तेहरान: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने गुरुवार (18 जून) को पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म करने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते का स्वागत किया। हालांकि उन्होंने माना कि उन्हें इस समझौते को लेकर कुछ आपत्तियां थीं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियां द्वारा हस्ताक्षरित इस समझौते के बाद 60 दिनों की एक अवधि शुरू हो गई है। इस दौरान दोनों देशों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम सहित व्यापक मुद्दों पर चर्चा करने की उम्मीद है।
US-Iran समझौते पर मोजतबा खामेनेई ने क्या कहा?
मोजतबा खामेनेई ने एक लिखित बयान में कहा कि इस मामले पर “अलग राय” होने के बावजूद उन्होंने समझौते को मंजूरी दी है।
ईरान की जनता को संबोधित करते हुए खामेनेई ने कहा कि इस समझौते को तब मंजूरी दी गई जब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियां के नेतृत्व में ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि देश के अधिकारों और हितों की रक्षा की जाएगी।
खामेनेई ने कहा कि “जैसा कि आपको बताया गया है ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी अधिकारियों ने इस समझौते तक पहुंचने के लिए “काफी कोशिशें” की थीं।
मोजतबा ने इस दौरान वाशिंगटन पर भी निशाना साधा और दावा किया कि “अमेरिकी राष्ट्रपति ने ही हताशा में आकर इसे अंजाम देने के लिए हर तरह के दबाव का इस्तेमाल किया।”
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अपने फैसले के बारे में बताते हुए खामेनेई ने कहा “सिद्धांत के तौर पर मेरी राय अलग थी लेकिन सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख के तौर पर सम्मानित राष्ट्रपति ने ईरानी राष्ट्र और रेजिस्टेंस फ्रंट के अधिकारों की रक्षा के बारे में अपनी और दूसरे सदस्यों की तरफ से जो वादा किया था और उस जिम्मेदारी को साफ तौर पर स्वीकार किया था। उसे देखते हुए मैंने अपनी मंजूरी दे दी।”
उन्होंने आगे कहा कि ईरानी अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे अमेरिका की किसी भी अतिरिक्त मांग को नहीं मानेंगे। खामेनेई ने कहा कि “उन्होंने (ईरानी राष्ट्रपति ने) यह भी साफ तौर पर कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष हद से ज्यादा मांगें करता है तो वे उन्हें नहीं मानेंगे।”
उन्होंने आगे कहा ” हालांकि यह बात साफ है कि भविष्य में होने वाली आमने-सामने की बातचीत का मतलब दुश्मन के रुख को स्वीकार करना नहीं होगा। ” ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी कहा कि ” यह बात साफ है कि भविष्य में होने वाली आमने-सामने की बातचीत का मतलब दुश्मन के रुख को स्वीकार करना नहीं होगा। “
स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक को लेकर बनी है अनिश्चितता
ईरान-अमेरिका समझौते पर हालांकि हस्ताक्षर हो चुके हैं लेकिन कूटनीति के अगले चरण को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पहले की घोषणाओं से संकेत मिला था कि दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार (19 जून) को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर समारोह और बातचीत के लिए मिलेंगे। हालांकि किसी भी पक्ष ने इन योजनाओं की पक्की पुष्टि नहीं की है।
समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे ईरान के साथ “तकनीकी बातचीत” के लिए “इस वीकेंड” स्विट्जरलैंड जाएंगे न कि शुक्रवार को। उन्होंने हालांकि यह भी कहा कि योजनाओं में अभी भी बदलाव हो सकता है।
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ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के बारे में “अभी तक कुछ भी कन्फर्म नहीं हुआ है।”
गौरतलब है कि 1979 में ईरान में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं रहे हैं इसलिए कोई भी सीधी बातचीत बहुत अहम हो जाती है।

