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हाईकोर्ट ने पलटा ‘जन नायकन’ पर एकल पीठ का आदेश, सेंसर सर्टिफिकेट पर फिर अटकी विजय की आखिरी फिल्म

अदालत ने एकल पीठ को निर्देश दिया है कि वह सेंसर बोर्ड का जवाब सुनने के बाद मामले पर दोबारा विचार करे। साथ ही, फिल्म के निर्माताओं, केवीएन प्रोडक्शंस को अपनी याचिका में संशोधन करने की अनुमति भी दी गई है।

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Photo Credit:Jagadish Palanisamy/Instagram

सेंसर सर्टिफिकेट के पेंच में फंसी अभिनेता विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ (Jana Nayagan) को मद्रास हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने फिल्म को लेकर पहले दिए गए एकल पीठ के आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया और मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। इस फैसले से फिल्म की रिलीज एक बार फिर अधर में लटक गई है और निर्माताओं को ताजा कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा।

मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि पहले मामले की सुनवाई के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। अदालत ने निर्देश दिया कि एकल पीठ अब सीबीएफसी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दे और निर्माता पक्ष को अपनी याचिका में आवश्यक संशोधन करने की छूट दी।

क्या है विवाद

दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब सीबीएफसी ने फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट देने में देरी की और बाद में इसे दोबारा समीक्षा के लिए रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया। इससे फिल्म की 9 जनवरी को प्रस्तावित रिलीज टल गई। इसके बाद निर्माता कंपनी केवीएन प्रोडक्शंस ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

निर्माताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सतीश परासरन, प्रदीप राय और विजयन् सुब्रमण्यम ने अदालत में दलील दी कि बोर्ड ने पहले ही फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट देने की जानकारी दे दी थी और सुझाए गए सभी संशोधन भी कर लिए गए थे। इसके बावजूद प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया और फिल्म को फिर से समीक्षा के लिए भेज दिया गया। उनका यह भी कहना था कि जिन दृश्यों पर आपत्ति जताई गई, वे पहले ही हटाए जा चुके थे, ऐसे में दोबारा समीक्षा का कोई औचित्य नहीं था।

वहीं, सीबीएफसी की ओर से कहा गया कि परीक्षण समिति के एक सदस्य ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया है। इस शिकायत में कुछ दृश्यों के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सेना से जुड़े प्रतीकों को गलत तरीके से दिखाने का आरोप लगाया गया था। इसी आधार पर फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया।

9 जनवरी को मद्रास हाईकोर्ट की एकल पीठ ने निर्माताओं के पक्ष में फैसला देते हुए सीबीएफसी को तुरंत सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि बोर्ड की चेयरपर्सन ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दोबारा समीक्षा का निर्देश दिया। हालांकि, इसी आदेश के खिलाफ सीबीएफसी ने खंडपीठ में अपील की, जिस पर सुनवाई के बाद अब फैसला पलट दिया गया है।

खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि पहले बोर्ड को जवाब दाखिल करने का पूरा मौका नहीं दिया गया था। साथ ही यह भी कहा कि निर्माता पक्ष ने सीधे सर्टिफिकेट जारी करने की मांग की, जबकि उन्हें पहले उस आदेश को चुनौती देनी चाहिए थी, जिसमें फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा गया था।

‘जन नायकन’ को अभिनेता विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है, क्योंकि इसके बाद वे पूरी तरह सक्रिय राजनीति में उतरने वाले हैं। विजय पहले ही सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि वे किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और आगामी चुनाव को “लोकतांत्रिक युद्ध” करार दे चुके हैं। ऐसे में फिल्म से जुड़ा यह विवाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।

फिल्म पहले 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन प्रमाणन में देरी के चलते यह संभव नहीं हो सका। अब अदालत के नए आदेश के बाद रिलीज और आगे टलने की आशंका है। इसके अलावा, अप्रैल-मई में संभावित तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के चलते भी फिल्म की रिलीज रणनीति प्रभावित हो सकती है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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