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राज की बात: जो जगह कभी डकैतों का घर था, अब चीतों की शरण स्थली है

पालपुर कूनो जो कभी डकैतों का घर था, बब्बर शेर का अभयारण्य बनने वाला था। अब विदेशी चीतों का आश्रय स्थल हो गया है। अभी इस जगह 49 चीते हैं।

आज से तीस साल पहले मै मध्य प्रदेश में सरकार द्वारा प्रस्तावित एशियाटिक लायंस (शेर) के दूसरे वन संरक्षित क्षेत्र के रिपोर्टिंग के लिए पालपुर कूनो गया था। एक सप्ताह तक भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी जिला में फैले बीहड़, जंगल, नदी देखा। जंगल में ही रहा। दिग्विजय सिंह की इच्छा थी कि पालपुर कूनो के जंगलो में गुजरात के गिर के जंगल से शेर मंगवाकर बसाया जाए। इससे दिल्ली के करीब होने का फायदा पर्यटकों को भी मिलेगा। कूनो नदी में बाढ़ आया था। वहां के वन संरक्षक- ललन कुमार चौधरी जो जिप्सी चला रहे थे, उन्होंने मुश्किल से नदी पार कराई और हमलोग देर शाम पालपुर के खंडहरनुमा महल में रात्रि विश्राम के लिए पहुंचे। अब यहां वन विभाग का रेस्ट हाउस है। गांव के लोग भी मिलने आए। उन्होंने बताया जब चंबल में डकैती और अपहरण आम समस्या थी, तब कुख्यात डकैत भी यहीं आराम करते थे।

मंदिर और डकैत

गांव के लोगों की सहमति शेर के अभयारण्य और गुजरात से स्थानांतरण के लिए दूसरे घर के रूप मे बसावट के लिए जरूरी थी। इसके लिए उन्हें पुनर्वास के लिए खेती की जमीन और घर के लिए अलग जमीन दी जानी थी जो उन्हें कोर एरिया से बाहर निकलने के लिए प्रेरित कर सके। हमलोग श्योपुर और मुरैना भी गये। एक पुरातन मंदिर का दर्शन किया। इसके बारे में जानकारी दी गई कि डकैत लोग जब भी किसी बड़ी घटना को अंजाम देने निकलते, तब यहीं पर पूजा करते थे।

मुरैना में मुझे उस रेसेटलमैनट कॉलोनी में भोजन करने जाना पड़ा, जो सरकार ने आत्मसमर्पण करने वाले बागियों के लिए बनाया था। यहां बड़े ग्लास में छाछ दिया गया। मुझे निवेदन किया गया एक दिन और रूक जाएं। अगले दिन मलखान सिंह के पोते की बारात मैनपुरी जा रही है, बारात में मैं भी शामिल हो जाऊं।

अब इस कॉलोनी में कुख्यात बागियों के बाल बच्चे रहते हैं। कोई पुलिस उपाधीक्षक है, कोई MBBS डॉक्टर, कोई जिला परिषद का सदस्य। उन्हीं में से एक ने बताया कि हमलोगों ने मीना कुमारी को किडनैप किया था, चम्बल में शूटिंग करने आई थी, हमलोग ने उनसे पाकीजा फिल्म में देखी सीन पर नाचने और गाने को कहा। बाद में जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र चतुर्वेदी आए और ‘उनके निवेदन पर रिहा भी कर दिया। हमलोग किसी महिला को छूते भी नहीं थे।’

डकैतों का घर था कभी…अब चीतों का राज

पालपुर कूनो जो कभी बागी डकैतों का घर था, बब्बर शेर का अभयारण्य बनने वाला था, अब विदेशी चीतों का आश्रय स्थल हो गया है। अभी इस जगह 49 चीते हैं। 22 जून को बार्सिलोना से चार और चीता आ रहे है,जिसे राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी कुनो में रिलीज करेंगी।

जब 2022 में कूनो में चीता प्रोजेक्ट शुरू हुआ तब, पब्लिक सेक्टर की इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी के तहत 52.52 करोड़ रुपये चार वर्षों के लिए दिये, जिसकी अवधि इस साल सितंबर में समाप्त हो रही है। जिस जगह पर कभी सहायक वन संरक्षक कभी सर्वोच्च वन अधिकारी रहते थे, अब यहां पर एडिशनल प्रिंसिपल कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट की पदस्थापना है।

यह भी पढ़ें- राज की बातः जब डीएम रहते अजीत जोगी ने सिगरेट के पैकेट पर लिखकर दे दी 5 एकड़ जमीन

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लव कुमार मिश्र
लव कुमार मिश्र, 1973 से पत्रकारिता कर रहे हैं,टाइम्स ऑफ इंडिया के विशेष संवाददाता के रूप में देश के दस राज्यों में पदस्थापित रह। ,कारगिल युद्ध के दौरान डेढ़ महीने कारगिल और द्रास में रहे। आतंकवाद के कठिन काल में कश्मीर में काम किए।
लव कुमार मिश्र
लव कुमार मिश्र, 1973 से पत्रकारिता कर रहे हैं,टाइम्स ऑफ इंडिया के विशेष संवाददाता के रूप में देश के दस राज्यों में पदस्थापित रह। ,कारगिल युद्ध के दौरान डेढ़ महीने कारगिल और द्रास में रहे। आतंकवाद के कठिन काल में कश्मीर में काम किए।
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