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तरबूज नहीं बल्कि इस कारण से हुई थी परिवार के चार लोगों की मौत, फॉरेंसिक रिपोर्ट में क्या पता चला?

 मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की तरबूज खाने से मौत मामले में नया खुलासा हुआ है। एफएसएल द्वारा लिए गए नमूनों में जिंक फॉस्फाइड नामक पदार्थ पाए जाने की पुष्टि हुई है। आमतौर पर इसे चूहे मारने की दवा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

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मुंबईः महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत मामले में नया खुलासा हुआ है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में पता चला है कि परिवार के सदस्यों की मौत तरबूज खाने से नहीं बल्कि जिंक फॉस्फाइड नामक विषाक्त पदार्थ के चलते हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई नमूनों में यह हानिकारक पदार्थ पाया गया है।

कल्याण स्थित फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) ने चारों मृतकों के आंतरिक अंगों जैसे लिवर, किडनी, स्पलीन, पेट में जिंक फॉस्फाइड नामक पदार्थ पाया गया। यह पदार्थ चूहों को मारने में इस्तेमाल किया जाता है। तरबूज के नमूने में भी इस पदार्थ की उपस्थिति पाई गई। इसके अलावा अन्य खाद्य नमूनों में यह पदार्थ नहीं पाया गया।

एक ही परिवार के चार लोगों की हुई थी मौत

मारे गए लोगों में 44 वर्षीय अब्दुल्ला डोकाडिया, उनकी पत्नी नसरीन (35 वर्ष) और दो बेटियां आयेशा और जैनब (13) शामिल हैं। परिवार मुंबई के इस्माइल कुर्ते रोड पर घरी मोहल्ला में रहता था। परिवार ने 25 अप्रैल की रात को रिश्तेदारों के साथ एक पार्टी आयोजित की थी। रिश्तेदारों के जाने के बाद करीब एक बजे परिवार के लोगों ने पहले के भोजन के साथ तरबूज खाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खाने में चिकन पुलाव और अन्य सामग्री थी।

तरबूज खाने से एक ही परिवार के चार लोगों की मौत मामले में नया खुलासा

इसके कुछ ही समय बाद 26 अप्रैल की सुबह चारों को गंभीर उल्टी और दस्त की शिकायत हुई। उन्हें पहले एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और बाद में जेजे अस्पताल में रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

पुलिस, एफएसएल की टीमों ने लिए थे नमूने

घटना के बाद मुंबई पुलिस, फॉरेंसिक टीमों और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) के अधिकारियों ने घर से तरबूज, चिकन पुलाव, पानी और अन्य सामग्री के नमूने इकट्ठे कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे थे। पोस्टमार्टम और आंतरिक अंगों के नमूने संरक्षित किए गए।

इससे पहले जेजे अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी जिसमें कहा गया था कि पीड़ितों के शवों में कोई जीवाणु संक्रमण नहीं पाया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि उनके रक्त में कोई बैक्टीरिया नहीं मिला, जिससे संक्रमण को मृत्यु का कारण होने की संभावना से इनकार किया जा सकता है।

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अब आई एफएसएल रिपोर्ट के मुताबिक, नमूनों में जिंक फॉस्फाइड नामक विषाक्त पदार्थ की पुष्टि हुई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है कि तरबूज में विषाक्त पदार्थ कैसे पहुंचा? अधिकारियों ने कहा कि साजिश और आत्महत्या दोनों पहलुओं की जांच की जा रही है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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