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सिनेमा के आईने में डॉ. आम्बेडकर: वे फिल्में जिन्होंने उनके सामाजिक संघर्ष को दुनिया तक पहुंचाया

14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे बाबासाहब महज एक राजनेता या कानून के जानकार नहीं थे, वे उस भरोसे का नाम थे जिसने करोड़ों वंचितों को पहली बार सिर उठाकर जीना सिखाया। उनके जीवन का संघर्ष इतना विशाल और प्रेरणादायी है कि साहित्य से लेकर सिनेमा तक, हर माध्यम ने इसे अपने ढंग से समेटने की कोशिश की है।

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आम्बेडकर के जीवन पर आधारित फिल्में।

आज पूरा देश भारतीय संविधान के शिल्पकार और सामाजिक न्याय के सबसे बड़े पैरोकार, भारत रत्न डॉ. बीआर आम्बेडकर की जयंती मना रहा है। 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे बाबासाहब महज एक राजनेता या कानून के जानकार नहीं थे, वे उस भरोसे का नाम थे जिसने करोड़ों वंचितों को पहली बार सिर उठाकर जीना सिखाया। एक ऐसे दौर में जब जाति के नाम पर इंसान का साया तक वर्जित था, बाबासाहब ने उस व्यवस्था को चुनौती दी। इसके लिए उन्होंने शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ढाल बनाया। कोलंबिया यूनिवर्सिटी से लेकर लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स तक का उनका सफर किसी करिश्मे से कम नहीं था। उनके जीवन का संघर्ष इतना विशाल और प्रेरणादायी है कि साहित्य से लेकर सिनेमा तक, हर माध्यम ने इसे अपने ढंग से समेटने की कोशिश की है।

भीम गर्जना (1989): बाबासाहब के जीवन के सिनेमा में उतारने की शुरुआत साल 1989 में ‘भीम गर्जना’ के साथ हुई। ‘भीम गर्जना’ यानी ‘भीम की दहाड़’। मराठी भाषा में बनी इस फिल्म का निर्देशन विजय पवार ने किया था। फिल्म में अभिनेता कृष्णानंद ने बाबासाहेब की भूमिका को बहुत ही संजीदगी से निभाया। जबकि अभिनेत्री प्रथम देवी ने रमाबाई आंबेडकर की भूमिका निभाई। आज भी इसे एक ‘क्लासिक’ माना जाता है।

चित्रपट - भीम गर्जना - Bhim Garjana - 1990 l Marathi Classic Movie l Krishnanand , Prathama Devi

बालक आम्बेडकर (1991): मराठी सिनेमा में शुरू हुई इस लहर का असर जल्द ही पड़ोसी राज्यों में भी दिखने लगा। इसी क्रम में साल 1991 में कन्नड़ भाषा में ‘बालक आम्बेडकर’ रिलीज हुई। इसका निर्देशन बसवराज केस्तूर ने किया था। यह फिल्म पूरी तरह से डॉ. आम्बेडकर के बचपन और उनके शुरुआती संघर्षों पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक बालक ने स्कूल में भेदभाव सहने के बावजूद अपनी शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया। बाल कलाकार चिरंजीवी विनय ने इसमें भीमराव की भूमिका निभाई थी।

“Balak Ambekar”  is a Hindi Film (HD) based on real Childhood life Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar

डॉ. आम्बेडकर (1992): तेलुगु भाषा में बनी यह फिल्म भारत पारेपल्ली द्वारा निर्देशित है। इसमें प्रसिद्ध अभिनेता आकाश खुराना ने मुख्य भूमिका निभाई, जबकि नीना गुप्ता ने रमाबाई आम्बेडकर का किरदार निभाया। इस फिल्म की खासियत इसकी तेज रफ्तार शूटिंग थी (मात्र 28 दिन), जिसमें महान गायक एस.पी. बाल सुब्रमण्यम ने अपनी आवाज दी थी।

युगपुरुष डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर (1993): मराठी सिनेमा की यह दूसरी बड़ी फिल्म थी। शशिकांत नलावडे के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नारायण दुलाके ने बाबासाहेब का किरदार निभाया। यह फिल्म विशेष रूप से अपने क्रांतिकारी गीतों जैसे ‘खरा तो एकची धर्म’ के लिए आज भी आम्बेडकरवादी जलसों में बहुत चाव से देखी और सुनी जाती है।

युगपुरुष डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर Marathi Movie | Jai Bhim | YUGPURUSH BABASAHEB AMBEDKAR

डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर: द अनटोल्ड ट्रुथ (2000): इसे बाबासाहेब पर बनी अब तक की सबसे प्रामाणिक और भव्य फिल्म माना जाता है। डॉ. जब्बार पटेल के निर्देशन में बनी इस अंग्रेजी फिल्म (बाद में हिंदी-मराठी सहित कई भाषाओं में डब) में दक्षिण भारतीय सुपरस्टार मामूट्टी ने अभिनय किया था। इस फिल्म ने तीन राष्ट्रीय पुरस्कार- ‘अंग्रेजी में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म’, ‘सर्वश्रेष्ठ अभिनेता’ (मामूट्टी), ‘सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन’ (नितिन देसाई) जीते। 10 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म की पटकथा को ऐतिहासिक तथ्यों के साथ बेहद बारीकी से तैयार किया गया था।

Dr Babasaheb Ambedkar (2000) 4K Full Movie (Hindi)

डॉ. बीआर आम्बेडकर (2005): कन्नड़ भाषा की इस फिल्म का निर्देशन शरण कुमार कब्बूर ने किया। अभिनेता विष्णुकांत बीजे ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई। इस फिल्म को कर्नाटक राज्य फिल्म पुरस्कारों में विशेष सम्मान मिला।

यह फिल्म बाबासाहेब की दोनों पत्नियों, माता रमाबाई और डॉ. सविता आम्बेडकर के साथ उनके संबंधों और उनके सामाजिक मिशन को खूबसूरती से दिखाती है। फिल्म में रमाबाई के किरदार में अभिनेत्री तारा तो सविता आम्बेडकर के रोल में भव्या नजर आईं। फिल्म में कई गाने थे जिनमें आवाज नंदिता, अभिमान, शंकर शानबाग और गुरुमूर्ति की थी। फिल्म में संगीत अभिमान रॉय का था।

पेरियार (2007): मूल रूप से समाज सुधारक पेरियार ई.वी. रामासामी के जीवन पर आधारित इस तमिल फिल्म में बाबासाहेब आम्बेडकर का किरदार बेहद महत्वपूर्ण रहा। अभिनेता मोहन रामन ने डॉ. आम्बेडकर की भूमिका निभाई, जबकि ‘कटप्पा’ फेम सत्यराज पेरियार बने थे। यह फिल्म उत्तर और दक्षिण भारत के दो महान विचारकों के वैचारिक मिलन की दिखाती है।

गौरतलब है कि पेरियार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से बहुत प्रभावित थे। दोनों कई बार मिले भी थे। पेरियार ने एक बार अपने अनुयायियों से कहा था कि अगर मैं इस दुनिया में नहीं रहूं, तब आपको किसी को अपना ‘पिता’ मानना चाहिए तो वह है केवल डॉ. बाबासाहब आंबेडकर।

रमाबाई भीमराव आम्बेडकर (2010): यह फिल्म पूरी तरह से बाबासाहेब की पहली पत्नी माता रमाबाई (रमाई) के जीवन और उनके बलिदान को दिखाती है। प्रकाश जाधव के निर्देशन में बनी इस मराठी फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे रमाबाई ने गरीबी और अभावों के बीच रहकर भी बाबासाहेब को उनके लक्ष्य से भटकने नहीं दिया।

डेबू (2010): 2010 में ही बाबासाहब पर एक और फिल्म आई थी। यह मराठी फिल्म थी जिसका नाम था- डेबू। नीलेश जलमकर के निर्देशन में बनी यह फिल्म महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत गाडगे बाबा के जीवन पर आधारित है। हालांकि इसमें डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के व्यक्तित्व को भी दिखाया गया है। गाडगे बाबा डॉ. बाबासाहब आंबेडकर बहुत प्रभावीत थे, तथा दोनों कई बार मिल चुके हैं। फिल्म में गाडगे बाबा की भूमिका अभिनेता मोहन जोशी ने निभाई थी।

शूद्र: द राइजिंग (2012): संजीव जायसवाल निर्देशित यह हिंदी फिल्म सीधे तौर पर बायोपिक नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह से बाबासाहेब को समर्पित है। यह फिल्म प्राचीन काल के उन सामाजिक बंधनों और जुल्मों को दिखाती है, जिनसे मुक्ति दिलाने के लिए बाबासाहेब ने जीवन भर संघर्ष किया। फिल्म का गीत ‘जय जय भीम’ युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ।

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रमाबाई (2016): एम. रंगनाथ के निर्देशन में बनी यह कन्नड़ फिल्म माता रमाबाई आंबेडकर के जीवन पर आधारित दूसरी बड़ी फिल्म थी। फिल्म में बाबासाहब की भूमिका डॉ. सिद्धराम करणिक ने निभाई, जबकि यागना शेट्टी ने रमाबाई के किरदार को जीवंत किया था। फिल्म में ऑडिटर श्रीनिवास, बैंक जनार्दन और सुमति श्री जैसे कलाकारों ने भी अभिनय किया है। के. कल्याण के संगीत से सजी यह फिल्म 14 अप्रैल 2016 को डॉ. आंबेडकर की 125वीं जयंती के खास अवसर पर पर्दे पर उतरी थी।

बोले इंडिया जय भीम (2016): सुबोध नागदेवे द्वारा निर्देशित यह मराठी फिल्म समाज सुधारक एलएन हरदास के संघर्षमय जीवन को दर्शाती है, जिन्होंने ‘जय भीम’ के प्रसिद्ध अभिवादन की शुरुआत की थी। फिल्म में अमोल चिव्हने ने हरदास की मुख्य भूमिका निभाई है, वहीं श्याम भीमसरिया बाबासाहब के किरदार में नजर आए। जितेंद्र खुशालदास दोशी और धनंजय गलानी द्वारा निर्मित इस फिल्म में जावेद अली और बेला शेंडे की आवाज में सुरीले गीत सुनने को मिलते हैं। यह फिल्म 7 अक्टूबर 2016 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।

शरणं गच्छामि (2017): तेलुगु सिनेमा की यह फिल्म भारतीय संविधान और बाबासाहब के क्रांतिकारी विचारों को केंद्र में रखती है। निर्देशक प्रेम राज ने फिल्म के एक विशेष गीत ‘आंबेडकर सरणं गच्छामि’ के जरिए बाबासाहब के व्यक्तित्व को पर्दे पर उकेरा है। नवीन संजय और तनिष्का तिवारी अभिनीत यह फिल्म मुख्य रूप से तेलुगु और तमिल भाषा में उपलब्ध है, जो संवैधानिक मूल्यों की वकालत करती है।

बाल भीमराव (2018): बीआर आंबेडकर के बचपन के संघर्षों को दिखाती यह दूसरी मराठी फिल्म है, जिसका निर्देशन प्रकाश नारायण जाधव ने किया। बाल कलाकार मनीष कांबले ने नन्हे भीमराव की भूमिका को बखूबी निभाया। फिल्म की स्टारकास्ट में मोहन जोशी और विक्रम गोखले जैसे दिग्गज अभिनेता शामिल हैं। फिल्म के गीतों को शंकर महादेवन और सुरेश वाडकर जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी है। यह फिल्म 9 मार्च 2018 को रिलीज हुई थी।

रमाई (2019) : बाल बरगाले निर्देशित यह मराठी फिल्म माता रमाबाई आंबेडकर को समर्पित तीसरी फिल्म है। फिल्म में वीणा जामकर ने ‘रमाई’ (माता रमा) की मुख्य भूमिका निभाई, जबकि सागर तलाशीकर डॉ. बाबासाहब के किरदार में दिखे। आनंद शिंदे और साधना सरगम जैसे गायकों के गीतों से सजी यह फिल्म 12 अप्रैल 2019 को बाबासाहब की 128वीं जयंती के मौके पररिलीज हुई थी। यह फिल्म दिखाती है जिस तरह जनता डॉ. आंबेडकर को आदर से ‘बाबासाहब’ कहती है, उसी तरह रमाबाई को ‘रमाई’ यानी मां का दर्जा दिया गया है।

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ऑरिजिन (2023): तीन साल पहले आई इस पहली हॉलीवुड फिल्म ने डॉ. आम्बेडकर के वैश्विक प्रभाव को बेहतर तरीके से पर्दे पर उतारा। अमेरिकी निर्देशिका एवा डुवर्ने की यह फिल्म इसाबेल विल्कर्सन की किताब पर आधारित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे आम्बेडकर के विचार वैश्विक नस्लवाद और जातिवाद को समझने के लिए जरूरी हैं। इसमें प्रोफेसर गौरव जे. पठानिया ने डॉ. आम्बेडकर का किरदार निभाया है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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