मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कंपनी के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण कंटेंट, डीपफेक कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन में रही कमियों के लिए माफी मांगी है। सरकार के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में मेटा के प्रतिनिधियों से कड़े सवाल पूछे गए और उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी जिम्मेदारी है। सरकार ने यह भी साफ किया कि कोई भी प्लेटफॉर्म बाल यौन शोषण से जुड़े कंटेंट से विज्ञापन के जरिए कमाई नहीं कर सकता और साथ-साथ कानूनी सुरक्षा का दावा भी नहीं कर सकता।
बैठक में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाए जाने के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।
मेटा के साथ कई मुद्दों पर हुई बात
रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों और मेटा के वैश्विक नेतृत्व के बीच विभिन्न मुद्दों पर दो दिनों तक बैठक चली। बैठक में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट मॉडरेशन और भारतीय कानूनों के पालन जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
बैठक के दौरान मेटा ने स्वीकार किया कि उसके कंटेंट मॉडरेशन में कमियां रही हैं। उसने प्लेटफॉर्म पर हानिकारक कंटेंट के प्रबंधन को लेकर खेद भी जताया। कंपनी के अधिकारियों की सरकार के साथ एक और बैठक भी प्रस्तावित है।
सरकारी अधिकारियों ने बैठक में यह भी कहा कि मेटा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता, क्योंकि उसके एल्गोरिद्म ही यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा और किसे अधिक बढ़ावा दिया जाएगा।
दरअसल, आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे मेटा को तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा मिलती है। इसका आधार यह है कि अरबों यूजरों द्वारा अपलोड किए जाने वाले हर कंटेंट की निगरानी करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। हालांकि, यह सुरक्षा तभी लागू होती है जब प्लेटफॉर्म अदालत या सरकार के अधिकृत आदेश मिलने पर आपत्तिजनक या गैरकानूनी कंटेंट को हटा दे।
सरकार का कहना है कि मेटा केवल एक निष्क्रिय मध्यस्थ नहीं है, क्योंकि उसके एल्गोरिद्म यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस तक पहुंचेगा। ऐसे में उसे आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
एक सरकारी सूत्र ने कहा, ‘उन्हें स्पष्ट रूप से बता दिया गया कि वे इंटरमीडियरी की परिभाषा में नहीं आते। वे खुद तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस व्यक्ति तक पहुंचेगा। इसलिए आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा उन पर लागू नहीं होती।’
मेटा ने कुछ खास कंटेंट को बढ़ावा देने की बात भी स्वीकार की
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मेटा के कामकाज और कारोबार के तौर-तरीकों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान कंपनी ने माना कि उसने कुछ विशेष श्रेणी के कंटेंट को बढ़ावा देने पर बड़ी रकम खर्च की थी और इस फैसले पर भी उसने खेद जताया।
गौरतलब है कि सोमवार को संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से अस्थायी रूप से हटाए जाने के मामले में मार्क जुकरबर्ग को व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए।
मेटा के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद दुबे ने बताया था कि कंपनी ने स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो करीब पांच घंटे तक, रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक फेसबुक पर उपलब्ध नहीं था।
बताते चलें कि बुधवार सुबह ये खबर आई कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की संसदीय समिति ने मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया है। जुकरबर्ग से कहा गया है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 23 जुलाई का वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने पर माफी मांगें और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करें।
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