जयपुर: सीबीआई ने बुधवार को NEET-UG 2026 परीक्षा पेपर लीक केस में जयपुर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच का जिम्मा संभालने के लिए एजेंसी के जयपुर पहुंचने के 24 घंटे के भीतर ही यह कार्रवाई हुई। NEET पेपर लीक केस में एक ही परिवार से पकड़े गए आरोपियों की पहचान दिनेश बिवाल, उनके भाई मंगिलाल बिवाल और मंगिलाल के बेटे विकास बिवाल के रूप में हुई है। ये सभी जयपुर जिले के जामवा-रामगढ़ के निवासी हैं। इनके अलावा, गिरफ्तार किए गए लोगों में गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार भी शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार एजेंसी ने गिरफ्तारी के बाद बुधवार को दिनेश, मंगिलाल, विकास और यश को जयपुर के एक अदालत में पेश किया। इसके बाद उन्हें ले जाया गया। विकास ने पिछले साल भी NEET परीक्षा दी थी, लेकिन वह क्वालीफाई नहीं कर सका था। इस साल भी उसके पास होने की संभावना कम ही लग रही थी। ये गिरफ्तारियां राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) से सीबीआई द्वारा औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में लेने के 24 घंटे से भी कम समय के भीतर हुईं हैं। SOG ने ही 3 मई की परीक्षा से पहले संदिग्ध ‘गेस पेपर’ का पता लगाया था, जिसके बाद पेपर लीक की कहानी सामने आई।
जयपुर के परिवार पर क्यों जांच एजेंसी की नजर?
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जांचकर्ता बिवाल परिवार पर फोकस कर रहे हैं। दरअसल, परिवार के चार बच्चों ने पहले 2025 में NEET परीक्षा पास की थी और फिलहाल अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि दिनेश बिवाल का बेटा कथित तौर पर सीकर में NEET-UG 2026 की तैयारी कर रहा था।
अधिकारियों को संदेह है कि दिनेश 29 अप्रैल के आसपास सीकर गया था ताकि प्रश्नपत्र का सेट अपने नाबालिग बेटे को सौंप सकें। जांचकर्ताओं का मानना है कि दिनेश ने 26 और 27 अप्रैल के बीच यश से यह प्रश्नपत्र हासिल किया और फिर कथित तौर पर इसे आगे बढ़ाया।
एक अधिकारी ने बताया, ‘ऐसा लगता है कि दिनेश ने इसे लगभग 10 लोगों के साथ साझा किया था।’ सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ता इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या दिनेश के बेटे ने भी अपने कोचिंग संस्थान में दोस्तों के बीच इस पेपर को साझा किया।
पहले ही मिली थी सूचना, फिर क्यों नहीं ठोस कार्रवाई
इस जांच से राजस्थान के अधिकारियों के सामने यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या शुरुआती चेतावनियों पर समय रहते कार्रवाई की गई। सूत्रों के अनुसार सीकर के एक कोचिंग संस्थान के एक शिक्षक ने अधिकारियों को सतर्क किया था। शिक्षक ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में व्यापक रूप से प्रसारित हो रहे एक ‘गेस पेपर’ में बड़ी संख्या में प्रश्न असल NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाने के बाद सूचना दी थी।
सूचना देने वाले ने शिक्षक ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को ईमेल किया था, जिसके बाद यह जानकारी 8 मई को जयपुर स्थित SOG मुख्यालय पहुंची। SOG की टीमें उसी दिन सीकर पहुंचीं और चुपचाप छात्रों और अन्य संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी गई थी।
प्रारंभिक जांच के दौरान, जांचकर्ताओं को राकेश मंडावरिया का नाम भी पता चला, जो कथित तौर पर आरके कंसल्टेंसी नाम से एक MBBS कंसल्टेंसी फर्म चलाता हैं और अब जांच के दायरे में है। मंडावरिया को 8 मई को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था। SOG ने एक्शन शुरू कर दिया था लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि मामले के पब्लिक में चर्चा में आने से पहले आखिर FIR दर्ज क्यों नहीं की गई।



