नई दिल्लीः दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड मामले में दिल्ली पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को होटल के कुक केशव नेगी को हिरासत में लिया। जांच में सामने आया है कि आग लगने की घटना में उसकी कथित लापरवाही की भूमिका थी। इस हादसे में विदेशी नागरिकों समेत 21 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई घायल हुए थे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी केशव नेगी दिलशाद गार्डन का निवासी है। वह होटल के किचन में काम करता था। शुरुआती जांच में आग लगने के पीछे मानवीय लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी के संकेत मिले हैं। अधिकारियों को होटल परिसर में अग्नि सुरक्षा से जुड़े कई गंभीर उल्लंघन और फायर सेफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी खामियां भी मिली हैं।
इस मामले में पुलिस होटल मालिक लवकेश बजाज, स्वीटी सरकार और पुष्पो सरकार को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। होटल मालिक लवकेश बजाज के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। हादसे के बाद पुलिस जब उसके घर पहुंची थी तो वह परिवार समेत वहां से गायब मिला था। बाद में उसे गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे चार दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
21 लोगों की मौत, 12 विदेशी नागरिक भी शामिल
इस भीषण अग्निकांड में कुल 21 लोगों की मौत हुई है जिनमें 9 भारतीय और 12 विदेशी नागरिक शामिल हैं। मृत विदेशी नागरिक बांग्लादेश, लाइबेरिया, नाइजीरिया और मोजाम्बिक के बताए गए हैं।
राहत और बचाव अभियान के दौरान इमारत से 47 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था। साकेत स्थित मैक्स अस्पताल के अनुसार, अभी भी 15 घायल मरीज भर्ती हैं, जिनमें 13 विदेशी नागरिक हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों की हालत स्थिर है और उनके स्वास्थ्य में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।
रेस्टोरेंट में लगी आग, छह मंजिला इमारत को चपेट में लिया
दिल्ली फायर सर्विस के मुताबिक, आग शनिवार सुबह करीब 8:50 बजे प्रेस एन्क्लेव रोड स्थित छह मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने बी-एन-बी रेस्टोरेंट में लगी थी। देखते ही देखते आग ऊपरी मंजिलों पर बने कमरों और बेसमेंट को भी अपने चपेट में ले लिया।
अग्निशमन विभाग के अनुसार, आग की लपटों ने बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर की पांच मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। आग से उत्पन्न भीषण गर्मी और घने धुएं के कारण सबसे ज्यादा नुकसान हुआ और कई लोग अंदर फंस गए।
दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। जांच टीम को अब तक किसी एलपीजी सिलेंडर विस्फोट के प्रमाण नहीं मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक, होटल के बेसमेंट और टॉप फ्लोर पर दो किचन संचालित किए जा रहे थे, जहां एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे। हालांकि इनमें से किसी सिलेंडर में विस्फोट नहीं हुआ। जांचकर्ताओं का मानना है कि आग संभवतः आंतरिक विद्युत वायरिंग में शॉर्ट सर्किट के बाद तेजी से फैली।
फायर एनओसी नहीं, छह कमरों की अनुमति पर चल रहा था 25 कमरों का गेस्ट हाउस
जांच में कई चौंकाने वाली अनियमितताएं सामने आई हैं। दिल्ली फायर सर्विस के मुख्य अग्निशमन अधिकारी अभिलाष मलिक ने बताया कि इमारत के पास वैध फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं थी।
जानकारी के अनुसार, फ्लरिस स्टे गेस्ट हाउस को ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ श्रेणी के तहत केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन इमारत में 25 कमरे बनाए गए थे और उनका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि होटल में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था। बेसमेंट में बने रेस्टोरेंट में प्रवेश और निकास का मार्ग भी एक ही था और वह काफी संकरा था। आग लगने के बाद बेसमेंट में मौजूद कई लोग धुएं और गर्मी के कारण बाहर नहीं निकल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त निकास मार्ग और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था होती तो जनहानि को काफी हद तक रोका जा सकता था।
दिल्ली पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां मामले की संयुक्त जांच कर रही हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस स्तर पर हुई और हादसे के लिए आखिर कौन-कौन जिम्मेदार है।

