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अमेरिका-ईरान के बीच डील फाइनल, पेरिस के वर्साय पैलेस में ट्रंप ने किया हस्ताक्षर; तेहरान ने क्या कहा?

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया, तो उस पर फिर से बमबारी की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।

पेरिस: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर गुरुवार (भारतीय समय) को औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कर दिय। कई महीनों के संघर्ष के बाद इसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, अमेरिका-ईरान समझौता कब तक बना रहता है, इसे लेकर भी संशय बरकरार है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में ट्रंप मे समझौते के पेपर पर साइन किए। इसके बाद ईरानी राष्ट्रपति ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से समझौते पर हस्ताक्षर किया। इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर कालीबाफ ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए थे। समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्साय पैलेस में आयोजित रात्रिभोज के दौरान इस समझौते की हार्ड कॉपी पर आधिकारिक हस्ताक्षर किए। उस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी उनके साथ मौजूद थे। व्हाइट हाउस ने हस्ताक्षर से जुड़ा एक वीडियो भी जारी किया है।

ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्होंने वर्साय में ईरान से जुड़े इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि हस्ताक्षरित समझौते की तस्वीर ईरान और मध्यस्थ देशों को भेज दी गई है, ताकि इसे औपचारिक रूप से प्रभावी बनाया जा सके।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य लगभग चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त करना और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलना है। इस बीच ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते का उल्लंघन किया, तो उस पर फिर से बमबारी की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।

जिनेवा वार्ता की तैयारी जारी

हालांकि दोनों देशों के वार्ताकारों की बैठक अभी भी स्विट्जरलैंड के जिनेवा में प्रस्तावित है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शुक्रवार को होने वाली यह बैठक समझौते पर हस्ताक्षर के लिए नहीं होगी। बैठक होगी या नहीं, इस पर अंतिम फैसला कुछ घंटों में लिया जा सकता है।

यह भी स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज के डिजिटल रूप से लागू होने के बाद स्विट्जरलैंड में किसी औपचारिक हस्ताक्षर समारोह की आवश्यकता नहीं रह गई है।

तेल बिक्री और प्रतिबंधों में राहत

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि तेहरान को बिना किसी परिवहन या बीमा संबंधी प्रतिबंध के अपना तेल बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए और उससे होने वाली आय प्राप्त करने का अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की जब्त हुई संपत्तियों तक उसकी पहुंच में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई है। बघाई के मुताबिक, तेल से जुड़े प्रतिबंध तत्काल हटाए जाने चाहिए, ताकि व्यापक समझौते की अंतिम शर्तों पर बातचीत के लिए निर्धारित 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान फिर से तेल निर्यात शुरू कर सके।

ईरान का कहना है कि MoU में 60 दिनों का एक ढांचा भी तय किया गया है, जिसके दौरान दोनों पक्ष ऐसे किसी भी कदम से बचेंगे जो समझौते को कमजोर कर सकता हो। बघाई ने कहा कि इस अवधि में दूसरा पक्ष नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और न ही क्षेत्र में सैन्य तैनाती बढ़ाएगा।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम का क्या होगा?

बघाई ने कहा कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम देश के भीतर ही रहेगा और उसे विदेश नहीं भेजा जाएगा। हालांकि, संवर्धित यूरेनियम को डाइल्यूट करने का विकल्प चर्चा के विषयों में शामिल है। ईरान ने साथ ही कहा कि उसके मिसाइल कार्यक्रम या व्यापक रक्षा नीति पर किसी प्रकार की बातचीत नहीं हुई है।

बघाई ने कहा कि ईरान की मिसाइलें ‘केवल दागने के लिए हैं, बातचीत के लिए नहीं।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की रक्षा क्षमताओं पर वर्तमान प्रक्रिया के तहत किसी भी पक्ष से चर्चा नहीं की जाएगी।

खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध-पूर्व स्थिति में नहीं लौटेगा। ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री नौवहन नियमों के तहत अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन जारी रखेगा।

उन्होंने कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को दी जाने वाली सेवाओं के लिए ईरान शुल्क वसूलेगा। ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि जलडमरूमध्य की जिम्मेदारी ईरान और ओमान की है।

कालिबाफ ने कहा कि इस समझौते में ईरान में लगभग 300 अरब डॉलर के निवेश का प्रावधान शामिल है। इस राशि का एक हिस्सा संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण परियोजनाओं पर खर्च किया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने कहा कि 300 अरब डॉलर के पैकेज की खबरें भ्रामक हैं।

मिसाइलों के विषय पर पेरिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यदि क्षेत्र के अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, तो ईरान को उनसे वंचित करना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘अगर सऊदी अरब और कतर समेत अन्य देशों के पास ऐसी क्षमताएं हैं, तो मुझे लगता है कि यह ठीक है।’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि समझौते के बावजूद अमेरिकी सैन्य बल कुछ समय तक खाड़ी क्षेत्र में बने रहेंगे। इससे संकेत मिलता है कि समझौते के क्रियान्वयन के दौरान वॉशिंगटन सुरक्षा उपस्थिति बनाए रखना चाहता है।

यह भी पढ़ें- ‘मोदी के PM रहते अगर हमला हुआ तो भारत की मदद के लिए अमेरिका साथ खड़ा होगा’, डोनाल्ड ट्रंप का वादा

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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