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मणिपुर में हिंसा और आगजनी के आरोप में 21 उपद्रवी गिरफ्तार, नागा संगठनों और सरकार ने क्या बताया?

मणिपुर पुलिस ने बताया कि 18 अप्रैल को इम्फाल-जिरीबाम सड़क पर एक मशाल रैली निकाली गई थी। पटसोई से सगोलबंद तक निकाली गई रैली का आयोजन विभिन्न नागरिक समाज संगठनों द्वारा किया गया था। रैली के दौरान भीड़ हिंसक हो गई और उसने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके, गुलेल और बड़े पत्थरों का इस्तेमाल किया। इस उपद्रव में कई लोग घायल हो गए थे।

पिछले तीन वर्षों से जातीय संघर्ष की आग में झुलस रहा मणिपुर एक बार फिर अशांति की चपेट में है। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा के बाद जो हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे थे, वे मोइरांग ट्रोंगलाओबी में हुए बम धमाकों में दो मासूमों की मौत और उखरुल में दो नागा नागरिकों की हत्या के बाद फिर बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इन घटनाओं ने राज्य में नागा समुदायों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है।

रविवार को इम्फाल ईस्ट के कोईरेंगई और हट्टा गोलपाटी, काकचिंग जिले और इम्फाल वेस्ट के मयाई लाम्बी सहित कई इलाकों में रात के समय रैलियां निकाली गईं। हालांकि, कई जगह ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए।

पुलिस के अनुसार, 18 अप्रैल को इम्फाल-जिरीबाम सड़क पर पटसोई से सगोलबंद तक निकाली गई मशाल रैली के दौरान भीड़ ने पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके और गुलेल व भारी पत्थरों का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोग घायल हुए। इस दौरान सुरक्षा बलों के वाहनों में तोड़फोड़ की गई और सीआरपीएफ की 232वीं बटालियन के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस ने इस मामले में 21 लोगों को गिरफ्तार किया है और अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है।

मणिपुर पुलिस ने 21 उपद्रवियों को हिरासत में लिया

पुलिस ने बताया कि इस दौरान सुरक्षा बलों के सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई थी। इस हमले में सीआरपीएफ की 232वीं बटालियन के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद भीड़ को तितर-बितर कर दिया गया और स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। पुलिस ने अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि मोइरांग ट्रोंगलाओबी की घटना के पीछे कूकी उग्रवादियों के होने का संदेह जताया गया है। घटना के बाद मौके के पास एक रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) भी बरामद हुआ था। प्रदर्शनकारी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और त्वरित न्याय की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, पहाड़ी जिलों में सक्रिय कथित कूकी उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई जा रही है। जिस दिन घटना हुई उसके कुछ घंटे बाद ही आस-पास के इलाकों में काफी तनाव बढ़ गया था। पास ही स्थित एक सीआरपीएफ कैंप की तरफ उग्र भीड़ के बढ़ने और हालात के हिंसक बनने के बाद जवानों को फायरिंग करनी पड़ी जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी और 30 लोग घायल हुए थे।

रविवार को हिंसक प्रदर्शन के बाद मणिपुर पुलिस ने ‘एक्स’ पर चेतावनी देते हुए कहा है कि मीरा पैबी के नेतृत्व में हो रही रैलियों में असामाजिक तत्व घुसपैठ कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, कुछ लोग प्रदर्शनकारियों के बीच शामिल होकर पेट्रोल बम, लोहे के छर्रों वाली गुलेल और भारी पत्थरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा कई प्रदर्शनकारी शराब या अन्य नशीले पदार्थों के प्रभाव में भी पाए गए हैं, जबकि कुछ उकसाने वाले तत्व रैलियों से पहले ही पेट्रोल बम और अन्य हथियार उपलब्ध करा रहे हैं।

पुलिस ने चेतावनी दी है कि इन उकसावों के बावजूद सुरक्षा बलों ने अधिकतम संयम बरता है, लेकिन हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

5 दिनों के बंद का ऐलान, नागा संगठनों की अलग से शटडाउन की घोषणा

दो मासूम बच्चों की मौत के विरोध में नागरिक समाज संगठनों (CSOs) ने रविवार को पांच दिवसीय ‘टोटल शटडाउन’ का ऐलान किया। यह बंद रविवार, 19 अप्रैल को शुरू हुआ और 23 अप्रैल की मध्यरात्रि तक जारी रहने वाला है। इस आंदोलन का नेतृत्व ‘मीरा पैबी’ (महिला मशालधारी), विभिन्न नागरिक समाज संगठन और एक जन-सामूहिक कर रहे हैं।

उधर, 18 अप्रैल को उखरुल जिले के टीएम कासोम में अज्ञात हथियारबंद हमलावरों द्वारा दो नागा नागरिकों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना ने भी तनाव को और बढ़ा दिया है। यह हमला इम्फाल-दीमापुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-2) पर उस समय हुआ, जब वाहन उखरुल की ओर जा रहे थे। मृतकों की पहचान चीनाओशांग शोखवुंगनाओ (45) और यारुइंगम वाशुम (42) के रूप में हुई है।

यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC) ने टीएम कासोम की घटना को नागा लोगों की अखंडता पर हमला और एक पूर्व नियोजित साजिश करार दिया है। इसके विरोध में और मारे गए दो नागा नागरिकों के शोक में यूएनसी ने अलग से 20 अप्रैल की मध्यरात्रि से 23 अप्रैल की मध्यरात्रि तक सभी नागा क्षेत्रों में 72 घंटे (3 दिन) के ‘टोटल शटडाउन’ का आह्वान किया है।

यूएनसी ने एक बयान में कहा कि शोक के इन तीन दिनों के दौरान, मणिपुर के नागा समुदाय के लोग कुकी समुदाय के साथ सभी सामाजिक और आर्थिक संबंध निलंबित रखेंगे। यूएनसी के बयान का ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर (ANSAM), नागा वीमेन यूनियन (NWU) और जिला शीर्ष निकायों ने समर्थन दिया।

एएनएसएएम ने मांग की है कि सरकार टीएम कासोम हमले के मामले को त्वरित कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपे। साथ ही, नेशनल हाईवे-202 (NH-202) और सभी संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की अपील की।

सरकार ने नागा नागरिकों की हत्या की जांच NIA को सौंपा

राज्य सरकार ने नागा संगठनों की मांग को गंभीरता से लेते हुए टी.एम. कासोम मामले की जांच राष्ट्रीय एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो ने इस घटना को मुख्यमंत्री के दौरे के तुरंत बाद की गई “सोची-समझी बर्बरता” बताया है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को अनुग्रह राशि, अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी और घायलों को पूर्ण चिकित्सा सहायता देने का आश्वासन दिया है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार तब तक चैन से नहीं बैठेगी जब तक दोषियों को कानून के दायरे में नहीं लाया जाता।

गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजाम ने प्रदर्शनकारियों से जनहित में बंद वापस लेने की अपील की है। उन्होंने बताया कि ट्रोंगलाओबी धमाके के पीड़ित माता-पिता को राज्य सरकार में नौकरी की पेशकश की गई है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बंगाल चुनाव के कारण कुछ सुरक्षा कंपनियां वापस बुलाई गई हैं, लेकिन मुख्यमंत्री के अनुरोध पर 184 कंपनियां अभी भी राज्य में तैनात हैं। साथ ही, पुलिस के सुरक्षा बेड़े को मजबूत करने के लिए माइन-प्रोटेक्टेड और बुलेट-प्रूफ वाहनों जैसे आधुनिक संसाधन शामिल किए जा रहे हैं। उन्होंने जनता से शांति बहाली के लिए थोड़ा समय देने का अनुरोध किया है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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