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निठारी कांड: सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को अंतिम लंबित मामले में किया बरी, तुरंत रिहाई का दिया आदेश

निठारी कांड 2005 और 2006 के बीच हुआ था। यह मामला दिसंबर 2006 में तब सुर्खियों में आया जब नोएडा के निठारी गाँव में व्यवसायी मनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल के अवशेष बरामद हुए थे। कोली पंढेर के घर पर घरेलू सहायक के रूप में काम करता था।

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निठारी कांड, Nithari killings: Supreme Court acquits Surendra Koli

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निठारी कांड से जुड़े एक और अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली की सजा को रद्द कर दिया। यह मामला एक किशोरी के बलात्कार और हत्या से जुड़ा था, जिसके लिए कोली को पहले दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने कोली की क्युरेटिव याचिका (अंतिम कानूनी उपाय) स्वीकार करते हुए कहा कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने माना कि कोली के खिलाफ इस मामले में सजा सिर्फ एक बयान और रसोई के चाकू की बरामदगी पर आधारित थी, जबकि अन्य सभी मामलों में उन्हें पहले ही बरी किया जा चुका था।

क्या था निठारी कांड?

निठारी कांड 2005 और 2006 के बीच हुआ था। यह मामला दिसंबर 2006 में तब सुर्खियों में आया जब नोएडा के निठारी गाँव में व्यवसायी मनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे एक नाले से आठ बच्चों के कंकाल के अवशेष बरामद हुए थे। कोली पंढेर के घर पर घरेलू सहायक के रूप में काम करता था।

पंढेर के घर के आसपास खुदाई में कई अन्य बच्चों और युवा महिलाओं के कंकाल अवशेष मिले थे, जो उस क्षेत्र से लापता हो गए थे। उसी महीने पंढेर और कोली को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर बच्चों और महिलाओं के अपहरण, बलात्कार, नरभक्षण (Cannibalism) और शवों को नाले में ठिकाने लगाने का आरोप लगा था।

इस मामले में कुल 19 एफआईआर दर्ज हुईं थी। सीबीआई ने जांच के बाद कोली और पंढेर दोनों को कई मामलों में आरोपी बनाया। सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों को कई मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में कोली को 12 मामलों और पंढेर को 2 मामलों में बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा था कि सबूत पर्याप्त नहीं हैं।

परिवारों और सीबीआई ने इन बरी आदेशों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 अपीलें दाखिल कीं थी, जिन्हें जुलाई 2025 में खारिज कर दिया गया। इसके बावजूद, कोली जेल में ही रहा क्योंकि वह एक किशोरी की हत्या वाले मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए तुरंत रिहाई के आदेश

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब जबकि कोली अन्य सभी मामलों में बरी हो चुका है और इस मामले में सजा का आधार कमजोर है, इसलिए उसे दोषमुक्त किया जाता है। जस्टिस विक्रम नाथ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है। यदि किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।

वहीं, पंढेर पर निठारी कांड से जुड़े छह मामले दर्ज थे। तीन मामलों में वह ट्रायल कोर्ट से बरी हुआ था, एक में हाई कोर्ट ने राहत दी थी। वह एक मामले में अश्लील व्यापार निषेध कानून (Immoral Trafficking Act, 1956) के तहत दोषी ठहराया गया था, जिसकी सजा वह पहले ही पूरी कर चुका है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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