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NEET-UG पेपर लीक: कोएम्प्ट को मिले ठेकों और सुरक्षा चूक की जांच में जुटा शिक्षा मंत्रालय, मांगी रिपोर्ट

NEET पेपर लीक मामले में अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें से नौ आरोपी महाराष्ट्र से हैं।

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File Photo
फाइल फोटो

नई दिल्लीः नीट-यूजी पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार ने जांच और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों मोर्चों पर कदम तेज कर दिए हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी कंपनी कोएम्प्ट (Compt) को दिए गए अनुबंधों, उसकी तकनीकी क्षमता और कथित सुरक्षा खामियों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। गौरतलब है कि कोएम्प्ट वही कंपनी है जिसे सीबीएसई ने ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए ठेका दिया था, जिसपर विवाद हो रहा है।

सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने कोएम्प्ट को दिए गए विवादास्पद परिचालन अनुबंधों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच एजेंसियां कंपनी की तकनीकी योग्यता, पूर्व रिकॉर्ड और परीक्षा संचालन में उसकी भूमिका की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं। मंत्रालय यह समझने की कोशिश कर रहा है कि परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां कंपनी को किन आधारों पर सौंपी गई थीं।

सुरक्षा चूक की पूरी शृंखला की जांच

समाचा एजेंसी आईएएनएस के अनुसार, मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्रों ने कहा है कि सरकार कथित डेटा उल्लंघन और पेपर लीक की घटनाओं को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही, मिलीभगत या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या बाहरी प्रतिनिधि के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार साइबर सुरक्षा एजेंसियों, परीक्षा बोर्ड और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय कर कथित सुरक्षा चूक की पूरी शृंखला की जांच कर रही है। इसके साथ ही परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति भी गठित की गई है। समिति डिजिटल ढांचे को मजबूत करने, परीक्षा केंद्रों पर सख्त बायोमेट्रिक सत्यापन लागू करने और प्रश्नपत्रों के सुरक्षित ट्रांसमिशन के लिए उन्नत एन्क्रिप्शन प्रणाली विकसित करने पर काम कर रही है।

सरकार पहले ही कई सुरक्षा उपाय लागू कर चुकी है। इनमें परीक्षा प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए भारतीय वायु सेना के विमानों का उपयोग भी शामिल है। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा प्रबंधन प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे और भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी।

सीबीआई ने पिछले दिनों महाराष्ट्र से दो और लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें महाराष्ट्र के लातूर निवासी डॉक्टर मनोज शिरूरे और पुणे के एक कोचिंग संस्थान में भौतिकी पढ़ाने वाले शिक्षक तेजस हर्षदकुमार शाह शामिल थे।

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने आरोपी डॉक्टर मनोज शिरूरे, तेजस हर्षद कुमार शाह और मनीषा संजय हवलदार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। सीबीआई ने तीनों आरोपियों की कस्टडी अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें अदालत में पेश किया था और न्यायिक हिरासत की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले में अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जिनमें से नौ आरोपी महाराष्ट्र से हैं।

कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में परीक्षा पर जुलाई में सुनवाई

इस बीच, राजद के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 21 जून को प्रस्तावित नीट-यूजी परीक्षा को सीबीटी मोड में कराने की मांग पर तत्काल कोई आदेश देने से इनकार कर दिया। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि इस मामले को पेपर लीक से संबंधित पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जुलाई में सुना जाएगा।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनकी मुख्य मांग केवल दोबारा परीक्षा को सीबीटी मोड में कराने की है। हालांकि अदालत ने इस पर तत्काल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए मामले को बाद के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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