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AI का खतरा हर क्षेत्र में मंडरा रहा, प्लंबर्स और इलेक्ट्रिशियन्स की भी नौकरी संकट में! नई स्टडी में क्या पता चला?

कॉग्निजेंट की यह नई रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब तकनीकी कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं।

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फोटोः ग्रोक (एआई)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खतरा हर क्षेत्र में मंडरा रहा है। 2022 में OpenAI ने ChatGPT लांच किया था जिसके बाद से हर क्षेत्र की नौकरियों में संकट देखा जा रहा है। चैटजीपीटी के लांच होने के बाद AI का युग शुरू हो गया था। विशेषज्ञों ने AI के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का अध्ययन किया और खतरे को लेकर आगाह किया था। 2023 में प्रकाशित कॉग्निजेंट की एक रिपोर्ट में सुझाव दिया गया था कि जनरेटिव AI 2032 तक 90 प्रतिशत नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। लेकिन जैसा कि सामने आया है AI ने नौकरियों में बहुत तेजी से बदलाव लाने में कामयाबी हासिल की है।

इस बीच कॉग्निजेंट ने एक नई रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें कहा गया है कि जनरेटिव एआई ने कार्यस्थल पर उम्मीद से कहीं पहले ही अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। अब 93 प्रतिशत नौकरियां एआई-सक्षम मानी जाती हैं। इनमें से 30 फीसदी नौकरियों में अभूतपूर्व बदलाव आने वाला है। यानी जो बदलाव पहले 9 साल में होने की उम्मीद थी वह 3 साल से भी कम समय में हो गया है।

हर क्षेत्र में मंडरा रहा AI का खतरा

कॉग्निजेंट की यह नई रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब तकनीकी कंपनियां बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं। मेटा, ओरेकल, अमेजन और कई अन्य कंपनियों ने अकेले इस साल हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। layoffs.fyi के मुताबिक 2026 में अब तक लगभग 1,15,907 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा चुका है। 2025 में यह संख्या 1,24,636 थी।

हालांकि ऐसा लग सकता है कि एआई का असर मुख्य रूप से उन नौकरियों पर पड़ता है जो ऑटोमेटेड की जा सकती हैं। इनमें सेवाएं या कोडिंग शामिल हैं हालांकि कॉग्निजेंट के अनुसंधान प्रमुख (रिसर्च हेड) ओली ओ’डोनोघू का मानना ​​है कि लगभग हर कोई खतरे में हो सकता है। उन्होंने कहा, “कोई भी सुरक्षित नहीं है।”

उनका दावा है कि एआई के युग में इलेक्ट्रिशियन या प्लंबर जैसे लोगों के काम में भी बदलाव की जरूरत होगी। हालांकि प्लंबर को मरम्मत का काम तो करना ही होगा लेकिन जल्द ही एआई कई काम कर सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि “इसमें कोई शक नहीं कि रिंच चलाने के लिए किसी की जरूरत तो पड़ेगी ही लेकिन प्लंबिंग की असल प्रक्रिया और उससे मिलने वाला लाभ थोड़ा बदल जाएगा।”

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रिपोर्ट के मुताबिक, “आज एक मल्टीमॉडल रीजनिंग एजेंट दीवार पर नमी के धब्बे को पहचान सकता है, रिसाव वाले जोड़ का पता लगा सकता है, मरम्मत योजना बना सकता है और यहां तक ​​कि बिल या पुर्जों की सूची भी तैयार कर सकता है।” इसमें आगे कहा गया है कि “पाइप की मरम्मत तो प्लंबर ही करता है लेकिन निरीक्षण, निदान और उससे पहले या बाद में की जाने वाली सहायक कार्रवाइयों में एआई की मदद ली जा सकती है।”

गौरतलब है कि इस साल मार्च में एंथ्रोपिक ने एक अध्ययन जारी किया था। इसमें 22 ऐसे व्यवसायों को दिखाया गया था जो एआई से अपेक्षाकृत अप्रभावित रह सकते हैं। इनमें स्थापना और मरम्मत का काम शामिल है।

रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न व्यवसायों में एआई का प्रभाव पड़ने का औसत स्कोर अब 2032 के लिए किए गए पूर्वानुमान से 30 प्रतिशत अधिक है। पहले के विश्लेषणों में इसमें औसतन वृद्धि 2 फीसदी प्रति वर्ष लगाया गया था लेकिन हालिया अपडेट में यह वृद्धि 9 फीसदी प्रति वर्ष तक पहुंच गई है।

कंपनी ने कहा कि इसका मतलब यह हो सकता है कि अकेले अमेरिका में लगभग 4.5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 427 लाख करोड़ रुपये) मूल्य का श्रम मनुष्यों से एआई में स्थानांतरित हो जाएगा।

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इस रिपोर्ट में हालांकि मौजूदा नौकरियों के भविष्य को लेकर चिंता जताती है लेकिन कॉग्निजेंट के एआई विभाग के मुख्य व्यवसाय अधिकारी सुशांत वारिकू का दावा है कि एआई की बदौलत नए “मूल्य भंडार” बन सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि “ऐसा होने पर इससे सामाजिक-आर्थिक विकास में काफी वृद्धि होगी – इससे बाजार में नई नौकरियां और नए अवसर पैदा होंगे।” हालांकि, उनका तर्क है कि इसके लिए कंपनियों को “परिचालन मॉडल में बदलाव” के माध्यम से एआई के अनुरूप ढलना होगा।

अमेरिकी आईटी कंपनी कॉग्निजेंट की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ओपनएआई के सीईओ सैम अल्टमैन और एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई जैसे तकनीकी नेताओं ने एआई द्वारा व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर कब्जा करने की संभावना पर अपने विचार बदलने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में सैम ऑल्टमैन ने कहा था कि एआई आपकी मदद के लिए एक बेहतरीन विकल्प है लेकिन यह सीधे तौर पर नौकरी नहीं छीनेगा। जबकि इससे कुछ नौकरियां सीधे तौर पर प्रभावित होंगी। सोमवार (1 जून) को एनवीडिया के जीटीसी कीनोट में सीईओ जेन्सेन हुआंग ने दावा किया कि एआई द्वारा नौकरियों पर कब्जा करने की बात “पूरी तरह बकवास” है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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