Petrol, Diesel Price Hike: सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी कर दी। करीब चार साल बाद आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई है, जबकि सीएनजी भी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है। नई दरें आज से ही लागू हो गई हैं।
राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 3.14 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 97.77 रुपये कर दी गई है, जबकि डीजल 3.11 रुपये महंगा होकर 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। इससे पहले राजधानी में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए जाने के कुछ ही देर बाद सीएनजी की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी गई। दिल्ली में सीएनजी की नई दर 2 रुपये बढ़ाए जाने के बाद 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।वहीं मुंबई महानगर क्षेत्र में सीएनजी अब 84 रुपये प्रति किलो मिलेगी।
अन्य महानगरों में भी कीमतों में समान बढ़ोतरी हुई है। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये और डीजल 95.13 रुपये प्रति लीटर हो गया है। मुंबई में पेट्रोल 106.68 रुपये और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल 103.67 रुपये और डीजल 95.25 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
दिल्ली समेत UP के शहरों में बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
| शहर | पेट्रोल (प्रति लीटर) | डीजल (प्रति लीटर) | CNG |
|---|---|---|---|
| दिल्ली | ₹97.77 | ₹90.67 | ₹79.09/kg |
| कोलकाता | ₹108.74 | ₹95.13 | — |
| मुंबई | ₹106.68 | ₹93.14 | ₹84/kg |
| चेन्नई | ₹103.67 | ₹95.25 | — |
| लखनऊ | ₹97.53 तक | ₹90.82 तक | ₹95.75-96.75/kg |
| वाराणसी | ₹95.11 तक | ₹88.30 तक | ₹87.67/kg |
सरकारी तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नियमित संशोधन नहीं कर रही थीं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद कंपनियों ने घरेलू उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाला। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती जरूर की गई थी।
क्यों बढ़े दाम, तेल कंपनियों ने क्या कहा है?
हालांकि, अब पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत पिछले तीन महीनों से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। अप्रैल 2026 में यह औसत 114 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि मई में भी यह करीब 104 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले यही कीमत करीब 69 डॉलर प्रति बैरल थी।
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संकेत दे चुके थे कि तेल कंपनियों को रोजाना 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो रहा है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक यह नुकसान 1600 करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गया था। कंपनियों ने सरकार से खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी की मांग भी की थी।
सरकार अब तक महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए दाम बढ़ाने से बचती रही, क्योंकि ईंधन महंगा होने का असर परिवहन से लेकर खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों तक पड़ता है। हालांकि कई अर्थशास्त्रियों, जिनमें वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया भी शामिल हैं, ने बाजार के अनुरूप पेट्रोल-डीजल कीमतें बढ़ाने की वकालत की थी।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल में नागरिकों से ईंधन की बचत करने, अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने और जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की थी ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके। इसी दौरान रुपये में भी गिरावट दर्ज की गई है और डॉलर के मुकाबले इसकी कीमत 95 रुपये के पार पहुंच गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता जारी रहने पर आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की नई कीमतें आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकती हैं।
Also Read: गौतम अदानी के लिए अमेरिका से आई अच्छी खबर! जल्द खत्म हो सकता है फ्रॉड केस

