कोलकाता: विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुश्किलों से जूझ रहीं तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी को गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट से भी झटका लगा। अदालत ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में बागी टीएमसी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता (LoP) नियुक्त किए जाने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर फिलहाल किसी तरह के अंतरिम रोक को लगाने से इनकार कर दिया।
ऐसे में अभी ऋतब्रत बनर्जी विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे और विधानसभा अध्यक्ष रथिन बसु का फैसला प्रभावी रहेगा। अदालत ने इस स्तर पर स्पीकर के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। जस्टिस कृष्णा राव ने मामले की अब अगली सुनवाई 28 जुलाई को तय की है। उन्होंने सभी पक्षों को अगली सुनवाई से पहले अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
कोर्ट में क्या कुछ हुआ?
अदालत के आदेश में कहा गया, ‘याचिकाकर्ता के पक्ष में अंतरिम आदेश देने के लिए अदालत को प्रथम दृष्टया इसमें कोई मामला नहीं मिला। इसलिए अंतरिम राहत देने से इनकार किया जाता है।’
ममता बनर्जी के करीबी और तृणमूल कांग्रेस विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया था। इससे पहले बुधवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता बिल्वादल भट्टाचार्य से पूछा था कि 9 मई को प्राप्त उस पत्र पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता नामित किया गया था।
अदालत ने यह भी नोट किया कि अध्यक्ष ने उस प्रतिनिधित्व पर कोई निर्णय नहीं लिया, लेकिन 3 जून को बागी खेमे की ओर से मिले दूसरे पत्र पर कार्रवाई करते हुए ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता घोषित कर दिया। कोर्ट ने सवाल उठाया कि स्पीकर की ओर से यह स्पष्ट क्यों नहीं किया गया कि पहले पत्र को नजरअंदाज क्यों किया गया, जबकि दूसरे पत्र को लगभग तत्काल स्वीकार कर लिया गया।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार के कुछ ही दिन बाद पार्टी के विधायी दल में विभाजन उभरकर सामने आया। टीएमसी के अधिकांश विधायक बागी हो गए। पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पार्टी के फैसले की अवहेलना करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने 58 विधायकों का समर्थन हासिल किया और विधानसभा में विपक्ष के नेता बन गए।
इस घटनाक्रम से पहले 1 जून को तृणमूल नेतृत्व ने ऋतब्रत बनर्जी को ‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में पार्टी से निष्कासित करने का फैसला किया था।
इस बीच, टीएमसी के कई विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए उस पहले दस्तावेज में, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता बनाने का प्रस्ताव था, उसमें उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल किए गए। फर्जी हस्ताक्षर के इस विवाद को लेकर अब ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी सीआईडी जांच के घेरे में हैं।
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