काठमांडूः नेपाल ने भारत से आम के आयात पर रोक लगा दी है। नेपाल ने इसकी वजह आम में कीटनाशकों के बहुत ज्यादा अंश होने की चिंता और नेपाल की सीमा वाले इलाकों में क्वारंटीन की अपर्याप्त सुविधाएं हैं।
पश्चिम बंगाल के आम व्यापारियों ने जो पहले नेपाल को आम निर्यात करते थे बताया है कि नेपाली प्रशासन के नए नियमों के तहत फाइटो-सैनिटरी (पौधों की सुरक्षा से जुड़े) मानकों को यूरोपीय संघ के मानकों के अनुरूप होना जरूरी है।
नेपाल में भारतीय आम हो सकते हैं महंगे
इस जरूरत की वजह से भारतीय आम महंगे हो सकते हैं और नेपाल को इनका निर्यात करना आर्थिक रूप से फायदेमंद नहीं रह जाएगा। खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण नेपाल भी जापान, EU और सऊदी अरब की तरह भारतीय आम और खेती से जुड़े सामानों के आयात को रोकने वालों में शामिल हो गया है।
इस रोक के कारण खबरों से पता चलता है कि नेपाल के स्थानीय बाजार अब देश में ही उगाए गए आमों से भरे हुए हैं। आम की मांग आमतौर पर गर्मियों के मौसम में बढ़ जाती है। अधिकारियों ने बताया है कि सरकार ने कीटनाशकों की ज्यादा मात्रा और सीमावर्ती इलाकों, खासकर मधेस प्रांत में क्वारंटीन सुविधाओं की कमी के कारण आम के आयात पर रोक लगाई है।
आम एक्सपोर्टर्स ने क्या कहा?
मधेस प्रांत में भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारी मंत्रालय के सूचना अधिकारी अजय ज्ञवाली के मुताबिक भारतीय आमों पर आयात प्रतिबंधों से स्थानीय किसानों को फायदा हुआ है क्योंकि इस सीजन में उन्हें भारतीय फलों से मुकाबला नहीं करना पड़ रहा है।
पश्चिम बंगाल में हालांकि भारतीय आम एक्सपोर्टर्स का कहना है कि क्वारंटीन के नए नियमों की वजह से आम का एक्सपोर्ट महंगा और मुश्किल हो गया है। जानकार इस स्थिति को दोनों देशों के बीच बिगड़ते राजनीतिक रिश्तों का संकेत मानते हैं। हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत ने नेपाली जमीन पर कब्जा किया है। हाल के वर्षों में भारत और नेपाल के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं।
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आम की सीमित सप्लाई के कारण नेपाली बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं जिससे जल्द ही स्थानीय ग्राहकों को परेशानी हो सकती है। जनकपुरधाम में फल और सब्जी व्यापारी संघ के महासचिव भुवनेशवर पूर्बे ने सुझाव दिया कि भारत से आयात रोकने पर घरेलू बाजार में कमी हो सकती है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि आयात पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय क्वारंटीन सिस्टम को मजबूत किया जाए और उचित गुणवत्ता जांच के बाद ही भारतीय फलों को नेपाली बाजार में आने दिया जाए।

