समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। अखिलेश यादव की ओर से भेजे गए मानहानि नोटिस पर अब निशिकांत दुबे ने कानूनी जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने जवाब की प्रति साझा करते हुए लगाए गए आरोपों को खारिज किया और अखिलेश यादव से भी कई सवाल पूछे हैं।
एक्स पर पोस्ट करते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने कानूनी नोटिस का जवाब भेज दिया है। अपने जवाब में उन्होंने ये भी पूछा कि नोटिस भेजने वाले एडवोकेट केके पाल की आखिर किस तरह की मानहानि हुई है?
उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर किस सरकारी दस्तावेज में अखिलेश यादव का नाम ‘टीपू’ दर्ज है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी उन्हें बेवजह मानसिक रूप से परेशान कर रहे हैं। दुबे ने कहा कि इस मामले में जो कानूनी खर्च उन्हें उठाना पड़ा है, उसकी भरपाई के लिए वह अखिलेश यादव के वकील से मुआवजे की मांग करेंगे।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि अयोध्या के कथित राम मंदिर दान चोरी मामले के आरोपी टिन्नू यादव की अखिलेश यादव से नियमित फोन पर बातचीत होती थी। निशिकांत दुबे ने 5 जुलाई को एक्स पर सरवना प्रसाद बालासुब्रमण्यम की एक पोस्ट साझा की। उस पोस्ट में पुलिस जांच और कथित मोबाइल कॉल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि आरोपी टिन्नू यादव की समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से नियमित बातचीत होती थी।
इस पोस्ट को साझा करते हुए निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा था, ‘क्या टिन्नू, टीपू से बात नहीं कर रहा था?’ इसी टिप्पणी के बाद दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। यहां देखिए उन पोस्ट के कुछ स्क्रीनशॉट…


अखिलेश यादव ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
निशिकांत दुबे की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने उनसे 10 मिनट के भीतर पोस्ट हटाने की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि पोस्ट नहीं हटाई गई तो भाजपा सांसद के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
अखिलेश यादव ने आरोप को पूरी तरह झूठा बताते हुए कहा था कि भाजपा समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले पीडीए गठबंधन को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में संसदीय मर्यादा और भगवान राम के आदर्शों का भी उल्लेख किया था।
इसके बाद 7 जुलाई को समाजवादी पार्टी ने केके पाल के माध्यम से निशिकांत दुबे को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस में उनसे सोशल मीडिया पोस्ट हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
नोटिस भेजे जाने के बाद प्रयागराज, इटावा समेत कई शहरों में सपा कार्यकर्ताओं ने निशिकांत दुबे के खिलाफ प्रदर्शन किया। स्थानीय पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की मांग वाले शिकायत पत्र भी सौंपे गए।
दुबे बोले- मानहानि हुई है तो अखिलेश शिकायत करें
नोटिस के जवाब में निशिकांत दुबे ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों के अनुसार यदि अखिलेश यादव को लगता है कि उनकी मानहानि हुई है तो उन्हें स्वयं पुलिस में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि कथित मानहानि अखिलेश यादव की व्यक्तिगत थी तो कानूनी नोटिस किसी अन्य पार्टी पदाधिकारी के बजाय सीधे उनके नाम से भेजा जाना चाहिए था। दुबे ने यह भी कहा कि वह नए आपराधिक कानूनों का मसौदा तैयार करने वाली समिति के सदस्य रहे हैं, इसलिए उन्हें इन कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी है।
वहीं, जब अखिलेश यादव ने कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी तो उसके जवाब में निशिकांत दुबे ने एक्स पर लिखा, ‘करिए… इतनी चिंता क्यों है? मैंने तो सिर्फ एक सवाल पूछा है। 1990 में रामभक्तों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था? मैं अदालत जाऊंगा।’
पिछले चार दिनों से दोनों नेताओं के बीच यह राजनीतिक टकराव लगातार जारी है।
सपा नेता ने BJP से मांगा सबूत
इस बीच अयोध्या से समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने एक वीडियो जारी कर भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद पर अखिलेश यादव को टिन्नू यादव से कथित फोन कॉल के जरिए जोड़कर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा नेताओं को चुनौती दी कि यदि उनके पास ऐसी किसी बातचीत का सबूत है तो उसे सार्वजनिक करें। यदि ऐसा नहीं कर सकते तो अखिलेश यादव से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। पवन पांडेय ने कहा कि राजनीति तथ्यों और सबूतों के आधार पर होनी चाहिए, न कि झूठे आरोपों पर। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भाजपा अपने दावे साबित कर देती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
कौन है टिन्नू यादव?
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव फिलहाल जेल में बंद है। वह पहले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का ड्राइर रह चुका है और अयोध्या का रहने वाला है। चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही एसआईटी के अनुसार, किसी लिखित अधिकार के बिना भी टिन्नू यादव के पास मंदिर के दानपात्र की चाबियों और सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच थी।
मीडिया में आई जानकारियों के मुताबिक एसआईटी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि टिन्नू यादव की सिफारिश पर मनीष कुमार यादव को दान गिनने की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में मनीष पर भी मंदिर दान से जुड़े चोरी के मामलों में कथित संलिप्तता सामने आई।

