नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी गुरुवार (23 जुलाई) को पत्रकारों के सवाल पूछे जाने पर भड़क उठीं और कहा कि वह सिर्फ उन्हीं सवालों का जवाब देंगी जो जरूरी होंगे। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से यह भी पूछा कि आपने मंत्री से पूछा कि इस्तीफा कब देंगे?
प्रियंका गांधी ने सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प और नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जुबानी हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है और युवाओं की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किया जा रहा है।
संसद भवन के बाहर पत्रकारों पर भड़क उठी कांग्रेस
संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब से वह सिर्फ जरूरी सवालों के जवाब देंगी। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि “आप इस सरकार के जाल में फंसे हुए हैं और सिर्फ वही पूछना चाहते हैं जो सरकार पुछवाती है।”
प्रियंका की इस वीडियो क्लिप को कांग्रेस के एक्स हैंडल पर शेयर किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि इतना बड़ा आंदोलन हो रहा और मंत्री सदन में नहीं आ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर भी सवाल उठाया कि वह सदन में नहीं आए हैं। प्रियंका ने पत्रकारों से कहा “आप पूछ रहे हैं कि सदन क्यों नहीं चल रहा है?” प्रियंका ने आगे यह भी कहा कि क्या आपने गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों के ऊपर पर पुलिस कार्रवाई के बारे में सवाल किया है। उन्होंने कहा कि जब ये सारे सवाल सरकार से पूछे जाएंगे, तब मैं जवाब दूंगी।
देश के हालात के लिए पीएम मोदी जिम्मेदार : प्रियंका
प्रियंका गांधी ने कहा कि आज जो हालात देश में दिखाई दे रहे हैं उसके लिए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम्मेदार हैं। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या देश के लोकतांत्रिक इतिहास में कभी ऐसा देखा गया है कि सरकार के अपने सांसद संसद के बाहर प्रदर्शन करने को मजबूर हों?
कई सत्रों से संसद सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है और सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है। सरकार को कमजोर और कायर बताते हुए, उन्होंने कहा कि वह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध का सामना करने में असफल रही है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि जो युवा सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, वे आतंकवादी नहीं बल्कि देश के भविष्य हैं। प्रदर्शन के दौरान इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं, जिससे छात्र अपने परिवारों से संपर्क तक नहीं कर सके। छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जो किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
प्रधानमंत्री मोदी बच्चों की चिंता जताते हुए संदेश देते हैं, लेकिन पिछली रात उन्हीं बच्चों पर आंसू गैस छोड़ी जाती है और उन्हें पीटा जाता है। आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
पेपर लीक पर सरकार को घेरा
नीट समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक के मुद्दे पर प्रियंका गांधी ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में 152 पेपर लीक हुए, लेकिन एक भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली।
जब देश की हर उपलब्धि, चाहे वह अंतरिक्ष मिशन हो, ओलंपिक या एशियाई खेलों में सफलता, का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी लेते हैं, तो फिर युवाओं के भविष्य से जुड़े संकट और पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी भी उन्हें ही लेनी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि आज देश का युवा अपने भविष्य को लेकर निराश महसूस कर रहा है। यदि हजारों छात्र अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं, इंटरनेट बंद किया जा रहा है और उन पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो इसकी जवाबदेही प्रधानमंत्री की है। यदि प्रदर्शन के दौरान किसी भी छात्र के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी भी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर होगी।
इससे पहले बुधवार (22 जुलाई) को राहुल गांधी ने भी छात्रों के ऊपर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर इंदिरा भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान गांधी ने बीते 10 सालों में हुए पेपर लीक की बात की थी। इसके साथ ही तीन प्रमुख मांगे भी रखी थीं। इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों के ऊपर हुए हुई पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही तय करने की मांग की थी।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)



