हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में कई महान गायकों ने अपनी आवाज से करोड़ों दिलों पर राज किया, लेकिन मुकेश की आवाज की बात ही अलग थी। उनकी आवाज में एक ऐसी सादगी, उदासी और अपनापन था, जो सीधे सुनने वाले के दिल तक पहुंचता था। वह सिर्फ गीत नहीं गाते थे, बल्कि शब्दों में छिपे दर्द और भावनाओं को अपनी आवाज दे देते थे। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनके गाए गीत लोगों की जुबान पर हैं।
आज यानी 22 जुलाई को महान पार्श्व गायक मुकेश चंद माथुर की जयंती है। 22 जुलाई 1923 को दिल्ली में जन्मे मुकेश ने हिंदी फिल्म संगीत में अपनी ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी भुलाया नहीं जा सका है। उन्हें ‘द मैन विद द गोल्डन वॉयस’ के नाम से भी याद किया जाता है। करीब 35 वर्षों के अपने गायन करियर में उन्होंने हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। हालांकि इन हजारों गीतों में कुछ ऐसे भी थे जो उनके दिल के करीब थे।
एक बार एक पत्रकार ने जब मुकेश से उनके गाए गीतों में से उनके पसंदीदा 10 गीत बताने को कहा, तो उन्होंने पहले कहा कि बिना सोचे-समझे किसी भी 10 गीतों का नाम लेना मुश्किल है। लेकिन काफी आग्रह के बाद उन्होंने जिन गीतों का जिक्र किया, उनमें से कई आज हिंदी फिल्म संगीत की अमर धरोहर हैं। आइए, मुकेश की बताई उन 10 पसंदीदा गीतों को जानते हैं।
1. ‘जिंदगी ख्वाब है’
फिल्म: जागते रहो
वर्ष: 1956
पर्दे पर: मोतीलाल
संगीत: सलिल चौधरी
गीतकार: शैलेंद्र
गायक: मुकेश
मुकेश की पसंद में शामिल यह गीत जिंदगी के फलसफे को बेहद सरल शब्दों में सामने रखता है। ‘जिंदगी ख्वाब है, ख्वाब में झूठ क्या और सच क्या’ जैसे भाव वाला यह गीत इंसान को जीवन की सच्चाई और उसकी अस्थिरता पर सोचने के लिए मजबूर करता है।
राज कपूर और नरगिस की चर्चित फिल्म ‘जागते रहो’ से अलग, इस गीत में मोतीलाल के किरदार के जरिए जिंदगी और समाज की विडंबनाओं को सामने रखा गया। मुकेश की आवाज में इस गीत का दार्शनिक भाव और गहरा हो जाता है।
2. ‘सजन रे झूठ मत बोलो’
फिल्म: तीसरी कसम
वर्ष: 1966
पर्दे पर: राज कपूर
संगीत: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र
गायक: मुकेश
यह गीत मुकेश की उस गायकी का उदाहरण है, जिसमें संगीत के साथ जीवन का दर्शन भी जुड़ जाता है। ‘सजन रे झूठ मत बोलो’ इंसान को उसकी असलियत और कर्मों की याद दिलाता है। गीत का संदेश है कि दुनिया में चाहे जितनी चालाकी कर लो, आखिरकार इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना पड़ता है।
फिल्म ‘तीसरी कसम’ में यह गीत राज कपूर पर फिल्माया गया था। राज कपूर के किरदार हीरामन की सरलता और मासूमियत को मुकेश की आवाज ने एक अलग पहचान दी। गीतकार शैलेंद्र की संवेदनशील रचना और मुकेश की सहज गायकी ने इसे सदाबहार बना दिया।
3. ‘ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना’
फिल्म: बंदिनी
वर्ष: 1963
पर्दे पर: नूतन
संगीत: एस.डी. बर्मन
गीतकार: शैलेंद्र
गायक: मुकेश
जुदाई और बिछड़ने की पीड़ा को आवाज देने वाला यह गीत मुकेश की पसंद में शामिल था। गीत के बोल किसी अपने से दूर होने के दर्द और उसके वापस लौटने की उम्मीद को सामने रखते हैं।
बिमल रॉय की फिल्म ‘बंदिनी’ में यह गीत नूतन पर फिल्माया गया है। गीत में जिस तरह से किसी के लौटकर आने की उम्मीद व्यक्त की गई है, वह इसे महज फिल्मी गीत नहीं रहने देती। मुकेश की आवाज में इसका दर्द आज भी उतना ही प्रभावशाली लगता है।
4. ‘जीना यहां मरना यहां’
फिल्म: मेरा नाम जोकर
वर्ष: 1970
पर्दे पर: राज कपूर
संगीत: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र
गायक: मुकेश
मुकेश और राज कपूर की जोड़ी का यह गीत हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक गीतों में शामिल है। ‘जीना यहां, मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां’ जिंदगी और कलाकार के सफर की कहानी कहता है।
फिल्म में राज कपूर के किरदार राजू के जीवन और उसके कलाकार होने की पीड़ा इस गीत में दिखाई देती है। यह गीत एक ऐसे कलाकार की कहानी बन जाता है, जो अपनी निजी परेशानियों और दुखों को पीछे छोड़कर दर्शकों के सामने मुस्कुराता रहता है।
मुकेश की आवाज में गीत की उदासी और गहराई इसे खास बनाती है। यह उन गीतों में है, जिनमें मुकेश की आवाज और राज कपूर की अदाकारी एक-दूसरे का पर्याय लगती हैं।
5. ‘जिंदा हूं इस तरह कि गम-ए-जिंदगी नहीं’
फिल्म: आग
वर्ष: 1948
गायक: मुकेश
संगीत: राम गांगुली
गीतकार: बहजाद लखनवी
पर्दे पर: राज कपूर
यह मुकेश के शुरुआती दौर के सबसे दर्द भरे गीतों में से एक है। गीत की पंक्ति ‘जलता हुआ दीया हूं मगर रोशनी नहीं’ उनकी गायकी में मौजूद उस गहरी पीड़ा को सामने लाती है, जिसके लिए वह आगे चलकर मशहूर हुए। यह गीत राज कपूर और मुकेश की जोड़ी की शुरुआत से भी खास तौर पर जुड़ा हुआ है।
6. ‘आवारा हूं’
फिल्म: आवारा
वर्ष: 1951
पर्दे पर: राज कपूर
संगीत: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र
गायक: मुकेश
मुकेश की आवाज को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाले गीतों में ‘आवारा हूं’ सबसे आगे है। राज कपूर की फिल्म ‘आवारा’ के इस गीत ने भारत की सीमाओं को पार कर सोवियत संघ, चीन और दूसरे देशों में भी जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की।
राज कपूर के ‘राजू’ किरदार पर फिल्माया गया यह गीत एक ऐसे इंसान की कहानी कहता है, जो खुद को समाज के तय दायरों से बाहर पाता है। गीत में एक तरह की बेफिक्री है, लेकिन उसके पीछे संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों का दर्द भी छिपा है।
मुकेश की आवाज और राज कपूर की अदाकारी ने इस गीत को अमर बना दिया। खास बात यह है कि विदेशों में भी भाषा की बाधा के बावजूद लोग इस गीत से जुड़ गए।
7. ‘दोस्त दोस्त न रहा’
फिल्म: संगम
वर्ष: 1964
पर्दे पर: राज कपूर, राजेंद्र कुमार और वैजयंती माला
संगीत: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र
गायक: मुकेश
दोस्ती में आई दरार और रिश्तों के टूटने की पीड़ा को ‘दोस्त दोस्त न रहा’ बेहद भावुक अंदाज में सामने रखता है। यह गीत प्रेम, दोस्ती और विश्वास के बीच पैदा हुए संघर्ष की कहानी को बयां करता है।
राज कपूर पर फिल्माया गया यह गीत ‘संगम’ की कहानी के भावनात्मक संघर्ष को भी सामने लाता है। मुकेश की आवाज में गाया गया यह गीत आज भी उन लोगों को अपना लगता है, जिन्होंने किसी रिश्ते में विश्वास टूटने का दर्द महसूस किया है।
यह गीत 1964 में रिलीज हुआ और आज भी मुकेश के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है। यहां क्लिक कर गीत सुन सकते हैं।
8. ‘सुहाना सफर और ये मौसम हसीं’
फिल्म: मधुमती
वर्ष: 1958
पर्दे पर: दिलीप कुमार, वैजयंती माला
संगीत: सलिल चौधरी
गीतकार: शैलेंद्र
गायक: मुकेश
मुकेश की पसंद में शामिल यह गीत उनके गायन का एक बिल्कुल अलग रंग दिखाता है। आमतौर पर मुकेश की पहचान दर्द भरे गीतों से जुड़ी है, लेकिन ‘सुहाना सफर और ये मौसम हसीं’ में उनकी आवाज जिंदगी की खूबसूरती और प्रकृति के आनंद को व्यक्त करती है।
बिमल रॉय की ‘मधुमती’ में यह गीत दिलीप कुमार-वैजयंती माला पर फिल्माया गया है। पहाड़ों, हरियाली और खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के बीच फिल्माया गया यह गीत आज भी सफर और खुशनुमा मौसम का पर्याय माना जाता है।
गीतकार शैलेंद्र के सरल शब्द और सलिल चौधरी का संगीत, मुकेश की आवाज के साथ मिलकर ऐसा असर पैदा करते हैं कि गीत सुनते ही श्रोता खुद को किसी खूबसूरत सफर का हिस्सा महसूस करने लगता है।
9. ‘तू कहे अगर’
फिल्म: अंदाज
वर्ष: 1949
पर्दे पर: दिलीप कुमार, नरगिस
संगीत: नौशाद
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
गायक: मुकेश
मुकेश की शुरुआती लोकप्रिय प्रस्तुतियों में शामिल ‘तू कहे अगर’ उनकी गायकी के रोमांटिक पक्ष को सामने लाता है। यह गीत उस दौर की प्रेम अभिव्यक्ति का खूबसूरत उदाहरण है, जब गीतों में भावनाओं को बहुत सहज और शालीन तरीके से व्यक्त किया जाता था।
फिल्म ‘अंदाज’ में यह गीत दिलीप और नरगिस पर फिल्माया गया था। मुकेश की आवाज में प्रेम की मासूमियत और समर्पण का भाव इस गीत को खास बनाता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि इसी दौर में मुकेश और राज कपूर की वह संगीत यात्रा मजबूत हुई, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार अभिनेता-गायक जोड़ियों में बदल गई।
10. ‘कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे’
फिल्म: पूरब और पश्चिम
वर्ष: 1970
पर्दे पर: मनोज कुमार, सायरा बानो
संगीत: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: संतोष आनंद
गायक: मुकेश
मुकेश की इस सूची का आखिरी गीत भी उनके पसंदीदा भाव यानी दर्द और टूटे हुए दिल की कहानी से जुड़ा है। ‘कोई जब तुम्हारा हृदय तोड़ दे’ में दर्द है, लेकिन उसके साथ एक सहारा भी है। गीत किसी टूटे हुए इंसान से कहता है कि अगर कोई तुम्हारा दिल तोड़ दे, तो निराश मत होना।
फिल्म ‘पूरब और पश्चिम’ में यह गीत मनोज कुमार और सायरा बानों पर फिल्माया गया था। मुकेश की आवाज ने इसके भाव को बेहद आत्मीय बना दिया। यह गीत उन लोगों के लिए खास बन गया, जिन्होंने प्रेम में असफलता या रिश्ते के टूटने का दर्द महसूस किया है। यहां सुने गाना


![Sajan Re Jhoot Mat Bolo - Mukesh - Teesri Kasam [1966]](https://i.ytimg.com/vi/T7ykQuIR6VY/hqdefault.jpg)






