Commonwealth Games: वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीता। 31 साल की चानू महिलाओं की 48 किलोग्राम कैटेगरी में जीत की प्रबल दावेदार थीं।
उन्होंने साबित कर दिया कि वे इस खेल की बेहतरीन वेटलिफ्टर्स में से एक क्यों हैं। चानू को यह जीत उसी दिन मिली जब इससे पहले दिन में ऋषिकंत सिंह ने देश के लिए सिल्वर मेडल जीता। चानू की इस जीत के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स के 23वें एडिशन में भारत के नाम अब तीन मेडल हो गए हैं।
मीराबाई चानू ने रचा इतिहास, कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार जीता गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टिंग भारत का पक्ष मजबूत होने की उम्मीद थी और वेटलिफ्टर्स इसमें खरे भी उतरते दिखाई दे रहे हैं। इस कैटेगरी में भारत ने दो मेडल अपने नाम कर लिए हैं। वहीं, इस कैटेगरी में भारत के पास एक और मेडल जीतने का मौका आज होगा जब एम राजा 65 किलोग्राम पुरुष श्रेणी में हिस्सा लेंगे।
यह लगातार तीसरी बार है जब कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू ने गोल्ड मेडल जीता है। इससे पहले 2022 में बर्मिंघम और 2018 में क्वीन्सलैंड (ऑस्ट्रेलिया) में हुए कॉमनवेल्थ में भी उन्होंने गोल्ड जीतकर भारत का नाम रोशन किया था। गौरतलब है कि मीराबाई चानू ने पहला मेडल भी ग्लासगो में ही जीता था। इस दौरान उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। ऐसे में कॉमनवेल्थ गेम्स में उनके नाम कुल 4 मेडल हो गए हैं।
महिलाओं के 48kg इवेंट की बात करें तो, चानू ने स्नैच कैटेगरी में शुरुआत में 82 किलो वजन उठाने की कोशिश की। हालांकि वह ऐसा नहीं कर पाईं। लेकिन दूसरी कोशिश में उन्हें कामयाबी मिली। तीसरी कोशिश में उन्होंने 85kg वजन सफलतापूर्वक उठाया और कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनाया। वेटलिफ्टिंग के दौरान, ‘स्नैच’ उन दो आधिकारिक लिफ्ट कैटेगरी में से एक हैजिसमें एथलीट एक ही बार में लगातार गति से बारबेल को जमीन से उठाकर सिर के ऊपर ले जाते हैं।
गोल्ड मेडल पक्का करने के लिए चानू को ‘क्लीन एंड जर्क’ राउंड में सिर्फ एक बार 105 किलोग्राम वजन उठाना था। हालांकि, उन्हें टॉप प्राइज के लिए इंतजार करना पड़ा। चानू पहली कोशिश में वजन नहीं उठा पाईं लेकिन दूसरी कोशिश में उन्होंने यह कर दिखाया। वेटलिफ्टिंग में ‘स्नैच’ के अलावा ‘क्लीन एंड जर्क’ कॉम्पिटिशन लिफ्ट में से एक है। इसमें एथलीट अपनी जबरदस्त ताकत, मजबूती और टेक्निकल कंट्रोल को परखने के लिए शरीर के वजन की अलग-अलग कैटेगरी में मुकाबला करते हैं।
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चानू कैसे बनीं भारत की महान वेटलिफ्टर?
बीते सालों में चानू ने खुद को भारत की महानतम वेटलिफ्टर्म की श्रेणी में स्थापित किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स में उनकी यात्रा 2014, ग्लासगो से शुरू हुई थी जब उन्होंने सिल्वर मेडल भारत की झोली में डालकर सबको चौंका दिया था।
इसके चार साल बाद 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट, क्वीन्सलैंड में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल का खिताब जीता था। इस दौरान उन्होंने कुल 196 किलोग्राम भार उठाया था।
2022, बर्मिंघम में भी उन्होंने अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखा और 49 किलोग्राम श्रेणी में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। इस दौरान उन्होंने कुल 201 किलोग्राम का वजन उठाया और अपने ही रिकॉर्ड को तोड़ दिया।
लगातार चार कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतकर उन्होंने अपना प्रभुत्व स्थापित किया है। उनका यह प्रदर्शन उन्हें भारतीय वेटलिफ्टिंग के इतिहास में सबसे सफल बनाता है। कॉमनवेल्थ गेम्स के अलावा उनके नाम ओलंपिक्स में सिल्वर मेडल भी है। इसके अलावा वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में भी उनके नाम एक गोल्ड और दो सिल्वर मेडल हैं।



