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गौतम अदानी के लिए अमेरिका से आई अच्छी खबर! जल्द खत्म हो सकता है फ्रॉड केस

नई दिल्ली: भारत के उद्योगपति गौतम अदानी के खिलाफ अमेरिका में धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़ा मामला जल्द खत्म हो सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी अधिकारी मामला खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी न्याय विभाग कथित तौर पर 265 मिलियन डॉलर की रिश्वतखोरी और फ्रॉड स्कीम से जुड़े आपराधिक मामले को इसी सप्ताह के अंत तक रद्द कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो अदानी और अदानी समूह के लिए एक बड़ी कानूनी राहत साबित होगा।

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) भी अदानी के खिलाफ रिश्वतखोरी वाले मामले के साथ-साथ चल रहे दीवानी धोखाधड़ी मामले को निपटाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे 2024 के आखिर से अदानी समूह पर चल रही कानूनी लड़ाई का अंत हो जाएगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब गौतम अदानी और उनके भतीजे सागर अदानी ने इसी साल अप्रैल में न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में अलग-अलग SEC के दीवानी मामले को चुनौती देते हुए मुकदमे को खारिज करने की मांग की है। ब्रुकलिन की संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों में अदानी परिवार ने दलील दी कि उन्होंने कोई भी गलत काम नहीं किया है। उन्होंने तर्क दिया है कि SEC की शिकायत के केंद्र में रहे 2021 के बॉन्ड इशू में निवेशकों को कोई नुकसान नहीं हुआ।

अमेरिकी SEC में अदानी के खिलाफ मामला क्या है?

SEC का मामला 2021 में अदानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा जारी किए गए 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड से जुड़ा है। अदानी परिवार ने किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करते हुए तर्क दिया है कि एसईसी के पास इस मामले में अधिकार क्षेत्र नहीं है क्योंकि दोनों कंपनियां भारत में स्थित हैं। उन्होंने कहा कि कथित घटना पूरी तरह से भारत में घटी और ये प्रतिभूतियां किसी भी अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं थीं।

इनके वकीलों ने अमेरिकी अदालत कहा कि ये बॉन्ड नियम 144A और रेगुलेशन S छूट के तहत अमेरिका के बाहर जारी किए गए थे। उन्होंने बताया इसे शुरू में गैर-अमेरिकी अंडरराइटरों को बेचे गए थे और बाद में आंशिक रूप से योग्य संस्थागत खरीदारों को फिर से बेचे गए थे। इसी आधार पर, दायर याचिका में SEC के दावों को ‘क्षेत्राधिकार से बाहर’ बताया गया। उन्होंने दावा किया कि निवेशकों को कोई नुकसान नहीं हुआ, और न ही रिश्वतखोरी का कोई विश्वसनीय सबूत मिला।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि SEC निवेशकों को हुए नुकसान को साबित करने में विफल रहा है। दरअसल, ऐसे आरोप लगे कि अदानी और अन्य आरोपियों ने भारत में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए भारत सरकार के अधिकारियों को रिश्वत देने का वादा किया था। इसी दौरान जब ग्रुप अमेरिकी निवेशकों से पैसा जुटाने में लगा था, तब इस योजना को छुपाए रखा गया।

बहरहाल, यदि अमेरिकी न्याय विभाग औपचारिक रूप से आपराधिक आरोप वापस ले लेता है और एसईसी समझौता कर लेता है, तो अदानी समूह के लिए एक बड़ा संकट टल जाएगा। दरअसल, एक ओर अदानी समूह अमेरिका में नियामकीय जांच का सामना कर रहा है, जबकि वह बंदरगाहों और हवाई अड्डों से लेकर रिन्यूएबल एनर्जी और बुनियादी ढांचे तक के क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहा है। अदानी समूह को राहत मिलती है तो उसके लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों में वापसी का रास्ता भी खुल जाएगा।

यह भी पढ़ें- भारत कितना गोल्ड आयात करता है, फॉरेन रिजर्व पर कितना और कैसे दबाव बना रहा है सोने का आयात?

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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