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सीजेपी प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल लोगों के पासपोर्ट हो सकते हैं रद्द, पुलिस कर रही जांच

पुलिस हिंसा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों के खिलाफ सबूत जुटा रही है और इनके पासपोर्ट रद्द किए जा सकते हैं। पुलिस के मुताबिक, जांचकर्ता इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग लोगों की पहचान के लिए कर रही है।

Passports of those involved in violence during the CJP protest could be cancelled delhi police investigating, दिल्ली पुलिस
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर इन दिनों गर्मागर्मी का माहौल बना हुआ है। कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में नीट पेपर लीक के विरोध में धरना प्रदर्शन जारी है। इस बीच पुलिस के साथ हिंसा की भी खबरें रिपोर्ट की गई हैं। ऐसे में पुलिस हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़े एक्शन की तैयारी में दिख रही है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान हिंसा में शामिल लोगों के पासपोर्ट रद्द कर सकती है।

समाचार एजेंसी पीटीआई की खबर के मुताबिक, पुलिस हिंसा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों के खिलाफ सबूत जुटा रही है और इनके पासपोर्ट रद्द किए जा सकते हैं। पुलिस के मुताबिक, जांचकर्ता इसके लिए सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का उपयोग लोगों की पहचान के लिए कर रही है।

सीजेपी प्रदर्शन में हिंसा में शामिल लोगों के पासपोर्ट हो सकते हैं रद्द

टाइम्स ऑफ इंडिया ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दिल्ली पुलिस हिंसा में शामिल लोगों के पासपोर्ट रद्द करने की कार्यवाही शुरू कर सकती है।

गौरतलब है कि पुलिस की यह कार्रवाई बुधवार रात (22 जुलाई) को भड़की हिंसा के एक दिन बाद आई है। बुधवार रात को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की खबरें आईं थीं जिसमें दिल्ली पुलिस के दो एसीपी समेत छह पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबर थी।

पुलिस ने इस दौरान भीड़ पर काबू पाने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे थे। दिल्ली पुलिस ने इस बीच अधिकारियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में शामिल लोगों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है और इनकी पहचान की जा रही है।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हो रहा प्रदर्शन

गौरतलब है कि दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित मंच पर इन दिनों नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन हो रहा है। प्रदर्शन में भारी संख्या में लोग जुट रहे हैं। इनमें देश के अलग-अलग राज्यों के लोग शामिल हैं जो अपनी मांगों को तेज कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा शामिल है।

बीती 20 जुलाई को सीजेपी के आह्वान पर ‘चलो संसद’ मार्च निकाला गया था। इस दौरान पुलिस द्वारा छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसके कई वीडियोज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वहीं पुलिसकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों की ओर से पत्थर फेंके जाने की खबरें हैं।

यह भी पढ़ें – CJP का शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान, सरकार के प्रस्ताव पर कहा- आवास या मंत्रालय में बैठक नहीं करेंगे

सोशल मीडिया पर छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर जंतर-मंतर पर 20 जुलाई की रात फिर से प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए और यह भीड़ दिन ब दिन बढ़ती दिखाई दे रही है। बढ़ती भीड़ को काबू करने के लिए 22 जुलाई को 16 मेट्रो स्टेशन बंद करने पड़े। 22 जुलाई को पुलिसकर्मियों पर हुई हिंसा के चलते सेंट्रल दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट बंद किया गया था। वहीं, 23 जुलाई को भी 17 मेट्रो बंद करने पड़े हैं। 23 जुलाई को भी जंतर-मंतर के आसपास के इलाकों में इंटरनेट बंद है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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