरकार बिल पर चर्चा कराने और इसे पास कराने की कोशिश में जुटेगी। सूत्रों के अनुसार 20 जुलाई से संसद का मानसूद सत्र शुरू हो सकता है।

बिल में क्या है? दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी

सरकार के प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक का उद्देश्य यह प्रावधान करना है कि यदि किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों सहित कुछ गंभीर अपराधों में गिरफ्तार किया जाता है और वह 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रहते हैं, तो 31वें दिन अपने पद से स्वतः हट जाएंगे।

यह संविधान संशोधन विधेयक है, इसलिए इसे संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित होना होगा। पिछले वर्ष जब यह विधेयक संसद में पेश किया गया था, तब विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने इसके दुरुपयोग की आशंका भी जताई थी। उनका कहना था कि इस पर विस्तृत संसदीय समीक्षा की जरूरत है। इसके बाद सरकार ने इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया था। संभव है कि जेपीसी इन मामलों पर भी कुछ सुझाव देगी।

बदला गणित, क्या सरकार मिल जाएगा दो तिहाई बहुमत?

पिछले मानसून सत्र के बाद संसद का सियासी गणित बदल गया है, जिससे इस विधेयक को लेकर एनडीए सरकार की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत मानी जा रही है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद तृणमूल कांग्रेस के 20 विधायक नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए और एनडीए को समर्थन की भी घोषणा की। इसके अलावा उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के छह सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए हैं, जिससे एनडीए सांसदों की संख्या बढ़कर करीब 330 तक पहुंच गई है। हालांकि, संविधान संशोधन पारित कराने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से ये संख्या अब भी कम है।

राज्यसभा में भी एनडीए की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। आम आदमी पार्टी के सात सांसद भाजपा में शामिल हुए हैं। इससे सदन में एनडीए की संख्या बढ़कर 141 हो गई है। यदि 10 मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों के समर्थन को भी जोड़ दिया जाए, तो गठबंधन का आंकड़ा 151 तक पहुंच जाता है। हालांकिय ये भी संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत से अब भी 11 वोट कम है।

ऐसे में अब नजरें क्षेत्रीय दलों पर भी रहेंगी। बीजू जनता दल (बीजद) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) पहले भी कई अहम विधेयकों पर सरकार का समर्थन कर चुके हैं। यदि ये दल इस प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक का भी समर्थन करते हैं, तो सरकार के लिए इसे दो तिहाई बहुमत के साथ पारित कराना आसान हो सकता है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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