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पवन सिंह नहीं लड़ेंगे बिहार विधानसभा चुनाव, कहा- मैं भाजपा का सच्चा सिपाही

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अपने निजी रिश्ते को लेकर विवादों में घिरे भोजपुरी के लोकप्रिय गायक और अभिनेता पवन सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नहीं लड़ेंगे। उन्होंने खुद को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का सच्चा सिपाही बताते हुए कहा कि पार्टी में उनका शामिल होना सिर्फ संगठन के काम के लिए है, न कि टिकट पाने के लिए।

शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए पवन सिंह ने एक्स पर लिखा, “मैं पवन सिंह अपने भोजपुरीया समाज से बताना चाहता हूँ कि मैं बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी जॉइन नहीं किया था और ना ही मुझे विधानसभा चुनाव लड़ना है। मैं पार्टी का सच्चा सिपाही हूँ और रहूँगा।

चुनावी अटकलों पर लगा विराम

पिछले कुछ हफ्तों से पवन सिंह के बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें जोरों पर थीं, जब उन्होंने भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा सहित कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं से मुलाकात की थी। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा थी कि भाजपा उन्हें राज्य में राजपूत मतदाताओं को साधने के लिए उतार सकती है।

दिलचस्प बात यह है कि पवन सिंह ने हाल ही में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख और भाजपा के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा से भी मुलाकात की थी। कुशवाहा 2024 के लोकसभा चुनाव में कराकाट सीट से पवन सिंह के सामने निर्दलीय उम्मीदवार थे।

दरअसल लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भाजपा ने पवन सिंह को पश्चिम बंगाल की आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उनके कुछ गीतों और म्यूजिक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिन पर बंगाली महिलाओं को अशोभनीय तरीके से दिखाने के आरोप लगे थे। इसके बाद पार्टी ने उनसे नामांकन वापस लेने को कहा। हालांकि पार्टी से बगावत कर पवन सिंह ने कराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा।

चुनाव में पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा, दोनों को हार का सामना करना पड़ा था। सीपीआई (एम-एल) लिबरेशन के राजा राम सिंह ने जीत दर्ज की। कुशवाहा के लिए यह शर्मनाक हार थी क्योंकि पवन सिंह ने उन्हें तीसरे नंबर पर धकेल दिया था बावजूद इसके लिए उन्होंने 2014 से 2019 तक काराकाट का प्रतिनिधित्व किया था। चुनाव के दौरान पवन सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में भाजपा से निलंबित कर दिया गया। हालांकि डेढ़ साल बाद फिर से उनकी भाजपा में वापसी हुई है।

इस बीच, शुक्रवार को पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर से पटना में मुलाकात की, जिससे राजनीतिक गलियारों में नई अटकलें शुरू हो गईं कि वह आगामी बिहार चुनाव में उतर सकती हैं। हालांकि प्रशांत किशोर ने बाद में मीडिया से बात करते हुए कहा कि ज्योति सिर्फ अपने निजी जीवन से जुड़ी परेशानियों के बारे में बात करने आई थीं। उन्होंने कहा कि ज्योति जी आज हमसे मिलने आई थीं। मैं साफ कर दूं कि चुनाव लड़ना या टिकट पाना उनका मकसद नहीं है।

चुनावी चर्चाओं के बीच पवन सिंह अपने निजी रिश्ते को लेकर भी सुर्खियों में हैं। हाल के दिनों में पवन सिंह और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच वैवाहिक विवाद काफी बढ़ गया है। ज्योति हाल ही में पवन सिंह से मिलने लखनऊ स्थित उनके फ्लैट पर पहुंची थी लेकिन उन्होंने इंस्टाग्राम पर लाइव आकर बताया कि पवन सिंह ने उनके लिए पुलिस भेज दिया है।

वहीं, भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, “क्या मैं उस जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाऊँगा, जिन्होंने मुझे इस मुकाम तक पहुँचाया है? सच यह है कि मेरे घर पर पुलिस पहले से मौजूद थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। उनके (ज्योति के) खिलाफ किसी को नहीं बुलाया गया था।”

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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