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बेल्जियम की अदालत ने भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण को दी मंजूरी

यह फैसला भारतीय जांच एजेंसियों-सीबीआई और ईडी के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि चोकसी अब भी बेल्जियम की ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है, इसलिए उसका तुरंत भारत लौटना तय नहीं है।

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एंटवर्प: भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चaकसी को बड़ा झटका लगा है। बेल्जियम के एंटवर्प की एक अदालत ने चोकसी की गिरफ्तारी को वैध करार देते हुए भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को मंजूरी दे दी है। यह फैसला भारतीय जांच एजेंसियों-सीबीआई और ईडी के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि चोकसी अब भी बेल्जियम की ऊपरी अदालत में अपील कर सकता है, इसलिए उसका तुरंत भारत लौटना तय नहीं है।

जांच एजेंसियों ने क्या दलीलें दी

बेल्जियम अभियोजकों, जिन्होंने भारतीय एजेंसियों का प्रतिनिधित्व किया, ने अदालत में बताया कि सीबीआई ने जुलाई 2024 में चोकसी का लोकेशन बेल्जियम में ट्रेस किया था। इसके बाद एंटवर्प पुलिस ने 11 अप्रैल 2025 को उसे गिरफ्तार किया। तब से वह जेल में है और उसकी कई जमानत याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं।

भारत ने प्रत्यर्पण अनुरोध में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की कई धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7 और 13 शामिल कीं। ये अपराध बेल्जियम में भी दंडनीय हैं, जिससे “डुअल क्रिमिनैलिटी क्लॉज” की शर्त पूरी होती है। भारत ने अपने अनुरोध में संयुक्त राष्ट्र के दो प्रमुख कन्वेंशन- अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ सम्मेलन और भ्रष्टाचार के खिलाफ सम्मेल का भी हवाला दिया।

भारत ने कहा- चोकसी को एकांत कारावास नहीं होगा

भारतीय पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि प्रत्यर्पण के बाद चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल की बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा। अभियोजन पक्ष ने बताया कि यह बैरक यूरोपीय मानवाधिकार समिति (सीपीटी) के मानकों के अनुरूप है, जहां साफ पानी, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सुविधाएं, अखबार, टीवी और निजी डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध होगी और उसे एकांत कारावास नहीं दिया जाएगा।

भारत ने अदालत में यह भी कहा कि चौकसी अब भी भारतीय नागरिक है और उस पर 950 मिलियन डॉलर से अधिक की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। चौकसी ने दावा किया था कि उसने दिसंबर 2018 में भारतीय नागरिकता त्याग दी थी, लेकिन भारत ने उसके खिलाफ नागरिकता और वित्तीय अपराधों से जुड़े दस्तावेजी सबूत पेश किए।

13,000 करोड़ के PNB घोटाले का आरोप

मेहुल चौकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी पर भारत के इतिहास के सबसे बड़े बैंक घोटालों में से एक का आरोप है। 2018 में उजागर हुए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) स्कैम में लगभग 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

जांच में सामने आया कि चोकसी और मोदी ने मुंबई की पीएनबी ब्रेडी हाउस शाखा से बिना किसी मंजूरी के फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग्स और फॉरेन लेटर ऑफ क्रेडिट्स जारी करवाए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विदेशी बैंकों, जैसे एसबीआई (मॉरिशस और फ्रैंकफर्ट), एक्सिस बैंक (हांगकांग) और बैंक ऑफ इंडिया (एंटवर्प) से कर्ज लिया गया। जब ये फर्में कर्ज नहीं चुका पाईं, तो पीएनबी को ही 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की रकम चुकानी पड़ी।

चोकसी पर कई बड़े आरोप

सीबीआई और ईडी की जांच में चोकसी पर धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग), धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के कई आरोप हैं। एजेंसियों का कहना है कि उसने दर्जनों शेल कंपनियों और फर्जी फर्मों के जरिये करोड़ों रुपये विदेश भेजे। 2022 में ईडी ने चोकसी, उसकी पत्नी प्रीति चौकसी और अन्य के खिलाफ तीसरी चार्जशीट दायर की थी।

भारत सरकार ने चोकसी को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर (एफईसी) घोषित कर दिया है, जिससे उसकी संपत्तियों को जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

जहां मेहुल चोकसी बेल्जियम में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है, वहीं उसका भतीजा नीरव मोदी फिलहाल ब्रिटेन की जेल में है। उसने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील हार दी है, लेकिन अब तक वापस नहीं भेजा गया है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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