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महाराष्ट्र में आरक्षण पर नया विवाद: मराठा आंदोलन के बाद, बंजारा समुदाय ने उठाई एसटी कोटा की मांग

इस आंदोलन से आहत होकर शनिवार को धारशिव के उमरगा में एक 32 वर्षीय बेरोजगार युवक ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसने तीन दिन पहले जिंतूर में हुए विरोध प्रदर्शन में भी भाग लिया था।

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मराठा और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के बीच आरक्षण को लेकर चल रहे टकराव के बाद, अब अनुसूचित जनजाति (एसटी) और बंजारा समुदायों के बीच भी तनाव बढ़ गया है। बंजारा समुदाय खुद को अनुसूचित जनजाति श्रेणी में शामिल करने की मांग कर रहा है, ताकि उन्हें शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सके। इस मांग को लेकर बंजारा समुदाय द्वारा कई विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

इस आंदोलन से आहत होकर शनिवार को धारशिव के उमरगा में एक 32 वर्षीय बेरोजगार युवक ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसने तीन दिन पहले जिंतूर में हुए विरोध प्रदर्शन में भी भाग लिया था। अपने सुसाइड नोट में उसने हैदराबाद गजट के आधार पर बंजारा समुदाय को आरक्षण लाभ देने की मांग की है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जालना में 11 सितंबर से दो बंजारा युवक, श्रीकांत राठौड़ और हरीश राठौड़, कलेक्टर कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हैं। श्रीकांत ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक हार नहीं मानेंगे। बंजारा समुदाय ने 15 सितंबर को जालना और बीड में बड़े मोर्चों की भी योजना बनाई है। बंजारा समुदाय के वरिष्ठ नेता हरिभाऊ राठौड़ ने कहा, “पूरा समुदाय अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो गया है।”

बंजारा समुदाय की मांग पर एसटी समुदाय का क्या कहना है?

बंजारा समुदाय का तर्क है कि हैदराबाद गजट के रिकॉर्ड के अनुसार, उनका समुदाय अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आता है। इसी गजट के आधार पर महाराष्ट्र सरकार ने 2 सितंबर को एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी कर मराठा समुदाय को ओबीसी श्रेणी में शामिल किया था। यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्रता से पहले मराठवाड़ा क्षेत्र निजाम के शासन के अधीन था, और उस रियासत के भूमि और अन्य रिकॉर्ड हैदराबाद गजट में दर्ज थे।

वहीं, अनुसूचित जनजाति समुदाय के नेता बंजारों की इस मांग का कड़ा विरोध कर रहे हैं। शिवसेना विधायक अमश्या पाडवी ने इस मुद्दे पर सरकार से इस्तीफा देने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि वह अपनी समुदाय के कोटे पर अतिक्रमण के प्रयासों के सामने चुप नहीं रह सकते। कांग्रेस नेता पद्माकर वाल्वी ने भी बंजारों को ST श्रेणी में शामिल करने के किसी भी कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि बंजारा समुदाय को पहले से ही विमुक्त जाति या घुमंतू जनजाति श्रेणी के तहत 3% आरक्षण मिल रहा है।

महायुति सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता इंद्रनील नाइक ने बंजारा समुदाय की मांग का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह एक तथ्य है कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में बंजारा समुदाय अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में आता है, और यह फैसला हैदराबाद गजट के आधार पर लिया गया था। उन्होंने आगे कहा कि खान-पान और बोलचाल के मामले में बंजारा समुदाय पूरे देश में एक समान है।

सरकार से नाराज ओबीसी समुदाय

इस बीच, ओबीसी समुदाय भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है। कांग्रेस के विधायक दल के प्रमुख विजय वडेट्टीवार ने ओबीसी नेताओं की एक बैठक बुलाई, जिसमें 10 अक्टूबर को नागपुर में एक बड़ा मोर्चा निकालने का फैसला किया गया। यह मोर्चा यशवंत स्टेडियम से शुरू होकर संविधान चौक पर समाप्त होगा। वडेट्टीवार ने कहा कि यह सरकार ओबीसी के हितों को नुकसान पहुंचाना चाहती है। उन्होंने दावा किया कि कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने से ओबीसी आरक्षण बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

बुधवार को लातूर जिले में ओबीसी समुदाय के एक 35 वर्षीय व्यक्ति ने भी कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी, क्योंकि उसे डर था कि हैदराबाद गजट को स्वीकार करने वाले सरकारी प्रस्ताव के बाद ओबीसी आरक्षण खत्म हो जाएगा। यह ओबीसी समुदाय द्वारा किया जाने वाला पहला बड़ा विरोध प्रदर्शन हो सकता है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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